डीपीएस के छात्रों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

शहर के सौन्दर्य विकास, स्वच्छता के लिए जन सहयोग से जिला प्रशासन द्वारा चलाए गये एक्शन उदयपुर कार्यक्रम के तहत दिल्ली पब्लिक स्कूल के नन्ने-मुन्नों ने फतहसागर की पाल पर विविध विषयों आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रमों के पश्चात पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता रैली निकाली गई।

मुख्य आयोजना अधिकारी सुधीर दवे ने बताया कि दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्राइमरी सेक्शन के नन्ने बालकों द्वारा फतहसागर पाल पर ‘सेव टाईगर’ (बाघ बचाओं) का संगीत के साथ नाट्य प्रदर्शन किया गया [..]


मन को सही दिशा में प्रेरित करने का साधन है स्वाध्याय

श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि कुमुद ने कहा कि मन को सही दिशा में प्रेरित करने के लिए सबसे सरल और सात्विक साधन है स्वाध्याय, स्वाध्याय करने का अभ्यास रखिये। स्वाध्याय करते हुए आपको स्वत: अनुभव होगा कि आपका मन उसमें रमने लगा है। मन स्वाध्याय में तल्लिन हो जायेगा तो फिर अन्य बातो कि तरफ आपका कोई ध्यान नही जायेगा।

वे आज पंचायती नोहरे में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होनें कहा कि अपने पास मन शक्ति विद्यमान हैं। [..]

रोटरी क्लब मींरा व रोटरी मेवाड़ ने मनाया ईद मिलन समारोह

रोटरी क्लब मेवाड़ व रोटरी क्लब मींरा के संयुक्त तत्वावधान में आज ओरियंटल पैलेस रिसोर्ट में इमोशन ऑफ पावर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया; वहीं कलड़वास क्षेत्र के निराश्रित बच्चों के साथ ईद मिलन समारोह मनाया गया। [..]


प्रत्येक जीव में परमात्मा बनने की शक्ति: आचार्य कनकनन्दीजी

प्रत्येेक जीव में सुप्त रूप से महान बनने की अथवा आध्यात्मिक दृष्टि से परमात्मा बनने की शक्ति विद्यमान हैं। लेकिन आवश्यकता है उसे पुरूषार्थ से अभिव्यक्त करने की। उक्त विचार वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी गुरूदेव ने आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में आयोजित प्रात:कालीन धर्मसभा में उपस्थित श्रावकों के समक्ष कार्तिकेयानु प्रेक्षाग्रन्थ से द्रव्य गुण पर्यायों की व्यापकता व सम्भावना बताते हुए व्यक्त किये।

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सांसारिक रहते हुए भी धर्म का पालन संभव

आत्मरति महाराज ने कहा कि मनुष्य सांसारिक रहते हुए भी धर्म का पालन कर सकता है। वे आज जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ जिनालय द्वारा हिरण मगरी से. 4 स्थित श्री शांतिनाथ रामचन्द्र सूरी आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहीं।

उन्हेोनं कहा कि यदि मनुष्य अंहकार को छोड़ दे, पाप नहीं करें,सभी जीवों से मैत्री भाव रखें,परहित की चिन्ता करें [..]


जनसहयोग से ही मानव का विकास संभव

मानव जन्म से लेकर मृत्यु तक समाज, राष्ट्र व आम जनता का किसी न किसी रूप में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग लेता ही है। जन सहयोग से मानव जीवन का विकास होता है। व्यक्ति सभी से अलग एकाकी होकर नही जी सकता। समाज-राष्ट्र उसकी मूल-भूत आवश्यकता है।

उपरोक्त विचार आज श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ‘कुमुद’ ने पंचायती नोहरा में चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किये। [..]

रोटरी क्लब उदय ने किया डॅा. माथुर का सम्मान

रोटरी क्लब उदय ने आज मेडीकल क्षेत्र और विशेष रूप से गेस्ट्रोएन्ट्रोलोजी क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए आज रविन्द्र नाथ टैगोर मेडीकल कॉलेज के ग्रेस्टोएन्टोलाजी विभागाध्यक्ष डॅा. विपिन माथुर का प्रशसित पत्र,शॉल एवं स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। [..]

अणुव्रत महासमिति का 65वां अधिवेशन सम्पन्न

अणुव्रत महासमिति का तीन दिवसीय 65 वां अधिवेशन 27 जुलाई को आध्यात्म साधना केन्द्र, छतरपुर रोड, महरोली, दिल्ली में आचार्य श्री महाश्रमण के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। [..]

शिक्षण सामग्री का निःशुल्क वितरण

आज एच.आर. (मानव संसाधन) फाउण्डेशन ट्रस्ट, उदयपुर के द्वारा अपने सेवा कार्य के तहत जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क स्कूल बेग किट ( जिसमें एक स्कूल बेग, 5 नोट बुक, पेन्सीलें, रबर, बॉक्स आदि सामग्री थी ) का वितरण राजकीय प्राथमिक विद्यालय, नीचली भागल, धर्म तलाई गॉंव – उमरड़ा, उदयपुर, राजस्थान में किया गया एवं आंगनवाड़ी गॉंव कानपूर में बच्चों को निःशुल्क स्लेटें दी गई। [..]


सम्यक दर्शन के बाद होता है स्वभाव का प्रारम्भ: आचार्य कनकनन्दीजी

संसार में जीव द्रव्य जब तक मिथ्यात्मक अवस्था में रहता है तब तक उसकी विभाव पर्याय रहती है। किन्तु तत्वार्थ का श्रद्धान होने पर उसका स्वभाव में परिणमन प्रारम्भ होता है। उक्त विचार वैज्ञनिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी गुरूदेव ने आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में आयोजित प्रात:कालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।

आचार्यश्री ने द्रव्य, गुण, पर्याय के स्वरूप का विस्तार से प्ररूपण करते हुए द्रव्यों की व्यापकता, उपादेयता व उनके सामान्य विशेष गुणों का व्याख्यान कर जीव द्रव्य के स्वभाव, विभाव, शुद्ध, अशुद्ध अवस्थाओं के विषय में बताया। [..]