प्रताप सिंह बारहठ की जयंति पर रक्तदान व कवि सम्मेलन

अमर शहीद क्रांतिकारी प्रताप सिंह बारहठ की जयंति पर शहादत दिवस के मौके पर शनिवार रात्रि सुखाडि़या ओडिटोरियम में जुटे राष्ट्र भक्ति व वीर रस के कवि सम्मेलन में एक के बाद एक रचनाआंे ने युवाओं एवं श्रोताअेां में देश के प्रेम के प्रति नया जोश घोल दिया।

 

प्रताप सिंह बारहठ की जयंति पर रक्तदान व कवि सम्मेलन

अमर शहीद क्रांतिकारी प्रताप सिंह बारहठ की जयंति पर शहादत दिवस के मौके पर शनिवार रात्रि सुखाडि़या ओडिटोरियम में जुटे राष्ट्र भक्ति व वीर रस के कवि सम्मेलन में एक के बाद एक रचनाआंे ने युवाओं एवं श्रोताअेां में देश के प्रेम के प्रति नया जोश घोल दिया।

रायल्स ग्रुप उदयपुर के तत्वावधान में हुए कवि सम्मेलन का आगाज अलवर के विनित चौहान ने अपनी प्रस्तुति देते हुए कहा कि पाकिस्तान की नहीं प्रसन्न्सा – देश द्रोह का नारा है, ठण्डी झीलों से निकला जो जलसा सा अंगारा है , तुमको भी मुफ्ती जी इसका सचमुच ध्यान रहा होता – अगर तुम्हारा बेटा सीमा पर कुर्बान हुआ होता से किया।

इसके बाद मथुरा के श्यामसुन्दर अकिंचन ने चोट दर चोट सहता है यह घायल मुकद्दर है लिपट कर पांव से बजती है पायल का मुकद्दर है अकिंचन दीद को कोई उम्र सारी तरसता है नेन में चैन से सोता है यह काजल का मुकद्दर है। मुम्बई के सुनील व्यास ने अपनी पक्तियों में देश के आज के हालत पर हम भाईयों ने खानदानी खेत बांट लिये है जहां फसले काटनी थी वहा प्लाट कांट दिये। इसी तरह शक्करगढ़ के राजकुमार बादल ने नेताओं पर व्यग्य कसे।

उन्होने कहा कि मॉ की आंखों से झरता रक्तिम खारा जल बोला सिम्मी मुजाहिदीन लश्कर पर लाल गोला, सत्ता का सूरज बाबू ऐसे ही ढल नहीं जाये, अच्छे दिन लाने वाले नारे बदल न जाये। कवि कविता किरण ने आज के परिवारों पर अपनी कविता के माध्यम से कहा कि जब फुलों का हो जाता है डाली के प्रति आदर कम, तब खुलते है गांव गांव गली गली में वृद्धाश्रम ।

इसी तरह उज्जेन के राहुल शर्मा ने मेवाड़ की भूमि को नमन करते हुए कहा कि तब मेवाडी धरती से उम्मीदों का उदगार हुआ, महाराणा का रूप धार खुद एकलिंग अवतार हुआ। शाहपुरा के दिनेश बंटी ने वीर रस की कविता के माध्यम से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया उन्होने कहा कि केसरी की बाता यो असर कर गई , राणा की रेलगाडी पाछे फर गई, थारी बाता राणा जेी रे मन में जच गई मेवाडी धरा री आन बान।

हिम्मत सिंह उज्जवल ने अपने कहा कि सावचेत हो जा रे देश रा जवान…… वा केसरी वा जोरावर, वा तो कुंवर प्रताप ने अंग्रेजा सु अड गया भारत रा काटण संताप ने। आनन्द रत्नु ने अपनी कविता हम शान से जीते है हमें खु द पर नाज है अपनी अलग ही धुन है हम अलग मिजाज है हमको वन की बेडिया जीने नहीं देती, पुरखों चला खुद को मिटाना रिवाज है। कवि सम्मेलन के सुत्रधार एवं संचालन सिद्धार्थ देवल ने कहा कहा कि जिनके नाखूनों को नोंचते रही चिमटिया, प्रश्न पुछती है खून से सनी वो उंगलिया, छोटी आयु में जो करते काम बडे रहे , गोरी ताकतों के आगे जो शेल से अडे रहे।

समारोह के मुख्य अतिथि राज्य धरोहर एवं प्रोनत समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, अध्यक्षता सी.डी. देवल ने की। विशिष्ठ अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश भट्, महापौर चन्द्र सिंह कोठारी, जिला महामंत्री प्रेम सिंह शक्तावत थे।

प्रथम प्रताप सिंह बारहठ सम्मान शहीद अभिनव नागौरी को:-

अतिथियों ने कुंवर प्रताप सिंह बारहठ सम्मान शहीद अभिनव नागौरी के परिजनों को दिया। इस अवसर पर उन्हें स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र दिया गया।

शचीन्द्र नाथ के साथ थे प्रताप:-

केसरी सिंह बारहठ के पुत्र प्रताप ने शचीन्द्रनाथ के साथ मिल कर दिल्ली में क्रांतिकारियों के संगठन का कार्य किया। वे जोधपुर के रातानाड़ा क्षेत्र में पकड़ें गये उन्हे बंदी बनाया गया और साथियों के नाम उजागर करने के लिए प्रलोभन दिये गये। मगर उन्होने कहा कि वे कोई बात नहीं खोलेंगे। अब तक एक मॉ कष्ट पा रही है, मुंह खुल गया तो एक मॉ के बदले कई माताएं कष्ट पाएगी। इस पर उन्हें पांच साल की सजा हुई। उन्हे बरेली सेन्ट्रल जेल में रख गया। वहीं यातनाएं सहते सहते मात्र 25 साल की उम्र में 24 कई 1918 को उन्होने आखिरी सांस ली।

अमर शहीद क्रांतिकारी प्रताप सिंह बारहठ की जयंति पर शहादत दिवस के मौके पर रविवार को टाउन हॉल स्थित शहीद स्मारक पर क्रान्तिकारी प्रताप सिंह बारहठ की शहादत दिवस पर रायल्स ग्रुप मेवाड की ओर से उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित कर उनके बताये कदमों पर चलने का आव्हान किया ।

पुष्पांजली कार्यक्रम में शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी मौजुद थे। वक्ताओं ने आयोजित श्रद्धांजली सभा में कहा कि केसरी सिंह बारहठ के पुत्र प्रताप ने शचीन्द्रनाथ के साथ मिल कर दिल्ली में क्रांतिकारियों के संगठन का कार्य किया। वे जोधपुर के रातानाड़ा क्षेत्र में पकड़ें गये उन्हे बंदी बनाया गया और साथियों के नाम उजागर करने के लिए प्रलोभन दिये गये। मगर उन्होने कहा कि वे कोई बात नहीं खोलेंगे। अब तक एक मॉ कष्ट पा रही है, मुंह खुल गया तो एक मॉ के बदले कई माताएं कष्ट पाएगी। इस पर उन्हें पांच साल की सजा हुई। उन्हे बरेली सेन्ट्रल जेल में रख गया। वहीं यातनाएं सहते सहते मात्र 25 साल की उम्र में 24 मई 1918 को उन्होने आखिरी सांस ली।

प्रताप सिंह बारहठ की जयंति पर रक्तदान व कवि सम्मेलन

103 युवाओं ने किया रक्तदान –

श्री भूपाल करणी चारण छात्रावास में रविवार को रॉयल्स ग्रुप मेवाड तथा लोकमित्र ब्लड बैंक एवं थेलिसीमीया रिसर्च सेन्टर की ओर से रक्तदान महादान कार्यक्रम में 103 युवाओं ने रक्तदान किया। डॉ0 नरेन्द्र सिंह चारण, सार्दुल सिंह चारण, विष्णु प्रताप सिंह चारण ने बताया कि इस अवसर पर ब्लड गु्रुप, इसीजी, बीपी की जॉच की गई । इस अवसर पर हरेन्द्र सिंह सोदा, सिद्धार्थ देवल, हिम्मत सिंह उज्जवल, शिवदल मेवाड के मनीष मेहता, मोटियार परिषद के सम्भाग पाटवी घनश्याम भीण्डर, उपप्रधान राजेन्द्र सिंह बरवाडा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे ।

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