झीलों में साबुन, डिटर्जेंट व अन्य सफाई रसायनो को नही जाने दें

झील प्रेमियों ने होटल मालिको व आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे झीलों में साबुन, डिटर्जेंट व अन्य सफाई रसायनो को नही जाने दें। रविवार को आयोजित संवाद में डॉ अनिल मेहता ने कहा कि घाटों पर बड़ी मात्रा में कपड़े इत्यादि धुलते है। इसी प्रकार होटल, गेस्ट हाउस परिसर की सफाई में केमिकल इस्तेमाल होते है। यह सब झील में पंहुच झील को प्रदूषित करते हैं।

 

झीलों में साबुन, डिटर्जेंट व अन्य सफाई रसायनो को नही जाने दें

उदयपुर, झील प्रेमियों ने होटल मालिको व आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे झीलों में साबुन, डिटर्जेंट व अन्य सफाई रसायनो को नही जाने दें। रविवार को आयोजित संवाद में डॉ अनिल मेहता ने कहा कि घाटों पर बड़ी मात्रा में कपड़े इत्यादि धुलते है। इसी प्रकार होटल, गेस्ट हाउस परिसर की सफाई में केमिकल इस्तेमाल होते है। यह सब झील में पंहुच झील को प्रदूषित करते हैं।

तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि गत दिनो झील सतह पर एक दुधिया रंग की परत थी व सैंकड़ो की तादाद में मछलियां मर गई थी। यह साबित करता है कि झील में भारी मात्रा में साबुन व अन्य रसायन मिले हुए थे। नंदकिशोर शर्मा व द्रुपद सिंह ने कहा कि इन्ही झीलों का पानी हम पीते है और इन्ही में गंदगी डालते है। यह एक तरह का अपराध व आत्महत्या का कृत्य है।

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इस अवसर पर श्रमदान कर झील से खरपतवार व अन्य गंदगी को हटाया गया। श्रमदान में सुमित विजय, गायत्री, पंकज ने भी भाग लिया।

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