जीभ के कैंसर का ब्रेकीथेरेपी द्वारा सफल इलाज

खाना न खा पाने एवं बोलने में परेशानी के चलते रोगी ने स्थानीय हाॅस्पिटल में परामर्श लिया। बायोप्सी की जांच में कैंसर की पुष्टि हुई। चूंकि कैंसर का निदान एवं इलाज लेने में रोगी ने काफी वक्त निकाल दिया था इसलिए आधी से ज्यादा जीभ पर कैंसर फैल चुका था। रोगी कई हाॅस्पिटल में परामर्श के बाद निराश हो कर अंततः गीतांजली कैंसर सेंटर आया जहां रेडिएशन ऑन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित से परामर्श लिया। सामान्यतः जीभ पर कैंसर का इलाज सर्जरी द्वारा किया जाता है परंतु इस रोगी में कैंसर फैल चुका था इसलिए रेडियोथेरेपी के साथ ब्रेकीथेरेपी द्वारा इलाज करने का निर्णय लिया गया। अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक ‘‘आईजीआरटी’’ से रोगी का इलाज किया गया। तत्पश्चात् हर रोज 1 घंटें की ब्रेकीथेरेपी से जीभ के कैंसर का इलाज किया गया। इस कारण रोगी दूसरे ही दिन से खाने-पीने एवं बोलने में सक्षम हो गया

 

जीभ के कैंसर का ब्रेकीथेरेपी द्वारा सफल इलाजउदयपुर 29 जुलाई 2019, गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के रेडिएशन ऑन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित ने झालावाड़ निवासी राधेश्याम (उम्र 35 वर्ष) के जीभ में कैंसर का ब्रेकीथेरेपी द्वारा इलाज कर स्वस्थ किया। गत जनवरी 2019 में रोगी को जीभ पर छाले की परेशानी हुई थी।

खाना न खा पाने एवं बोलने में परेशानी के चलते रोगी ने स्थानीय हाॅस्पिटल में परामर्श लिया। बायोप्सी की जांच में कैंसर की पुष्टि हुई। चूंकि कैंसर का निदान एवं इलाज लेने में रोगी ने काफी वक्त निकाल दिया था इसलिए आधी से ज्यादा जीभ पर कैंसर फैल चुका था। रोगी कई हाॅस्पिटल में परामर्श के बाद निराश हो कर अंततः गीतांजली कैंसर सेंटर आया जहां रेडिएशन ऑन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित से परामर्श लिया। सामान्यतः जीभ पर कैंसर का इलाज सर्जरी द्वारा किया जाता है परंतु इस रोगी में कैंसर फैल चुका था इसलिए रेडियोथेरेपी के साथ ब्रेकीथेरेपी द्वारा इलाज करने का निर्णय लिया गया। अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीक ‘‘आईजीआरटी’’ से रोगी का इलाज किया गया। तत्पश्चात् हर रोज 1 घंटें की ब्रेकीथेरेपी से जीभ के कैंसर का इलाज किया गया। इस कारण रोगी दूसरे ही दिन से खाने-पीने एवं बोलने में सक्षम हो गया। और सातवें दिन उसे हाॅस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। रोगी अब पूर्णतः स्वस्थ है। एवं उसका इलाज राजस्थान सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निःशुल्क किया गया।

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इस प्रक्रिया में डाॅ रमेश के साथ रेडिएशन ऑन्कोलोजिस्ट डाॅ मेनाल भंडारी व डाॅ किरण चिगुरुपल्ली एवं एनेस्थेटिस्ट डाॅ नवीन पाटीदार ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रक्रिया द्वारा इलाज से रोगी के जीभ के नितकार्य जैसे बातचीत एवं खाना/पानी निगलने के कार्यों को बचाया गया। इसके अतिरिक्त इलाज के बाद रोगी के चेहरे पर कोई भी निशान न होने से इस प्रक्रिया द्वारा इलाज के काॅस्मेटिक फायदे भी शामिल है।

क्या होती है ब्रेकीथेरेपी?

डाॅ रमेश पुरोहित ने बताया कि ब्रेकीथेरेपी एक प्रकार की रेडिएशन थेरेपी है जिसका उपयोग कैंसर कोशिकाओं को मारने एवं ट्यूमर को कम करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में रोगी को पूर्णतः बेहोश किया जाता है और कैथेटर इम्प्लांट कर कैंसर सेल्स को नष्ट करने की डोज़ दी जाती है। इससे कम समय में हाई डोज़ की मदद से कैंसर के ट्यूमर को खत्म किया जाता है।

गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के सीईओ प्रतीम तम्बोली ने कहा कि, ‘गीतांजली कैंसर सेंटर में एक ही छत के नीचे मेडिकल, सर्जिकल एवं रेडिएशन ऑन्कोलोजिस्ट की विशाल एवं अनुभवी टीम मौजूद है। देश के कुछ चुनिंदा सेंटरों पर ही जीभ के कैंसर के लिए ब्रेकीथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है जिसमें उदयपुर के गीतांजली कैंसर सेंटर का भी नाम शामिल है।’

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