वैराग्यनंदी महाराज के अवतरण दिवस पर उमड़ा भक्ति एवं श्रद्धा का ज्वार

आदिनाथ दिगम्बर चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से हिरणमगरी सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ में भवन में चातुर्मास आचार्य वैराग्यनंदी महाराज के अवतरण दिवस पर चल रहे दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन आज श्रद्धालुओं में भक्ति एवं श्रद्धा का ज्वार उमड़़ पड़ा। चारों ओर आचार्यश्री के जयकारों से भवन गूंजायमान हो उठा।

 

वैराग्यनंदी महाराज के अवतरण दिवस पर उमड़ा भक्ति एवं श्रद्धा का ज्वार

उदयपुर। आदिनाथ दिगम्बर चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से हिरणमगरी सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ में भवन में चातुर्मास आचार्य वैराग्यनंदी महाराज के अवतरण दिवस पर चल रहे दो दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन आज श्रद्धालुओं में भक्ति एवं श्रद्धा का ज्वार उमड़़ पड़ा। चारों ओर आचार्यश्री के जयकारों से भवन गूंजायमान हो उठा।

ट्रस्ट अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि प्रारम्भ में श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्य जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल से पूजा करते हुए अपने भावों की अभिव्यक्ति की। आचार्यश्री के 46 वें जन्मजयंती पर आदिनाथ भवन को दुल्हन की तरह सजाया गया। विशाल मंच का निर्माण किया गया, जहाँ पर आचार्यश्री द्वय वैराग्यंनदी एवं आचार्य सुन्दरसागर महाराज सहित साधु-सन्त बिराजमान थे। मंच के पीछे एक विशाल स्क्रीन लगायी गई, जिस पर आचार्यश्री के जन्म से लेकर अभी तक की जीवनी को दर्शाया गया।

सचिव मदन देवड़ा ने बताया कि इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने 46 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष में 46 प्रकार की मिठाई के, 46 थाल फल के तथा सूखे मेवे के 46 थाल सजा कर अपनी भक्ति प्रदर्शित की। समारोह में कारंवा परिवार की ओर से आचार्य वैराग्यनंदी महाराज कीे शुद्ध चंदन का निर्मित चैत्यालय भेंट किया। इस चैत्यालय को आचार्य वैराग्यंनदी ने आचार्य सुंदरसागर महाराज को उनके संघ के लिये भेंट किया। इस पर चारों ओर से जयकारे लगे। दिल्ली से श्रद्धालुओं ने विभिन्न प्रकार की बोलियों का लाभ ले कर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।

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प्रातः 7 बजे आदिनाथ मंदिर प्रांगण से द्धय आचार्य संघ के साथ श्रीजी की 24 पालकी एवं नवीन रथ में श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। शाम को आचार्य संघ की आरती व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।

इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि जल हमारें जीवन का मुख्य आधार, चंदन संसार की सबसे सुगंधित वस्तु, अक्षत अंखड़ता का प्रतीक, पुष्प भेंट की सबसे मनोहारी वस्तु, नेवैद्य रोग नाश का कारण, दीपक जीवन को प्रकाशमय बनाने वाला, धूप वस्तुओं को मिश्रण तथा फल-फूल दुखों से मुक्ति की प्रतीक है। जीवन में इन सभी का अवश्य उपयोग करना चाहिये। कार्यक्रम का संचालन आचार्य सुंदरसागर महाराज एवं एंकर विपुल जैन ने किया।

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