सलूम्बर सीट पर बन रही है त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति

आदिवासी बाहुल्य सलूम्बर विधानसभा सीट वैसे तो कांग्रेस की परम्परागत सीट रही है,यदि पुराने आंकड़ों पर नज़र दौड़ाए तो यहाँ होने कम 15 चुनावो में से 9 बार कांग्रेस ने बाज़ी मारी है जबकि चार बार भाजपा, एक बार स्वतंत्र पार्टी और एक बार जनता पार्टी ने बाज़ी जीती है। इस सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता रघुवीर मीणा लड़ रहे, भाजपा के वर्तमान विधायक अमृत मीणा इस बार भी भाजपा के टिकट पर मैदान में है। लेकिन इसी सीट से कांग्रेस की 10 साल से सराड़ा प्रधान और अपना अच्छा खासा जनाधार तैयार कर चुकी रेशमा मीणा ने निर्दलीय के तौर मैदान में उतर कर पहली बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति पैदा कर दी है।

 

सलूम्बर सीट पर बन रही है त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति

आदिवासी बाहुल्य सलूम्बर विधानसभा सीट वैसे तो कांग्रेस की परम्परागत सीट रही है,यदि पुराने आंकड़ों पर नज़र दौड़ाए तो यहाँ होने कम 15 चुनावो में से 9 बार कांग्रेस ने बाज़ी मारी है जबकि चार बार भाजपा, एक बार स्वतंत्र पार्टी और एक बार जनता पार्टी ने बाज़ी जीती है। इस सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता रघुवीर मीणा लड़ रहे, भाजपा के वर्तमान विधायक अमृत मीणा इस बार भी भाजपा के टिकट पर मैदान में है। लेकिन इसी सीट से कांग्रेस की 10 साल से सराड़ा प्रधान और अपना अच्छा खासा जनाधार तैयार कर चुकी रेशमा मीणा ने निर्दलीय के तौर मैदान में उतर कर पहली बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति पैदा कर दी है।

कांग्रेस के रघुवीर मीणा के पक्ष में राहुल गाँधी से लेकर अशोक गहलोत तक चुनाव प्रचार और सभा कर चुके है तो भाजपा ने कई स्टार प्रचारक मैदान में उतार दिए है , लेकिन दोनों ही दलों को बागी रेशमा मीणा से भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रेशमा मीणा का सराड़ा इलाके में खासा प्रभाव है। और वह दस साल से सराड़ा की प्रधान रह चुकी है। अभी हाल ही में करणी सेना के राजपूत नेता लोकेन्द्र सिंह कालवी ने रेशमा मीणा को समर्थन देने की अपील की है। जिससे रेशमा मीणा की स्थिति मज़बूत हुई है। और इसका प्रभाव कांग्रेस पर पड़ता दिखाई दे रहा है। हालाँकि एंटी इंकम्बेंसी का फायदा भी कांग्रेस को मिलता नज़र आ रहा है। कुल मिलाकर इस विधानसभा सीट से रोचक और त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।

सलूम्बर विधान सभा सीट से कांग्रेस के रघुवीर मीणा, भाजपा से अमृत मीणा, निर्दलीय रेशमा मीणा के अलावा बहुजन समाज पार्टी से सोमालाल मीणा, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया से गोविन्द कलसुआ, जनता सेना से गंगा देवी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी लेनिनवादी) के देवीलाल मीणा, शिव सेना के लक्ष्मण मीणा, भारतीय युवा शक्ति के लालचंद मीणा और आल इंडिया हिंदुस्तान कांग्रेस पार्टी के लालूराम भील भी मैदान में है।

इस विधानसभा सीट से 55% मतदाता अनुसूचित जनजाति वर्ग से है जबकि 5% मतदाता अनुसूचित जाति के है। जबकि 40 फीसदी मतदाता सामान्य और ओबीसी वर्ग से जिनमे पटेल, राजपूत, ब्राह्मण और अन्य शामिल है।

          सलूम्बर सीट का पुराना इतिहास

1952 के पहले चुनाव से कांग्रेस के फूला मीणा ने रामराज्य परिषद के स्वरुप सिंह को 10828 वोटो से हराया था। जबकि 1957 में कांग्रेस के सोहन लाल ने स्वतंत्र पार्टी के परस राम को 10268 वोटो से हराया था। 1962 में स्वतंत्र पार्टी के मावा मीणा ने कांग्रेस को शिव राम को 1581 वोटो से हराया था। 1967 और 1972 में कांग्रेस के रोशनलाल ने स्वतंत्र पार्टी के लक्ष्मण और बादामी लाल को 10442 और 12359 वोटो से पटखनी दी थी जबकि 1977 की जनता लहर से जनता पार्टी के टिकट पर मावजी ने कांग्रेस के थान सिंह को 7972 मतों से मात दी थी।

1980 के मध्यावधि चुनाव में थान सिंह ने भाजपा के मावजी को 9284 मतों से परास्त किया था। 1985 में थान सिंह ने पुनः 14770 वोटो से भाजपा के किशनलाल को मात दी थी। 1990 में भाजपा के फूलचंद ने 5138 मतों से कांग्रेस की थान सिंह को परास्त किया था। वहीँ फूलचंद 1998 में कांग्रेस के रूपलाल के हाथो 11693 मतों से मात खा गए। 2003 में भाजपा के अर्जुन मीणा ने कांग्रेस की गंगा देवी को 6872 मतों से हराया था।

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2008 में कांग्रेस के रघुवीर मीणा ने भाजपा के नरेंद्र मीणा ने 23353 वोटो से परास्त किया। रघुवीर मीणा ने 2009 के लोकसभा चुनाव में विधायक पद पर रहते हुए कांग्रेस की टिकट पर उदयपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर सांसद पद पर चुने जाने पर विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। रघुवीर मीणा के इस्तीफे से रिक्त सीट पर हुए उपचुनाव में रघुवीर मीणा की पत्नी बसंती देवी ने भाजपा के अमृत लाल मीणा को 3098 मत से जीत हासिल की थी। हालाँकि 2013 की मोदी लहर में कांग्रेस की बसंती देवी को अमृत मीणा ने 36651 के भारी बढ़त के साथ परास्त किया था।

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