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दीपों का त्यौहार  है, आया

कविता 
 
By Almas 

दीपों का  त्यौहार  है, आया
चारों  ओर  उजियाला  है, लाया
द्वेष - भाव  मिटाने  देखो 
दिवाली  का  पर्व  है  आया 

सज  गए  हैं, बाजार, मोहल्ले
और  घर के  आंगन  भी  सारे
सजा  रंगोली  से आंगन को
सबने  घी के है, दीये  जलाये
 
दीपों  की  रोशनी  से  सारा  जग  है, फिर  जगमगाया
मिटाने  को  अंधकार  का  साया
दीपों  का  त्यौहार  है, आया

 चहुँ   ओर   सतरंगी  रौनक  ये लाया 
 पटाखों  और   फूलझड़ियों  ने  भी
 हर  घर  में  है, शोर  मचाया 
 
अपनों  के  संग  नई  प्रीत  जगाने 
दिल  से  सबको  गले  लगाने, देखो
दीपों का  त्यौहार  है, आया 

लक्ष्मी  के  पूजन  की  भी  हो गई  है, सारी  तैयारी 
मीठे - मीठे  स्वादिष्ट  पकवानों  से,         
क्या  खूब  सजी है, थाली
नए - नए  परिधान  पहन  कर 
बच्चों  का  मन  है, भाया

अंतर्मन  के  अंधकार  को  दूर  कर
सबके  ह्रदय  में  खुशियों  की  सौगात  है, लाया 
प्रेम  और  भाईचारे  का  संदेश  लेकर
दीपों  का त्यौहार है  आया 
दीपों  का  त्यौहार है  आया