इबादत में गुज़री शबे कद्र की पूरी रात
शबे कद्र के दिन ज़कात और सदका (दान) देने का विशेष महत्व है
उदयपुर 1 अप्रैल 2024। दाऊदी बोहरा समुदाय ने रमज़ान माह की सबसे पवित्र रात लैलतुल कद्र (जिन्हे शब् ए कद्र भी कहा जाता है) को पूरी रात मस्जिदों में जागकर इबादत और दुआओ के साथ गुज़ारी। 31 मार्च अप्रैल और 1 अप्रैल की दरमियानी रात में बीते कल 31 मार्च के सूर्यास्त से लेकर 1 अप्रैल के सूर्योदय तक मस्जिदों में इबादत कर अपने गुनाहों की माफ़ी और अपने मुल्क हिंदुस्तान में अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगी गई।
दाऊदी बोहरा जमात के प्रवक्ता मंसूर अली ओड़ा वाला ने बताया की रसूलपुरा, वजीहपुरा, मोहियदपुरा, खानपुरा, चमनपुरा, खांजीपीर, खारोल कॉलोनी और पुला स्थित हॉल में प्रतिवर्ष की भांति शबे कद्र की विशेष नमाज़ अदा की गई।
इस अवसर पर सभी बोहरवाड़ी और अन्य मोहल्लो की मस्जिदों में विशेष रूप से विद्युत सज्जा की गई और मस्जिदों के अंदर फूलो से सजावट की गई। वहीँ नमाज़ के बाद सभी मस्जिदों में सामूहिक रूप से नियाज़ और सेहरी का इंतेज़ाम किया गया।
शबे कद्र का महत्व
शबे कद्र की रात को की गई अल्लाह की इबादत को हजारों महीनों की इबादत से बेहतर माना जाता है। इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरआन मजीद में आया है कि शबे कद्र एक हजार महीनों से अफ़ज़ल (बेहतर) है। शबे कद्र के दिन रोज़े, इबादत के साथ विशेषकर ज़कात और सदका (दान) देने का विशेष महत्व है। बोहरा समुदाय के लोग अमूमन इस दिन अपने हिस्से के ज़कात का पैसा अल्लाह की राह में खर्च करते है।
क्या है ज़कात
इस्लाम धर्म के अनुसार ज़कात को पांच में से एक आधार स्तंभ माना जाता है। हर मुस्लमान को अपने धन में से ज़कात की अदायगी ज़रूरी है। इस्लाम में रमजान के पाक महीने में हर हैसियतमंद मुसलमान पर जकात देना जरूरी बताया गया है। आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है, उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी ज़रूरतमंद या गरीब को देना ज़कात कहा जाता है।
जुम्मातुल विदा 5 अप्रैल को
बोहरा समुदाय द्वारा आगामी शुक्रवार 5 अप्रैल 2024 को आखिरी जुमा यानि जुमातुल विदा की विशेष नमाज़ अदा की जाएगी। आखिरी जुमा यानि जुमातुल विदा की विशेष नमाज़बोहरवाड़ी स्थित रसूलपूरा, वजीहपुरा, मोहियदपुरा, खानपुरा, चमनपुरा, खारोल कॉलोनी, खांजीपीर तथा पुला स्थित हॉल में अदा करवाई जाएगी।