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नाज़नीन अली नाज़ द्वारा लिखित उपन्यास "ख़लिश" का विमोचन

"ख़लिश"लव जिहादके मुद्दे पर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास है जो देश की सियासी और सामाजिक तानेबाने को दर्शाता है

 

मेवाड़ की धरती से कुवैत तक का सफर तय करने वाली नाज़नीन अली नाज़ ने दो दशक विदेश में बिताने के बाद भी अपनी संस्कृति,  भारतीय सभ्यता और परंपरा को अपने दिल में जिंदा रखा है। इस बात का प्रमाण वह खुद अपने इस शेर से देती है जिसको वह अधिकांश कार्यक्रम की शुरुआत में बड़े जोश से पढ़ती हैं।

मेरा वतन मेरी मोहब्बत जान मेरी हिंद है 
रहती कहीं भी हूं मगर पहचान मेरी हिंद है

अपने इसी शेर से उन्होंने हाल ही में, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गुफ़्तगू साहित्यिक संस्थान द्वारा आयोजित कार्यक्रम "गुफ़्तगू साहित्य समारोह-2022" में सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया। 

इस कार्यक्रम में नाज़ द्वारा लिखित नॉवेल "ख़लिश" के हिंदी और उर्दू संस्करण का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि डॉ. वीरेंद्र तिवारी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रयागराज जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रेम प्रकाश, विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वयं नाज़नीन अली नाज़ और जाने माने साहित्यकार डॉ. हसीन जिलानी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र जय ने किया। सभागार में गुफ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ गाज़ी के अलावा देश विदेश के कवि, लेखक और साहित्यकार उपस्थित थे।

नाज़नीन अली नाज़ के उपन्यास पर चर्चा करते हुए डॉ. हसीन जिलानी ने अपना लेख पढ़ा। उन्होंने कहा कि अदब की दुनिया में बतौर शायरा अपनी पहचान बनाने वाली नाज़नीन अपने इस खू़बसूरत उपन्यास के बाद एक लेखिका के रूप में भी पहचानी जाने लगी हैं। "ख़लिश" लव जिहाद के मुद्दे पर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास है जो देश की सियासी और सामाजिक तानेबाने को दर्शाता है। उन्होंने कहा साहित्य जगत में इस उपन्यास पर चर्चा अवश्य होनी चाहिए।

नाज़ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वो अपने देश की गंगा-जमनी तहज़ीब को ज़िंदा रखना चाहती है और इसी वजह से उन्होंने उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में उपन्यास लिखा। उन्होंने कहा कि मोहब्बत का कोई मज़हब नहीं होता, मोहब्बत एक जज़्बा है जो एक इंसान को दूसरे इंसान के करीब लाता है और यही जज़्बा उन्होंने अपने उपन्यास में दर्शाया है। नाज़ ने कहा कि उनकी कामना यही है कि इस नॉवेल के ज़रिए वो लोगों तक मुहब्बत का पैगाम पहुंचा सके।

नाज़नीन अली नाज़, उदयपुर में जन्मी और पली बढ़ी हैं। विवाह के उपरांत वो कुवैत में निवास करने लगी। कुवैत की बैंक मस्कत में वित्त प्रबंधक की ज़िम्मेदारी निभाने के साथ साथ वो अपने साहित्यिक जीवन को भी हर दिन नई बुलंदियों तक ले जा रही हैं। 

नाज़नीन अली नाज़ को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग और इंडियन पोएट्स यूनियन के तत्वाधान दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के सभागार में "शान ए अदब अवार्ड 2021", गुफ़्तगू साहित्यिक संस्थान द्वारा "सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान", इंडियन पोएट्स यूनियन द्वारा "साहिर लुधियानवी अवार्ड 2021", मौर्य कला परिसर कुवैत द्वारा "दिनकर अवार्ड", समरस साहित्य सम्मान आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

वर्तमान में नाज़नीन अली नाज़ राइटर्स फोरम कुवैत की महासचिव और महिला काव्य मंच कुवैत की अध्यक्ष है। इसी तरह वो गल्फ उर्दू काउन्सिल की कार्यकारिणी सदस्य हैं। वो कई साहित्यिक संस्थानों से जुड़ी हुई हैं और रेडियो कुवैत और भारतीय राजदूतावास सहित सैंकड़ों मंचों से काव्य पाठ कर चुकी हैं।