प्यू रिसर्च के दावे में कितना दम ?

प्यू रिसर्च के दावे में कितना दम ?

क्या 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश से मात्र 2611 लोगो से ली राय को आधार माना जा सकता है 

 
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हाल ही में प्‍यू रिसर्च सेंटर नामक एक अमेरिकी थिंकटैंक जो कि सामाजिक मुद्दों से लेकर डिमोग्रैफिक ट्रेंड्स पर जानकारी सामने रखता है। उसने अपने सर्वे के लिए भारत में 25 मार्च से लेकर 11 मई के बीच 2,611 व्यस्क लोगों से संपर्क किया गया। सभी लोगों से कथित सीधा यानी फेस-टू-फेस बात की गई। अमेरिका में प्यू रिसर्च सेंटर ने 20 मार्च से 26 मार्च के बीच 3,576 एडल्ट लोगों का सर्वे किया। वहीं भारत और अमेरिका से बाहर 11 देशों के नागरिकों से फ़ोन पर और 10 देशों में फेस टू फेस और ऑस्ट्रेलिया में कथित तौर पर ऑनलाइन पोर्टल और फेस-टू-फेस दोनों ही माध्यमों से संपर्क किए गए। 

अमेरिकी थिंक टैंक 'प्यू रिसर्च सेंटर' के इस सर्वे में दावा किया गया है कि देश में रहने वाले तकरीबन 80 फीसदी भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के प्रति सकारात्मक रवैया रखते हैं। सीधे शब्दों में कहा जाए तो हर 10 में से 8 भारतीयों की पसंद प्रधानमंत्री मोदी हैं। इनमें 55 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी पहली पसंद बताया है, वो उन्हें काफ़ी पसंद करते हैं.जबकि 20% आबादी पीएम मोदी को पसंद नहीं करती या वो उनकी पहली पसंद नहीं हैं। 

प्यू रिसर्च सेंटर की तरफ़ से जारी किए गए इस सर्वे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी ज़िक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक़ नेताओं में भारतीयों की दूसरी पसंद कांग्रेस नेता राहुल गांधी हैं। लगभग दस में से छह भारतीय राहुल गांधी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर 46 प्रतिशत लोगों की राय पॉजिटिव है।  

अब बात करते है कि प्यू रिसर्च के दावे में कितना दम है? क्या मात्र 2611 लोगो की राय को देश की राय मानी जा सकती है ? 140 करोड़ से अधिक आबादी में मात्र 2611 लोग यानी 0.00002% लोगो की राय शुमारी से निकाले गए नतीजे भ्रामक नहीं कहे जाएंगे ? भारत जैसा घनी और विशाल आबादी वाला देश जहाँ हर 100 किलोमीटर पर लोगो का खान पान. संस्कृति, भाषा, रीती रिवाज़ बदल जाती है वहां पर लोगो की राय या राजनितिक समझ भी बदल जाती है। उदाहरण के तौर पर नार्थ ईस्ट के लोगो के मुद्दों को राजस्थान और गुजरात के साथ जोड़कर नहीं देख सकते। ठीक वैसे ही उत्तरप्रदेश की राजनीती को तमिलनाडु की राजनीती से नहीं जोड़ सकते। 

प्यू रिसर्च की माने तो 80 फीसदी लोगो की पहली पसंद मोदी है लेकिन पिछली लोकसभा के नतीजों पर गौर करे तो मोदी की पार्टी यानी भाजपा और उनकी सहयोगी पार्टियों को 37 फीसदी से अधिक वोट और 353 सीट (जिनमे अकेले भाजपा की 303 सीट शामिल है) मिले है जबकि भाजपा के खिलाफ बिखरे हुए विपक्ष को 63 फीसदी वोट मिले है। 585 लोकसभा सीट में से 232 सीट जिनमे से कांग्रेस के नेतृत्व वाले तत्कालीन गठबंधन को 91 सीट मिली थी। बची हुई 141 सीट भाजपा कांग्रेस से बहार अलग अलग क्षेत्रीय दलों को मिली जिनमे कई दल कभी एनडीए के साथ तो कभी यूपीए के साथ दिखाई देते है। 

सबसे अहम् सवाल इस सर्वे में भारत के अतिरिक्त अन्य देशो के लोगो की रायशुमारी भी ली गई है।  भारत के बाहर से लोगो की रायशुमारी में यह स्पष्ट नहीं की किन लोगो की राय ली गई मतलब भारत से बाहर रहने भारतीयों की राय ली गई है या वहीँ के मूलनिवासियो की रायशुमारी की गई ? भारत से बाहर निवासरत लोग भारत के बारे में कैसे राय बना सकते है उनकी राय वहीँ होगी जो भारतीय मीडिया प्रसारित करती है। जबकि वर्ल्ड फ्रीडम इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मीडिया की रैंकिंग 161 पायदान पर है। 

जब एक अमेरिकी हिंडनबर्ग की अडानी के संबंध में चर्चित रिपोर्ट आई थी तो भारतीय मीडिया ने इसे भारतीय व्यापार जगत पर हमला मान लिया था। वहीँ आज एक और अमेरिकी रिपोर्ट (प्यू रिसर्च) को भारतीय मीडिया में सर पर चढ़ाया जा रहा है। मीडिया का यह रवैया सत्ता के साथ कदमताल ही कहा जा सकता है।

प्यू रिसर्च की रिपोर्ट तभी सार्थक मानी जा सकती है जब तक सैंपल की साइज़ कम से कम 1 या 2 फीसदी तो हो। इतने कम सैंपल साइज से नतीजा निकालना सही मायनो में सार्थक नहीं कहा जा सकता है।        

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