अब नज़र आ रहा संसद में संतुलन


अब नज़र आ रहा संसद में संतुलन 

पहले सिर्फ सत्ता पक्ष था, अब प्रतिपक्ष भी नज़र आ रहा है 

 
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संसद के दोनों सदनों में दो दिन से सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच तीखी नोंक झोंक चल रही है। बिल्कुल उस रोमांचक मैच की तरह कभी पलड़ा इस तरफ तो कभी पलड़ा उस तरफ।  पिछले 10 सालो से सदन में सिर्फ एकतरफा मैच हो रहा था। सिर्फ सत्ता पक्ष ही नजर आ रहा था प्रतिपक्ष की कोई आवाज़ सुनाई नहीं देती थी। कभी कभार महुआ मोइत्रा और राहुल गाँधी की आवाज़ सुनाई देती थी। 

न सिर्फ सदन बल्कि मैन स्ट्रीम मीडिया भी सरकार की आवाज़ ही बुलंद करता दिखाई देता था। हालाँकि आज भी मैनस्ट्रीम मीडिया की सरकार के प्रति निष्ठा कम नहीं हुई है। लेकिन इस वर्ष के चुनावो के बाद न सिर्फ संसद को प्रतिपक्ष की आवाज़ मिली बल्कि तथाकथित मैनस्ट्रीम मिडिया के समानांतर फ्री लांसर और यू ट्यूबर अपने चैनल के ज़रिये एक प्रकार से प्रतिपक्ष की आवाज़ को बुलंद कर रहे है। 

कल ही लोकसभा में राहुल गाँधी ने बयान दिया था की "हमारे महापुरुषों ने यह संदेश दिया- डरो मत, डराओ मत. शिवजी कहते हैं- डरो मत, डराओ मत और त्रिशूल को ज़मीन में गाड़ देते हैं। दूसरी तरफ़ जो लोग (बीजेपी की ओर इशारा करते हुए) अपने आपको हिंदू कहते हैं वो 24 घंटे हिंसा-हिंसा-हिंसा..नफरत-नफरत-नफरत... आप हिंदू हो ही नहीं. हिंदू धर्म में साफ लिखा है, सच का साथ देना चाहिए।" 

राहुल गाँधी के इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हस्तक्षेप करते हुए आपत्ति जताई थी और बयान दिया था कि "यह मुद्दा बहुत गंभीर है।  पूरे हिन्दू समाज को हिंसक कहना बहुत ही गंभीर है।" 

प्रधानमंत्री के आपत्ति जताने के बाद राहुल गाँधी ने फ़ौरन जवाब दिया- "नरेंद्र मोदी जी आप पूरा हिंदू समाज नहीं हैं.. बीजेपी पूरा हिंदू समाज नहीं है.. आरएसएस पूरा हिंदू समाज नहीं है।" 

प्रतिपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भाजपा को कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने अग्निवीर, किसान, मणिपुर, NEET, बेरोजगारी, नोटबंदी, GST, MSP, हिंसा, भय, धर्म, अयोध्या, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, अडाणी-अंबानी, प्रधानमंत्री और स्पीकर की चर्चा की। हालाँकि सरकार के मंत्रियो भी अपना बचाव किया और राहुल गाँधी पर गलतबयानी के आरोप लगाए।  

जब अग्निवीर योजना पर बोल रहे थे, तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खड़े होकर कहा- ग़लतबयानी कर संसद को गुमराह करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। 

वहीँ राहुल गांधी जब किसानों के बारे में बोल रहे थे, तब शिवराज सिंह चौहान ने खड़े होकर कहा- ''उत्पादन की लागत पर कम से कम 50 फ़ीसदी जोड़कर एमएसपी दी जा रही है और अगर नहीं जा रही है तो ये सत्यापित करें। ये ग़लतबयानी कर रहे हैं।''

सदन की कार्रवाई आज भी चल रही है जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं। लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है। 'तानाशाही नहीं चलेगी, 'मणिपुर-मणिपुर' और 'न्याय दो-न्याय दो' के नारे लग रहे हैं।

पीएम को इस दौरान दो बार अपना भाषण रोकना पड़ा। स्पीकर ने विपक्ष को दो बार ऐसा नहीं करने की नसीहत दी। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि "ये ठीक नहीं है, लेकिन विपक्ष के सांसद सुनने को तैयार नहीं हैं।"

एक बात तो तय है लोकसभा हो या राज्यसभा आने वाले समय सभी सत्र हंगामेदार ही रहने वाले है। न तो सरकार में किसी एक पार्टी के पास बहुमत है न ही प्रतिपक्ष इतना कमज़ोर है जैसा पिछले 10 सालो में था। पक्ष और प्रतिपक्ष का संतुलन लोकतंत्र के लिए बहुत अच्छा और स्वस्थ है।  हालाँकि पक्ष हो या प्रतिपक्ष दोनों ओर के नेताओ को अनर्गल बयानबाज़ी से बचना चाहिए। और उन्ही मुद्दों पर बहसबाज़ी करनी चाहिए देश की जनता के लिए आवश्यक है।  

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