रंग से कोई अंग भिगोय रे कोई अंसुवन से नैन भिगोय......

रंग से कोई अंग भिगोय रे कोई अंसुवन से नैन भिगोय......

मध्यप्रदेश का सियासी ड्रामा 
 
रंग से कोई अंग भिगोय रे कोई अंसुवन से नैन भिगोय......
देखना दिलचस्प होगा की कमलनाथ की जगह 'कमल' वाली पार्टी मध्यप्रदेश के सत्ता के रथ पर सवार होगी या कमलनाथ कोई नया मास्टर स्ट्रोक खेलते है।  पिक्चर अभी बाकी है ........ 

11 मार्च 2020।  होली के अवसर पर आज 1970 में रिलीज़ हुई फिल्म कटी पतंग में होली के गीत की एक लाइन 'रंग से कोई अंग भिगोय, अंसुवन से कोई नैन' आज मध्यप्रदेश के सियासी ड्रामे पर फिट बैठ रही है, जहाँ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी अंसुवन से नैन भिगो रही है है वहीँ भाजपा, कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद रंग से सराबोर होती हुई दिख रही है। 

मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज सुबह गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी को दे दिया।  इस बीच सिंधिया समर्थक 19 से 20 विधायकों ने भी अपने इस्तीफे दे दिए है। इन इस्तीफ़ो से मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई गई है। हालाँकि मध्य्प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अभी भी बाज़ी अपने पक्ष में होने का दावा किया है। 
  

ये है विधानसभा का अंकगणित
मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में दो खाली हैं। इस प्रकार वर्तमान में प्रदेश में कुल 228 विधायक हैं, जिनमें से 114 कांग्रेस, 107 बीजेपी, चार निर्दलीय, दो बहुजन समाज पार्टी एवं एक समाजवादी पार्टी का विधायक शामिल हैं। कमलनाथ के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को इन चारों निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ बसपा और सपा का समर्थन है। 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस की संख्या 92 हो जाएगी। वहीं इस्तीफा देने वाले विधायकों की सस्यता जाने पर बहुमत का नंबर 104 हो जाएगा। वहीं बीजेपी के पास 107 विधायक हैं।

मध्य प्रदेश में जारी सियासी ड्रामे के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि उनके पास बहुमत है। पत्रकारों से बातचीत में कमलनाथ ने मंगलवार शाम को कहा, 'घबराने की जरूरत नहीं है, हम बहुमत साबित करेंगे। हमारी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। जिन लोगों को इन लोगों ने कैद करके रखा है वे मेरे संपर्क में हैं।' सीएम कमलनाथ के इस बयान के बाद कांग्रेस खेमा एक्टिव होता हुआ दिख रहा है। दिल्ली से मुकुल वासनिक, दीपक बावरिया और हरीश रावत को भोपाल भेजा गया है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इन तीनों नेताओं को मध्य प्रदेश के राजनीतिक हालात सामान्य करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

देखना दिलचस्प होगा की कमलनाथ की जगह 'कमल' वाली पार्टी मध्यप्रदेश के सत्ता के रथ पर सवार होगी या कमलनाथ कोई नया मास्टर स्ट्रोक खेलते है।  पिक्चर अभी बाकी है ........ 

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