क्या लॉकडाउन बढ़ना चाहिए या नहीं ?

इसके सभी पहलु पर गौर किया जाना चाहिए ? पहला तो यह की लॉक डाउन को जारी रहने दिया जाये और दूसरा यह की लॉक डाउन खोल देना चाहिए और तीसरा यह की धीरे धीरे अनलॉक की प्रक्रिया से गुज़ारना चाहिए। 

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जहाँ इसका उल्लंघन हो वहां सज़ा के साथ साथ आर्थिक दंड आवश्यक तौर पर लगना चाहिए

वैश्विक महामारी कोरोना की घातक दूसरी लहर को रोकने के लिए राज्य में 16 अप्रैल से लॉकडाउन की प्रक्रिया शुरू हुई थी।  पहले यह 3 मई तक था फिर बढ़ते कोरोना के केसेज़ के चलते जन अनुशासन पखवाड़े के तहत 24 मई सुबह 5 पांच बजे तक इसे बढ़ाया गया।  अब राज्य सरकार ने एक मंत्रिमंडल की एक बैठ आहुत की है जिसमे लॉकडाउन को आगे बढ़ाने, अनलॉक करने या किश्तों में अनलॉक करने का फैसला लिया जायेगा।  

लेकिन सवाल यह उठता है की क्या लॉक डाउन को खोल दिया जाना चाहिए या इसे जारी रहने दिया जाना चाहिए ? इसके सभी पहलु पर गौर किया जाना चाहिए ? पहला तो यह की लॉक डाउन को जारी रहने दिया जाये और दूसरा यह की लॉक डाउन खोल देना चाहिए और तीसरा यह की धीरे धीरे अनलॉक की प्रक्रिया से गुज़ारना चाहिए। 

आइये पहले विचार यानि लॉक डाउन को पूरी तरह से खोल दिया जाना चाहिए- इस पर बात करे तो इस विचार के पक्ष में सकारात्मक पक्ष यह है की अब कोरोना के केसेज़ में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है जहाँ मई के पहले दो सप्ताह में राज्य में संक्रमण का दौर भयावह था, कोरोना के इलाज हेतु ज़रूरी दवाईंयों की कमी, कालाबाज़ारी, रेमेडीसीवीर, ऑक्सीजन सिलिंडर की मारामारी और कोरोना से होने वाली मौतों से सभी वाकिफ है उस स्थिति से थोड़ी राहत ज़रूर मिली है। लेकिन लॉकडाउन के चलते लोगो की काम धंधे पूरी तरह ठप्प हो गए। अर्थव्यवस्था पुनः पटरी से उतरनी शुरू हो गयी है। लोगो की बचत पिछले साल का लॉकडाउन लील चूका है। दिहाड़ी मज़दूर और रोज़ कमाने वाले लोगो की जान पर बन आई है। अगर बाजार खुलेंगे तो निश्चित पर छोटे और मध्यम व्यापारियों के साथ साथ दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगो की रोज़ी रोटी का जुगाड़ होने लगेगा। 

अब दुसरे विचार पर बात करे यानि लॉक डाउन जारी रहने दिया जाये तो इसके पक्ष में एक विचार यह है की मई के पहले सप्ताह में जिसे प्रकार संक्रमण की रफ़्तार थी वह लॉकडाउन के चलते नियंत्रण में आने लगी है, लॉक डाउन खुलते ही पुनः इस स्थिति में नहीं पहुंच जाये जहाँ फिर से संक्रमण जोर पकडे और आवशयक दवाओं और अस्पताल में अफरा तफरी बढ़ने लगे । क्योंकि यह तो बात हम सभी जानते है की लॉक डाउन खुलते ही बाजार में पुनः भीड़ बढ़ने लगेगी। बाजार में अनियंत्रित भीड़ को बड़ी जनसँख्या वाले शहरी क्षेत्रो में काबू करना इतना आसान नहीं है। यह बात पिछले साल अनलॉक होते ही सामने आई थी। लॉक डाउन जारी रहने का अर्थ है की महामारी को नियंत्रण करना थोड़ा आसान रहेगा और फिर से हमें उन परिस्थितयो का सामना नहीं कर पड़ेगा जो अप्रैल के आखरी दिनों में मई के पहले दो सप्ताह में गुज़र चुकी है। 

आइये अब तीसरे विचार पर गौर करे यानि पूरी तरह से लॉक डाउन हटाया नहीं जाए और धीरे धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की जाये तो निश्चित तौर पर सरकारे इस पर गहनता से विचार कर रही होगी क्योंकि लॉक डाउन को एकदम से खोलने पर महामारी की स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।  लेकिन सख्ती से लॉक डाउन आगे बढ़ाया जाए तो लोगो की और देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है। इसलिए सरकार को चाहिए की धीरे धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि अर्थव्यवस्था भी चलती रहे और महामारी को भी नियंत्रण किया जाये।

क्योंकि देखा जाए तो सख्ती जैसे ही कम होती है लोगो में लापरवाही भी बढ़ती जाती है इसलिए सख्ती भी आवश्यक है। पुलिस की नफरी चौराहे पर ही नहीं गली मोहल्लो में भी बढ़नी चाहिए। मास्क की सख्ती, सोशल डिस्टेंसिंग का जहाँ भी उल्लंघन हो, चाहे वह राजनैतिक नौटंकी हो या धार्मिक कार्यक्रम, सामाजिक कार्यक्रम जैसे शादी, भोज इत्यादि जैसे गैर ज़रूरी कार्यक्रम या ऐसे कार्यक्रम, जहाँ लोगो को हुजूम उमड़ पड़े, उस पर आवश्यक तौर पर रोक लगनी चाहिए। और जहाँ इसका उल्लंघन हो वहां सज़ा के साथ साथ आर्थिक दंड आवश्यक तौर पर लगना चाहिए। अब देखना है की सरकारे इस स्थित से कैसे निबटती है देखना होगा।    

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