उस्मानी रंग नाट्योत्सव का आग़ाज़

उस्मानी रंग नाट्योत्सव का आग़ाज़

पहले दिन "तीतर" का प्रभावी मंचन

 
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उदयपुर 18 जून। मौलिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ क्रियेटिव एंड परफार्मिंग आर्ट सोसायटी एवं पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर के संयुक्त तत्त्वाधान में दो दिवसीय नाट्य  उत्सव "उस्मानी रंग" का आरंभ रिज़वान ज़हीर उस्मान द्वारा लिखित नाटक "तीतर " से हुआ।

नाटक के भीतर खेला गया एक नाटक जो मनोरंजन या कलाकारों की कला के प्रति भूख शांत करने का जरिया नहीं बल्कि समाज में व्याप्त विसंगतियों को जाहिर करने माध्यम था। शिल्पग्राम सभागार में यह मंचन मौलिक  नाट्य समूह  के कलाकारों ने किया। व्यंग्य के पैने प्रहारों के साथ यहां उम्दा संदेश का मरहम था, जो बेहतर अभिनय से दिया गया। साहित्य कला अकादमी से पुरस्कृत लेखक रिजवान जहीर उस्मान की स्मृति में आयोजित इस दो दिवसीय नाट्योत्सव 'उस्मानी रंग' के पहले दिन उन्हीं के लिखे नाटक 'तीतर' का मंचन हुआ। 

 नाटक की कहानी एक ही परिस्थिति में फंसकर एक जगह शरण लेने आये तीन लोगों की बात-चीत  से शुरू होती है और समाज में व्याप्त तमाम विसंगतियों को लेते हुए स्वार्थ की खातिर बेगुनाहों के अंत से खत्म होती है। तीन व्यक्ति बारिश से बचने के लिए जगह नहीं मिलने पर खंडहर का आसरा लेते हैं।  

तीतर इस नाटक का सांकेतिक नाम है। नाटक के कुछ संवादों में तीतर का वर्णन है। तीतर दरअसल एक आम नागरिक का प्रतीक है। तीतर सूचना के अधिकार की अज्ञानता को दर्शाता हुआ प्राणी का प्रतीक भी है। यह वही है जो अपनी आहट से डरकर झाड़ियों में छिप जाता है। यह शुतुरमुर्ग नहीं है लेकिन इसका भोलापन इसे सदैव हाशिए पर धकेलता रहता है। इसे हम समाज के विद्रूप के भीतर देख सकते हैं।

नाटक में आज के समय संदर्भ से जुड़ी वही घटनाएं, बातें और जानकारियों का नाट्य रूपांतर है जो हमारे देश में ही नहीं समूचे विश्व में घटित हो रही हैं। न्याय व्यवस्था, अत्याचार, शोषण ,भ्रष्टाचार ,कन्या भ्रूण हत्या, बलात्कार ,सांप्रदायिकता ,आतंकवाद आदि ऐसे अनेक मुद्दे इस नाटक में आते हैं जिन्हें हम प्रतिदिन समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में देखते हैं और हम स्वयं भी इससे प्रभावित होते हैं। यह हमारे बीच एक चर्चा, एक संवाद और एक विचारणीय संकट बना हुआ है। कुछ बातें ऐसी होती है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है। कुछ ऐसे ही अज्ञात कारणों से हम उन बातों के साक्षी बनने से परहेज करते हैं जो हमें परेशान करती है। "तीतर "जानी पहचानी घटनाओं के माध्यम से वैचारिक ऊर्जा प्रदान करने का रंग प्रयास है। जिसे अपनी निर्देशकीय दृष्टिकोण से बेहतरीन ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया नाटक के निर्देशक शिवराज सोनवाल ने।

एक घंटे के इस नाटक में कलाकारों ने शानदार अभिनय से पुरजोर तरीके से लेखक की बात दर्शकों के समक्ष रखी। वकील का किरदार अमित व्यास ने औऱ जज के किरदार में उदयपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी  दीपक दीक्षित ने अपने स्वाभाविक अभिनय से गहरी छाप छोड़ी वही हत्यारे का अभिनय भूपेंद्र चौहान ने बख़ूबी निभाया। अन्य भूमिकाओंनमें फोटोग्राफर अपूर्व गौतम, पत्रकार की भूमिका में कृतिका शाह  एवं राहुल जोशी, रवि सेन ने प्रभाव छोड़ा। प्रकाश परिकल्पना महेश आमेटा व हेमन्त मेनारिया की थी। गीत वो सुबह कभी तो आएगी को आवाज़ दी रेखा शर्मा ने। वहीं संगीत संयोजन जतिन भवानी व राहुल जोशी का था।

गौड़ को मिला पहला उस्मानी रंग नाट्य सम्मान

 "उस्मानी रंग"  के आरंभ में मौलिक समूह की ओर से प्रथम "उस्मानी नाट्य  सम्मान" उदयपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी और श्री रिज़वान ज़हीर उस्मान  के साथी रहे। रामेश्वर गौड़ को  रंगमंच के क्षेत्र में अपने विशेष योगदान के लिए प्रदान किया गया। इस नाट्य संध्या में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुरेंद्र। बी पाटीदार एवं लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विनय भाटी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। रविवार शाम 7.30 बजे "उस्मानी रंग"के अंतिम दिन नाटक "सुन लड़की दबे पांव आते है सभी मौसम" का  मंचन दर्पण सभागार  में होगा। जिसके लेखक है रिज़वान ज़हीर उस्मान व निर्देशन किया है शिवराज सोनवाल ने।

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