'अवतार' का प्रभावपूर्ण मंचन


'अवतार' का प्रभावपूर्ण मंचन

भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर एवं राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर, के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किये जा रहे राजस्थानी नाट्य समरोह के शुभारंभ अवसर पर नाटक अवतार का प्रभावपूर्ण मंचन हुआ।
 
'अवतार' का प्रभावपूर्ण मंचन
नाटक में लोगर की भूमिका में कल्याण वैष्णव, लाली की भूमिका में कृष्णा नंगारची, चाची श्रीमती अनुकम्पा लईक, बूढी औरत शिप्रा चटर्जी, भोपा -रोहित, ठाकुर- कुणाल मेहता, हरिया- चेतन टिक्यानी ग्रामीण - चेतन टिक्यानी, कुणाल मेहता, जतिन, इशान, यश सोनी निशान, कुणाल जैन आदि ने किया।  ध्वनी - कृष्ण कुमार ओझा  एवं प्रकाश- मुश्ताक पठान ने किया ।

उदयपुर 13 दिसम्बर 2019 । भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर एवं राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर, के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किये जा रहे राजस्थानी नाट्य समरोह के शुभारंभ अवसर पर नाटक अवतार का प्रभावपूर्ण मंचन हुआ।

भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर एवं राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर, के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहे तीन दिवसीय नाट्य समारोह के शुभारंभ अवसर पर डाॅ. लईक हुसैन द्धारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘‘अवतार’’ का उदयपुर की रंगपृष्ट संस्था के कलाकारों ने बहुत ही सशक्त एवं प्रभावपूर्ण मंचन किया।

समारोह के उद्घाटन अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष रियाज़ तहसीन एवं गणमान्य अतिथियों ने भारतीय लोक कला मण्डल के संस्थापक पद्मश्री देवीलाल सामर की तस्वीर पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलित किया।

संस्था के निदेशक डाॅं. लईक हुसैन ने बताया कि नाटक अवतार की कहानी अकाल कि समस्या पर आधारित है जिसमें बताया गया है कि अकाल ग्रस्त ग्रामीण सूखे और पानी कि कमी के कारण परेशान है । ऐसे में एक भोपे द्वारा भविष्य वाणी की जाती है, की गाॅंव में गर्भवती स्त्री लाली के अवतार पैदा होगा।  

इसकी सूचना गाॅंव के ठाकुर को लगने पर गाॅंव कि प्रत्येक गर्भवती स्त्रियों का गर्भ गिराने का आदेश ठाकुर देता है। परन्तु गाॅंव के लोग उसे बचाने का हर सम्भव प्रयास करते है। ठाकुर द्वारा हत्या, मार-काट अधिक होने पर भोपा जो कि वास्तव में एक मास्टर है तथा ग्रामीणों में जागरूकता का प्रयास कर रहा है, गाॅंव वालों को  एकजुट करता है तथा ठाकुर एवं उसके गुंडो का सामना करने के लिए प्रेरित करता है। अन्त में वह बताता है कि असली अवतार ग्रामीणों का विश्वास है, उनका आत्म विश्वास ही अवतार है।

नाटक में लोगर की भूमिका में कल्याण वैष्णव, लाली की भूमिका में कृष्णा नंगारची, चाची श्रीमती अनुकम्पा लईक, बूढी औरत शिप्रा चटर्जी, भोपा -रोहित, ठाकुर- कुणाल मेहता, हरिया- चेतन टिक्यानी ग्रामीण - चेतन टिक्यानी, कुणाल मेहता, जतिन, इशान, यश सोनी निशान, कुणाल जैन आदि ने किया।  ध्वनी - कृष्ण कुमार ओझा  एवं प्रकाश- मुश्ताक पठान ने किया ।

नाटक के संगीत में हारमोनियम-रामलाल, तबला-रईस खाॅं, ढोलक - जगदीश पालीवाल, क्लारनेट-रोशन एवं गायन भावना धांधड़ा एवं सुमन ने किया ।

 उन्होने बताया कि आज दिनांक 14 को जोधपुर कि गुरूकल्चरल एज्यूकेशनल सोसायटी, अरूण व्यास एवं -स्वाति व्यास के निर्देशन में  राजस्थान के प्रसिद्ध कहानीकार विजयदान देथा की कहानी पर आधरित नाटक रेवड़ का मंचन होगा एवं दिनांक 15 दिसम्बर को अभिषेक झांकल, द्वारा निर्देशित नाटक दुविधा का मंचन होगा।  

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