उदयपुर के नाट्यांश सोसायटी ने राजस्थान के युवा नाटककार डॉ प्रदीप कुमार द्वारा लिखे गए "श्यामकली का जादू" प्रस्तुत किया


उदयपुर के नाट्यांश सोसायटी ने राजस्थान के युवा नाटककार डॉ प्रदीप कुमार द्वारा लिखे गए "श्यामकली का जादू" प्रस्तुत किया

विगत 8 वर्ष में नाट्यांश ने अल्फ़ाज़ नाम से 6 राष्ट्रिय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया है, साथ ही कलाकारों की नई पौध तैयार करने के लिये लगातार तराश - अभिनय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है।
 
उदयपुर के नाट्यांश सोसायटी ने राजस्थान के युवा नाटककार डॉ प्रदीप कुमार द्वारा लिखे गए "श्यामकली का जादू" प्रस्तुत किया
  • विगत 8 वर्ष में नाट्यांश ने अल्फ़ाज़ नाम से 6 राष्ट्रिय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया है
  • कलाकारों की नई पौध तैयार करने के लिये लगातार तराश - अभिनय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है
  • 150 से ज्यादा नुक्कड नाटक का स्वतंत्र लेखन और आस पास के गाँव, शहरों और कस्बों में 6000 से ज्यादा मंचन किया है
  • 25 पुर्णांकि नाटक का मंचन और इन नाटकों का देश के 100 से ज्यादा नाट्य समारोह में प्रदर्शन किया है

नाट्यांश नाटकीय एवं प्रदर्शनीय कला संस्थान, उदयपुर के नवें स्थापना दिवस के संर्दभ में नाट्य संध्या का आयोजन किया गया। इस उपलक्ष्य में नाटक ‘‘श्यामकली का जादु’’ का मंचन किया गया। विगत 8 वर्ष के कार्यकाल में संस्थान ने अल्फ़ाज़ नाम से 6 राष्ट्रिय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया है, साथ ही कलाकारों की नई पौध तैयार करने के लिये लगातार तराश - अभिनय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। 150 से ज्यादा नुक्कड नाटक का स्वतंत्र लेखन और आस पास के गाँव, शहरों और कस्बों में 6000 से ज्यादा मंचन किया है। 25 पुर्णांकि नाटक का मंचन और इन नाटकों का देश के 100 से ज्यादा नाट्य समारोह में प्रदर्शन किया है।

आज की नाट्य संध्या में नाटक - ‘‘श्यामकली का जादू’’ का मंचन किया गया। यह नाटक राजस्थान के युवा नाटककार डॉ. प्रदीप कुमार ने लिखा है। यह नाटक विद्यार्थी जीवन का सबसे अहम समय और बेहतरीन अनुभव पर आधारित है यानी होस्टल के दिनों की याद और मस्तियां। यह समय हर विद्यार्थी के जीवन का बेहतरीन अनुभव रहता है। इस दौरान वे किस तरह वे विभिन्न परेशानियों से निपटते हैं यह देखना बड़ा दिलचस्प होता है। यह नाटक भी इसी अनुभव पर आधारित है।

नाटक ‘‘श्यामकली का जादू’’ के बारें में

यह नाटक मूल रूप से एक शहर में पढ़ने आए तीन दोस्तों के जीवन पर आधारित है, जो अपने कमरे के किराए की जद्दोजहद में लगे हुए हैं और जुगाड़ से काम चलातें है। किराये के कमरे में रहने वाले विजय, अमर और श्याम ने पिछले 2 महीनों का किराया नहीं दिया है और अब वह प्लान बना रहे हैं कि कुछ जुगाड़ करें जिससे किराया भी ना दिया जायें और ना ही कमरा खाली करना पडें। इस जुगाड़ में एक जुगाड़ मकान मालिक की लड़की को पटानें का भी होता है। नाटक में दो दोस्त विजय और अमर रितु को पटाने की रिहर्सल श्याम के साथ करते हैं। इसी बीच मकान मालिक आ कर उनके रंग में भंग डाल देता है। तभी मकान मेलिक की नज़र लड़की बने श्याम पर पडती हैं और अपने रंगीन मिजाज़ के कारण वह उस श्यामकली पर फिदा हो जाता है और पूरे नाटक में वह उसे अपनी पत्नी बनाने का ख्वाब देखता रहता है। इस सभी घटनाक्रम में पुरे नाटक में हास्य उत्पन्न होता है।

कार्यक्रम संयोजक अमित श्रीमाली ने बताया कि यह नाटक राजस्थान नाट्य लेखक प्रदीप कुमार है और निर्देशन अशफ़ाक़ नूर ख़ान पठान का रहा। कलाकारों के रूप में राघव गुर्जरगौड़, अगस्त्य हार्दिक नागदा, महेश कुमार जोशीए चक्षु सिंह रूपावत, मोहम्मद रिजवान मंसुरी ने अपने बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में मंच संचालन नेहा श्रीमाली द्वारा किया गया। संगीत संचलान व संयोजन फ़िज़ा बत्रा का रहा। प्रकाश व्यवस्था एवं अशफाक नुर खान ने किया। मंच सज्जा में सरिता पाण्डेय, धीरज जिंगर, महावीर शर्मा, रमन कुमार, पियूष गुरूनानी, दाउद अंसारी, मयुर शर्मा, यश साकद्विपिय का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद रिजवान ने धन्यवाद ज्ञापित करतें हुए कहा कि जिस प्रकार से विगत आठ वर्षों से नाट्यांश काम कर रहा है आगे भी प्रयासरत रहेगा। कॉविड़ - 19 के मद्देनज़र मात्र 25 दर्शको के सामने प्रस्तुति की गयी।

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