‘प्रकृति मीडिया शाला-ईको यूरेका किट’ कार्यशाला में जैव विविधता अभ्यास

‘प्रकृति मीडिया शाला-ईको यूरेका किट’ कार्यशाला में जैव विविधता अभ्यास

विज्ञान पढ़ने से नहीं, करके देखने और समझने की सतत प्रक्रिया है  

 
natures workshop

उदयपुर 11 सितम्बर 2023. राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से साइंस सेन्टर (ग्वालियर ) मध्य प्रदेश के द्वारा इंस्टिट्यूट फॉर इकोलोजी एण्ड लाइवलीहुड, उदयपुर के सानिध्य में राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT), उदयपुर में ‘प्रकृति मीडिया शाला – ईको यूरेका किट’ प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले और दूसरे दिन के विभिन्न सत्रों में पानी, मिट्टी और जैवविविधता को जानने के अभ्यास हुए। 

आयोजक संस्था साइंस सेन्टर (ग्वालियर) मध्य प्रदेश की सचिव संध्या वर्मा ने बताया कि पांच दिवसीय कार्यशाला में पहले और दूसरे दिन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में पानी के गुणधर्म पी.एच., कठोरता, अवशिष्ट क्लोरीन, पारदर्शिता तथा जीवाणु प्रदूषण जानने के अभ्यास हुए।

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‘ईको यूरेका किट’ में दी गई सामग्री का उपयोग कर प्रतिभागियों ने किताबी विधियों की बजाय बाल सुलभ वैकल्पिक विधियों के द्वारा पानी के गुणधर्मों को जाना। मिट्टी के गुणधर्मों में मिट्टी के रंग, मिट्टी कि परतें, मिट्टी का संघटन, कठोरता, पी.एच. और संरंध्रता के बारे में नवाचार और मनोरंजक तरीकों से करके जाना।  

मेजबान संस्था इंस्टिट्यूट फॉर इकोलोजी एण्ड लाइवलीहुड एक्शन के प्रबंध न्यासी विरेन लोबो ने बताया कि जैव विविधता अध्ययन के अंतर्गत ‘जलाशय के तल पर पाई जाने वाली प्राणी विविधता, मत्स्य  विविधता को उनके पुच्छ पर के आधार पर जानना’, ‘मछलियों को शल्कों के आधार पर जानना’, ‘जल जीवशाला (एक्वेरियम)’, ‘जलाशय के तल को देखना’, ‘स्थलीय जीवशाला (टेरेरियम)’, ‘कृमि घर (वर्मिकेरियम)’, ‘चींटी घर (फोर्मिकेरियम)’, छोटे कीटों को एकत्र करने के लिए पूटर’ इत्यादि के बारे में जाना। 

कार्यशाला के अंतर्गत विशेष व्याख्यान सत्र में जैव तकनीकी के विशेषज्ञ प्रो. सुनील दत्त पुरोहित, संस्थापक सचिव सोसाइटी फॉर प्रोमोशन ऑफ़ साइंस एजुकेशन एण्ड रिसर्च, ने “विज्ञान को समझने और वैज्ञानिक अभिरुचि विकसित करने – वैज्ञानिक खोजों के इतिहास से समझना” विषय पर सारगर्भित वार्ता दी. प्रो. पुरोहित ने विज्ञान जगत में किये गए शोधों को करने वाले व्यक्तियों की जीवनियों के उदहारण के साथ ‘पढ़ कर पास होने और करके समझने’ की  भिन्नता को समझाते हुए बताया कि आज के किताबी ज्ञान के समय में परीक्षाएं पास करने पर जोर रहता है लेकिन पास होने वाले के दिमाग में उसके समकक्ष जानकारी नहीं होती। उन्होंने सीखने के लिए सीमित दायरे के बाहर जाकर सोचने, प्रश्नात्मक प्रवृत्ति और करके देखने और समझने का महत्त्व बताया।       

कार्यशाला में सन्दर्भ विशेषज्ञों के रूप में डा. बिनय पटनायक, डा. शेखर साराभाई, डा. लीना गुप्ता, अमित देमन, डा. सुनील दुबे, हेमलता पालीवाल, रेखा शर्मा सेवाएं दे रहे हैं। ‘प्रकृति मीडिया शाला – ईको यूरेका किट’ प्रशिक्षण कार्यशाला उदयपुर में राजस्थान राज्य शेक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद के परिसर में चल रही है। 


 

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