महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन के अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों की घोषणा

महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन के अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों की घोषणा
 

महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन का 38वाँ अलंकरण समारोह आगामी 01 मार्च, 2020, रविवार को सायं 4.00 बजे सिटी पैलेस उदयपुर के माणक चौक प्रांगण में आयोजित होगा।
 
महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन के अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों की घोषणा
केन्सर ग्रसित बच्चों की देखरेख करने वाली मुम्बई की पुरनोता को पन्नाधाय, मनहर उधास को हकीम खाँ सूर, सोशल मीडिया से लोहा ले प्रिंट मीडिया में जान डालने वाले राज चेनगप्पा को हल्दीघाटी, अकेले के दम पर बंजर भूमि पर हरितिमा फैलाने वाले दिव्यांग देवीलाल धाकड़ को महाराणा उदयसिंह सम्मान तथा डाॅ. नार्बर्ट पीबाॅडी को अन्तरराष्ट्रीय कर्नल जेम्स टाॅड अलंकरण।

उदयपुर, 20 फरवरी 2020। फाउण्डेशन के वर्ष 2020 के अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय अलंकरणों की घोषणा करते हुए वार्षिक अलंकरण समारोह के संयोजक डाॅ. मयंक गुप्ता ने बताया कि फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड़ की उपस्थित में फाउण्डेशन का 38वाँ अलंकरण समारोह आगामी 01 मार्च, 2020, रविवार को सायं 4.00 बजे सिटी पैलेस उदयपुर के माणक चौक प्रांगण में आयोजित होगा। इस समारोह की अध्यक्षता वर्ष 2008 में महाराणा उदयसिंह अलंकरण से सम्मानित डाॅ. के. कस्तूरीरंगन करेंगे।

महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर का इस वर्ष होने वाले 38वें वार्षिक अलंकरण समारोह के अवसर पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएच.डी. धारक डाॅ. नार्बर्ट पीबाॅडी को अन्तरराष्ट्रीय कर्नल जेम्स टाॅड अलंकरण प्रदान किया जाएगा। 1829 में प्रकाशित कर्नल जेम्स टाॅड कृत प्रसिद्ध पुस्तक ‘अनाल्स एण्ड एंटीक्युटीज ऑफ़ राजस्थान’ पर डाॅ. पीबाॅडी वर्तमान में नवीन संस्करण पर कार्य कर रहे हैं। मेवाड़ के परिपे्रक्ष्य में यह पुस्तक विशेष मेप, चार्ट आदि के साथ प्रस्तुत होगी। डाॅ. पीबाॅडी कैम्ब्रिज से एक ऐसे ‘मानव विज्ञानवेता एवं इतिहासकार’ हैं जिनका शोध ‘19वीं एवं 20वीं शताब्दी में भारतीय राष्ट्रवाद’ पर केन्द्रित रहा।

डाॅ. गुप्ता ने बताया कि भारत के प्रति सार्वभौम सम्पादित स्थायी मूल्यों की सेवाओं के उपलक्ष्य में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवर्ष दिए जाने वाले कर्नल जेम्स टाॅड अलंकरण के तहत दो लाख एक रुपये की राशि, तोरण, शाॅल एवं प्रशस्तिपत्र भेंट किए जाएंगे। 

वर्ष 1996 में स्थापित इस अलंकरण से अब तक मार्क टुली, सर वी. एस. नाॅयपाॅल, डाॅ. चितरंजन एस. राणावत, लुईजी जाॅन्जी, एम.एम. कै, सुप्रसिद्ध अभिनेता-निर्माता एवं निर्देशक लार्ड रिचर्ड एटनबरो, अब्बास सादडीवाला, रूडोल्फ दम्पत्ति, सर नून, एन्ड्रयु टाॅप्सफिल्ड, मिंजा यांग, प्रो. जोन डी स्मिथ, जे.पी लोस्टी, प्रो डेटन, प्रो. जोन स्ट्रेटन हावले आदि विभूतियों को सम्मानित किया जा चुका है। 

पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रिंट व प्रसारण मीडिया की इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेनगप्पा को राष्ट्रीय स्तर का हल्दीघाटी अलंकरण प्रदान किया जाएगा। बदलते दौर में जब मैग्जीनों की लोकप्रियता का दौर धीमा पड़ता जा रहा था और उसका स्थान सोशल मीडिया व मोबाईल की खबरें लेती जा रही थी, ऐसे विकट दौर में श्री चेनगप्पा नेे अपने अथक प्रयासों से इंडिया टुडे पत्रिका को फिर से उसी मुकाम व लोकप्रियता तक पहुँचाया और ऐसे ही दौर से गुजरने वाली पत्रिकाओं व पत्रकारिता के लिए नयी राह दिखाई।

वर्ष 1982 में स्थापित हल्दीघाटी सम्मान से अब तक कर्पूर चन्द्र कुलिश, विनोद दुआ, प्रणव राॅय, मृणाल पाण्डे, कुलदीप नैयर, धर्मवीर भारती एवं मुम्बई के स्वतन्त्र पत्रकार मुजफ्फर हुसैन, शेखर गुप्ता, आलोक मेहता, प्रबलप्रताप सिंह, तवलीन सिंह, संजीव श्रीवास्तव, हरिन्दर बावेजा, गुलाब कोठारी, पियूष पाण्डे, राहुल कंवल, स्वाति चतुर्वेदी, सुहासिनी हैदर सहित अनेक हस्तियाँ सम्मानित हो चुकी है।

साम्प्रदायिक सद्भाव, देशप्रेम एवं राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के क्षेत्र में स्थायी सेवाओं के लिये दिया जाने वाला राष्ट्रीय स्तर का हकीम खाँ सूर अलंकरण भारत के प्रख्यात गायकों में शुमार मनहर उधास को प्रदान किया जाएगा। भारत में प्रमुखता से बोली जाने वाली हिन्दी, गुजराती, भोजपुरी, उड़िया जैसी भाषाओं में लगभग 450 फिल्मों के लिए उधास ने गीत गा कर उन्होंने अनेकता में एकता वाली कहावत को चरितार्थ किया है।  

वर्ष 1986 में स्थापित हकीम खाँ सूर सम्मान से अब तक जत्थेदार जीवनसिंह, सुनिल दत्त, कवि प्रदीप, केपीएस गील, डॉ असगर अली इंजीनियर, हरिवंशराय बच्चन, लता मंगेश्कर, गुलजार, शैलेश लोढ़ा, भारत के मेट्रो मेन डाॅ. ई श्रीधरन, सुरेश वाडेकर जैसी अनेक हस्तियाँ सम्मानित हो चुकी है।

संयोजक श्री गुप्ता के अनुसार पर्यावरण संरक्षण-संवर्द्धन के क्षेत्र में की गई स्थाई मूल्य की सेवाओं के लिए महाराणा उदयसिंह अलंकरण इस वर्ष भीलवाड़ा जिले के ग्राम धाकड़खेडी निवासी देवीलाल धाकड़ को प्रदान किया जाएगा। देवीलाल धाकड़ दिव्यांग होते हुए भी अब तक 5000 से अधिक पेड़ लगा चुके हैं। वह सरकारी विद्यालय के अध्यापक है और स्कूल समय के बाद समय निकाल यह कारनामा कर दिखाया है। धाकड़ के दोनों पैरों में पोलियों होने के बावजूद उन्होंने हर तरह की परिस्थिति से लड़ते व जुझते हुए पर्यावरण प्रेम को जीवित रख अपने कर्म को जींदा रखा।

वर्ष 1996 में स्थापित महाराणा उदयसिंह अलंकरण से अब तक प्रो. वीरभद्र मिश्र, अन्ना हजारे, डाॅ. कस्तूरीरंगन, डाॅ. तेसी थाॅमस जैसी अनेक हस्तियाँ सम्मानित हो चुकी है।

अपने निर्धारित दायित्व की सीमा से ऊपर उठकर किये गये कार्य के लिये दिया जाने वाला राष्ट्रीय स्तर का पन्नाधाय अलंकरण मुम्बई की पुरनोता दत्ता बहल को प्रदान किया जाएगा। पुरनोता केन्सर से ग्रसित बच्चों के पोषण पर कार्य करती है। वे सरकार एवं ट्रस्टों द्वारा संचालित निःशुल्क केन्सर अस्पतालों में आए बीमार बच्चों के लिए पोषक खाना उपलब्ध कराती है। उनकी संस्था ‘कडल्स फाउण्डेशन’ इसी दिशा में कार्य करती है। 

वर्ष 1997 में स्थापित इस अलंकरण से अब तक प्रो. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, श्रीमती अरूणा राॅय, करमबीर सिंह कांग, आम्टे दम्पत्ति, कैप्टन सौंधी, पी.टी. उषा सहित कई विभूतियां सम्मानित हो चुकी है।  

राष्ट्रीय स्तर पर दिये जाने वाले उक्त चारों अलंकरणों के तहत प्रत्येक विभूति को एक लाख एक रु. नकद, तोरण, शाॅल एवं प्रशस्तिपत्र भेंट किए जाएंगे। फाउण्डेशन के अलंकरण समारोह के संयोजक ने बताया कि इन सभी विभूतियों ने फाउण्डेशन की ओर से उन्हें प्रदत्त अलंकरण ग्रहण करने के लिए आगामी 01 मार्च को उदयपुर आने की सहमति प्रदान कर दी है।


 

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