राष्ट्रसंत ललितप्रभ, चन्द्रप्रभ एवं शान्तिप्रिय सागर महाराज का हुआ ऐतिहासिक और भव्य चातुमार्सिक मंगल प्रवेश

राष्ट्रसंत ललितप्रभ, चन्द्रप्रभ एवं शान्तिप्रिय सागर महाराज का हुआ ऐतिहासिक और भव्य चातुमार्सिक मंगल प्रवेश

सर्व धर्म समाज ने संतों की अगवानी कर बनाया इसे ऐतिहासिक

 
chaturmas

उदयपुर, 29 जून 2023 । राष्ट्रसंत ललितप्रभ, राष्ट्रसंत चन्द्रप्रभ एवं शान्तिप्रिय सागर महाराज का आज टाउनहॉल प्रांगण में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हुआ। जहां शोभायात्रा के साथ पहुंचनें पर महापौर गोविंदसिंह टांक, कलक्टर ताराचंद मीणा, ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, पूर्व मंत्री हरीश राजानी,प्रतापराय चुघ, तेजेन्द्र सिंह रोबिन, महावीर चौधरी भीलवाड़ा, पारस रांका इन्दौर सहित गणमान्य एवं विशिष्ट नागरिकों ने भव्य अगवानी कर स्वागत किया।  

धर्मसभा का प्रारंभ संत प्रवर ललितप्रभ महाराज के मंगलाचरण एवं धर्म मंत्र के सामूहिक गान के साथ हुआ। इस अवसर उन्होंने कहा कि वह देश के महान नगरी मेवाड़ में दिव्य चातुर्मास करने आए हैं। उदयपुर में उनका यह तीसरा चतुर्मास है। गुरुजनों के आगे पूरे उदयपुर शहर में पलक पावडे बिछा कर रख दियें। इस चातुर्मास के लिए देश के कई क्षेत्रों से विनती आई थी लेकिन उदयपुर का प्रेम भाव और स्नेह ऐसा है तो यहां आने के लिए कौन मना कर सकता है। उन्होंने कहा कि उदयपुरवासियों का समर्पण और प्रेम की भावना देखकर ऐसा लगता है कि मैं काजल की डिबिया मंगा लू और सभी के माथे पर काला टीका लगा दूं ताकि  मेरे शहरवासियों पर किसी की नजर ना लगें।

उन्होंने कहा कि यूं तो हम शब्द है मिल जाए तो शास्त्र हैं, यूं तो हम एक हैं मिल जाए तो इमारत है, यूं तो हम इंसान हैं मिल जाए तो पूरा भारत है... जैसे प्रेरणादाई वाक्यों का सभी से उच्चारण करवाया। अंत में णमोकार महामंत्र का सभी से सामूहिक जाप करवा कर मंगल चातुर्मास के पहले दिन का श्रीगणेश किया। उनके बाद राज लोढ़ा,हंसराज चौधरी ने स्वागत उद्बोधन दिया। सह संयोजक अनिल नाहर ने चातुर्मास की जानकारी दी। संत डॉ शांतिप्रिय सागर महाराज ने प्रभु प्रार्थना करवाई। प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया।

द स्कोलर्स एरिना मल्टी मीडिया, माणकचंद धारीवाल स्कूल एवं नारायण सेवा संस्थान,दिंगबर जैन बालिका स्कूली बच्चों ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। राज लोढ़ा ने ट्रस्ट के सभी सदस्यों का परिचय करवाया।

सभा में कलेक्टर ताराचंद मीणा, महापौर गोविंद सिंह टांक ने राष्ट्र संतों का स्वागत करते हुए कहा कि मेवाड़ की शक्ति एवं शौर्य धरा पर पूरे उदयपुर जिले की ओर से सभी का स्वागत अभिनंदन करते हैं। अनिल नाहर ने सभा में आए हुए सर्व समाज के प्रतिनिधियों एवं अतिथियों का स्वागत अभिनंदन करते हुए चातुर्मास के ऐतिहासिक मंगल प्रवेश को सफल बनाने के लिए धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित किया। संचालन हसंराज चौधरी ने किया।

संतप्रवर चंद्रप्रभ महाराज ने लोक कल्याणकारी चातुर्मास में जीवन जीने की कला पर अपने प्रवचन की शुरुआत बी हैप्पी, नो बीपी जैसे शब्दों के साथ करते हुए सभी को जीवन में हमेशा मुस्कुराते रहने की सलाह के साथ की। प्रवचन के प्रारंभ में ही उन्होंने सभी से एक गीत गुनगुनाया जिसके बोल थे हिम्मत ना हारिये,  हंसते मुस्कुराते हुए जिंदगी गुजारिये।

राष्ट्रसंत ने कहा कि मेवाड़ की पवित्र धरती पर आकर उन्हें ऐसा लगा जैसे 14 सालों का बनवास गुजार कर प्रभुश्री राम अयोध्या पधारे थे। हम हमारा नहीं मेवाड़ के सम्मान करने आए हैं। उदयपुर के लोग ना कम है ना कमजोर है वह सेवा भाव और भक्ति में सवायें हैं। हम तो जीवन को ही स्वर्ग बनाने की कला सिखाते हैं। अगर हम सुखी जीवन की कामना करते हैं तो हमें यह वाक्य जीवन में उतारना होगा कि जो हमें प्राप्त है वह पर्याप्त है। जीवन में तनाव को जगह नहीं दें, हमेशा मुस्कुराते रहें। मुस्कान से कोई नुकसान नहीं होता मुस्कान अनमोल है। सुखी जीवन के लिए जरूरी है कि किसी भी परिस्थिति में कभी मुंह से आह निकले हर परिस्थिति में सिर्फ वाह वाह ही निकलें। व्यक्ति के मरने के बाद हर व्यक्ति उसके चित्र पर स्वर्गीय लिखता है। कोई भी नरकीय नहीं लिखता है। इस हिसाब से तो नर्क पूरा ही खाली है। फोटो के नीचे स्वर्गीय लिखने से कोई स्वर्ग में नहीं जाता है अगर जीने की कला आ जाए यही जीवन स्वर्ग बन जाता है।

उन्होंने कहा कि जीवन वह नहीं है जो हमें मिला है जीवन तो वह है जिसकों हमने हमारे हिसाब से ढाला है, बनाया है और जिया है। हम अपने प्रवचन काल के दौरान जीवन जीने की वह कला बताएंगे जो स्वर्ग के द्वार खोलेगी।

हमें जीवन को वह नहीं बनाना है जो हमें मिला है हमें जीवन को वह बनाना है जो हमें जीना है। जीवन में अगर खुश रहना है तो नाखुशी के न पर लाइन फेर दो। उन्होंने कहा कि 1 घंटे की खुशी चाहते हो शहर में घूम आईए, 1 दिन की खुशी चाहते हो आसपास के तीरथ में चले जाइए, 1 महीने की खुशी चाहते हो तो किसी सुंदर लड़की से शादी कर लीजिए, 1 साल की खुशी चाहते हो तो किसी अमीर की गोद चले जाइए, पर जीवन भर खुश रहना है तो हर हाल में मुस्कुराइए।

उन्होंने कहा कि सुख दुख तो जीवन के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा कि दुख और तकलीफ यह तो पार्ट ऑफ लाइफ है जबकि उनसे सामना करना उनसे पार पाना और उसमें भी खुश रहना आर्ट ऑफ लाइफ है।

इससे पूर्व लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति एवं श्रीवासुपूज्य मंदिर समिति के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रसंत ललितप्रभ, राष्ट्रसंत चंद्रप्रभ महाराज एवं डॉ. शांतिप्रिय सागर महाराज ने दादाबाड़ी स्थितजी वासुपुज्य मंदिर में प्रभु के दर्शन किये। दर्शनों के पश्चात जयकारों के गाजे बाजे के साथ संतों की चातुर्मासिक शोभायात्रा प्रारंभ हुई। शोभायात्रा में सबसे आगे घोड़े पर सवार गजेंद्र सुराणा उसके पश्चात स्कूलों के बच्चें जिन्होंने हाथों में बैनर तख्तियां ले रखी थी, उनके पीछे बग्घियां, पांच ऊंट गाड़ियां, महिलाओं के हाथों में लंबा चौड़ा धर्म ध्वज,  बोहरा समुदाय का बेंड एवं शब्बीर मुस्तफा के नेतृत्व में आए बोहरा समाज के प्रतिनिधि, सिख समाज, सिंधी समाज एवं सर्व समाज के प्रतिनिधि शोभायात्रा में साथ चल रहे थे।

शोभायात्रा में लाल चुन्दड एवं माथे पर साफा पहने महिलाएं मंगल गांन करते हुए साथ चल रही थी। कई महिलाएं माथे पर मुकुट पहने नाचते गाते हुए झूम रही थी। श्वेत वस्त्र धारी पुरुषों ने माथे पर केसरिया साफा पहनकर अपने अपने हाथों में 24 तीर्थंकरों की झांकियों के साथ शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। शोभायात्रा में एक दो तीन चार जैन धर्म की जय जयकार जैसे नारे लगातार गूंज रहे थे। दादाबाड़ी से सूरजपोल चौराहे तक शोभायात्रा का विहंगम दृश्य बन रहा था।

शोभायात्रा के बीच में राष्ट्रसंत ललितप्रभ चंद्रप्रभ महाराज चल रहे थे। उनके साथ में चातुर्मास संयोजक राज लोढ़़ा, हंसराज चौधरी, अनिल नाहर,  सहित कई श्रेष्ठीजन उनकी सेवा सुश्रुषा में साथ थे। सूरजपोल चौराहे पर उस वक्त गुरु भक्ति का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला जब चंद्रप्रभ महाराज के पांव में पहनी कपड़े की पादुका निकलने लगी थी। उन्हें चलने में हो रही असुविधा को देख उनके शिष्य डॉ. शांतिप्रिय सागर महाराज ने उनके चरणों में अपना शीश झुकाते हुए उनकी पादुकाओं को ठीक किया। गुरु भक्ति के ऐसे दृश्य को देखकर वहां मौजूद कई लोगों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया और गुरुदेव के जयकारों से आसमान गूंजा दिया।

यहां से सैकड़ों समाज जनों की उपस्थिति में शोभायात्रा आगे बढ़ी बैंड बाजों की मधुर धुनों के साथ सुरजपोल, मार्शल चौराहा, धानमंडी होते हुए देहलीगेट पर पहुंची। वहां से आधे बाबू बाजार होते हुए शोभायात्रा के साथ राष्ट्र संतों का टाउनहॉल प्रांगण में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। पूरे शोभा यात्रा मार्ग पर विभिन्न समाजों की ओर से स्वागत द्वार लगाए गए थे।

प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। स्कूली बच्चों ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। राज लोढ़ा ने ट्रस्ट के सभी सदस्यों का परिचय करवाया।
सभा में कलेक्टर ताराचंद मीणा महापौर गोविंद सिंह टांक ने राष्ट्र संतों का स्वागत करते हुए कहा कि मेवाड़ की शक्ति एवं शौर्य धरा पर पूरे उदयपुर जिले की ओर से सभी का स्वागत अभिनंदन करते हैं। अनिल नाहर ने सभा में आए हुए सर्व समाज के प्रतिनिधियों एवं अतिथियों का स्वागत अभिनंदन करते हुए चातुर्मास के ऐतिहासिक मंगल प्रवेश को सफल बनाने के लिए धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित किया।

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