उदयपुर 1 मार्च 2025। टखमन आर्ट सेंटर, उदयपुर में प्रोजेक्ट इक्विलिब्रियम की प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। यह प्रदर्शनी 28 फरवरी से 7 मार्च 2025 तक जारी रहेगी। उद्घाटन सत्र में क्यूरेटर शिल्पा रांगणेकर ने संदर्भ की भूमिका और कलात्मक सहभागिता पर अपने विचार साझा किए। उनके साथ प्रदर्शनी में भाग लेने वाली कलाकार अदिति अनेराव और दीपर्णा साहा ने भी अपने अनुभव और कलाकृतियों की प्रक्रिया पर चर्चा की।
इस प्रदर्शनी में कलाकार अदिति अनेराव, दीपर्णा साहा, एंथनी शेफर्ड और ईवा जॉय की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की जा रही हैं। ये कलाकृतियाँ परतापुर में हुई रेजीडेंसी के दौरान हुई रचनात्मक चर्चाओं और स्थानीय समुदायों के साथ हुए संवाद को दर्शाती हैं।
टखमन आर्ट सेंटर, उदयपुर, रोटरी क्लब, उदयपुर के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी को संदर्भ आर्टिस्ट रेजीडेंसी , बेनेश्वर लोक विकास संस्थान परतापुर और आर्टकोर, यूके के सहयोग से प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी कला और समुदाय के बीच संबंधों की पड़ताल करते हुए इंटर-कल्चरल संवाद को बढ़ावा देती है।
प्रोजेक्ट इक्विलिब्रियम: कला और समुदाय के बीच सेतु
प्रोजेक्ट इक्विलिब्रियम 2014 में स्थापित एक सांस्कृतिक पहल है, जो कला को दैनिक जीवन से जोड़ती है और समुदाय-केंद्रित कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देती है। यह परियोजना परतापुर बांसवाड़ा में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें नए कौशल सीखने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान करती है।
इस संस्करण को आर्टकोर (यूके) के सहयोग से और आर्ट्स काउंसिल इंग्लैंड के समर्थन से आयोजित किया गया है। इस बार रेजीडेंसी में डिजाइन को एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया, जिससे कला, शिल्प और उपयोगिता के बीच संवाद को व्यापक किया जा सके।
प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों में अदिति अनेराव (भारत), दीपर्णा साहा (कोलकाता, भारत), एंथनी शेफर्ड (यूके) और ईवा जॉय (यूके) शामिल हैं। इन कलाकारों ने रेजीडेंसी के दौरान स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर, कार्यशालाओं का आयोजन किया और पारंपरिक शिल्पकारों के साथ मिलकर काम किया। उनकी कलाकृतियाँ इन साझा अनुभवों और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाती हैं। आज इस प्रदर्शनी में शहर के कलाकारो, कलाप्रेमियों, विद्यार्थियों व रोटरी क्लब उदयपुर ने अवलोकन कर संवाद किया ।
समुदाय-केंद्रित कला का विस्तार
प्रोजेक्ट इक्विलिब्रियम पारंपरिक कलाकार रेजीडेंसी मॉडल से आगे बढ़कर स्थानीय सामाजिक ढांचे में गहराई से समाहित है। यह पहल महिलाओं और कलाकारों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करती है, जिससे समुदाय के भीतर रचनात्मक संभावनाएँ विकसित हो सकें। इस प्रदर्शनी में दर्शक उन कलाकृतियों से जुड़े हैं, जो इस रेजीडेंसी के दौरान विकसित हुईं और जो कला, समुदाय और संवाद की एक सशक्त अभिव्यक्ति प्रस्तुत करती हैं।
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