ल्यूपस लंबे समय तक चलने वाली एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालती है-डॉ सत्यम भट्ट


ल्यूपस लंबे समय तक चलने वाली एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालती है-डॉ सत्यम भट्ट

डॉ सत्यम भट्ट  गीतांजलि हॉस्पिटल के इम्म्युनोलोजिस्ट एवं रूमेटोलॉजिस्ट है

 
lupus

ल्यूपस एक ऐसी बीमारी है जो हमारे हार्ट ज्वॉइंट्स फेफड़ों बालों के साथ चेहरे को भी प्रभावित करती है। इस बीमारी का खतरा किशोरावस्था से लेकर 30 साल तक की उम्र की महिलाओं में ज्यादा होता है। दुनियाभर में इस सप्ताह को वर्ल्ड ल्यूपस वीक के तौर पर मनाया जाता है। इसको मनाने का मकसद लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है।

इसी क्रम में गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में वर्ल्ड ल्यूपस वीक के दौरान क्लिनिकल इम्म्युनोलोजिस्ट एवं रूमेटोलॉजिस्ट डॉ सत्यम भट्ट द्वारा अवेयरनेस टॉक का आयोजन किया गया जिसमें डॉ सत्यम ने बताया कि "वर्ल्ड ल्यूपस डे की थीम, 'मेक ल्यूपस विजिबल' इस अस्थायी बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और ल्यूपस से पीड़ित लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को याद दिलाने के लिए एक शक्तिशाली प्रयास है। 

साथ ही उन्होंने बताया कि ल्यूपस लंबे समय तक चलने वाली एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालती है। यह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है लेकिन सही समय पर इलाज देने से इसे रोका जा सकता है। इस बीमारी में लंबे समय तक बुखार, थकावट, जोड़ों एवं मांसपेशियों में दर्द, नाक व गालों पर तितली की आकृति वाले चकत्ते, बालों का झड़ना, बेचैनी, पैरों में सूजन इत्यादि लक्षण देखने को मिलते हैं। इसके निवारण के लिए धूप से बचाव या सनस्क्रीन का उपयोग और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए। 

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के क्लिनिकल इम्म्युनोलोजिस्ट एवं रूमेटोलॉजिस्ट विभाग में ल्यूपस व अन्य ऑटोइम्यून बिमारियों का निरंतर रूप से सफल इलाज किया जा रहा है। 

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल पिछले सतत् 16 वर्षों से एक ही छत के नीचे सभी विश्वस्तरीय सेवाएं दे रहा है और चिकित्सा क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करता आया है, गीतांजली हॉस्पिटल में कार्यरत डॉक्टर्स व स्टाफ गीतांजली हॉस्पिटल में आने प्रत्येक रोगी के इलाज हेतु सदेव तत्पर है। 

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