तीन दिवसीय रोल ऑफ इनोवेशन एवं टेक्नोलोजी इन टर्नअराउण्ड ऑफ माइनिंग इण्डस्ट्री सेमिनार सम्पन्न

तीन दिवसीय रोल ऑफ इनोवेशन एवं टेक्नोलोजी इन टर्नअराउण्ड ऑफ माइनिंग इण्डस्ट्री सेमिनार सम्पन्न

माईनिंग आर्थिक स्थिति की रीढ़ की हड्डी लेकिन इस पर कम ध्यान दिया जा रहाः जाट
 

 
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उदयपुर।  राज्य के राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने कहा कि देश-दुनिया में माईनिंग क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर इस सेमिनार में किये गये मंथन पर सरकार भी ध्यान देती है। माईंनिग क्षेत्र में दुनिया की बेहतरीन तकनीक को भारत व राजस्थान में लाया जाता है ताकि कम लागत, कम नुकसान पर अधिक राजस्व प्राप्ति हो। वे आज माईनिंग इंजीनियर्स एसोसिऐशन ऑफ इंडिया, राजस्थान चैप्टर, उदयुपर एवं हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार के तीसरे एवं अंतिम दिन समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि माईनिंग आर्थिक स्थिति में रीढ़ की हड्डी है लेकिन इस पर कम ध्यान दिया जाता है जबकि राजस्थान में कृषि के बाद माईनिंग ही एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहां अधिक रोजगार उपलब्ध है।
 

देश की मजबूती व ग्रोथ में खनन का बहुत बड़ा योगदान है। राजस्थान में 10-12 ऐेसे मिनरल है जिनमें राजस्थान की मोनोपोली है। माईनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा माइनिंग क्षेत्र में किये जा रहे नवाचारों,माईनिंग के विकास हेतु भेजी जाने वाली अनुशंसा को वे राज्य के मुख्यमंत्र, खान मंत्री एवं खान राजस्व को भेजेंगे। राज्य सरकार ने खान नीति मे ंभी काफी बदलाव किये है जिस कारण आज खनन क्षेत्र में विकास के साथ ही खान विभाग में राजस्व की जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है। इस अवसर पर समारोह के विशिष्ठ अतिथि आरएसएमएमलि. के निदेशक अखिलेश जोशी ने कहा कि माईनिंग क्षेत्र बहुत बडा अनुसंधान का क्षेत्र है। जहां प्रतिदिन कुछ नया सीखनें को मिलता है। हम जमीन जितना अधिक मेटल जमीन में छोड़ सकते है उतना छोड़ना चाहिये। मेटल के बिना प्राकृतिक संसाधन कुछ नहीं है।


समारोह के विशिष्ठ अतिथि खान एवं भू विज्ञान विभाग के अतिरिक्त निदेशक महेश माथुर ने कहा कि समाज में खान को अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता है। हमें इस ईमेज को बदलने की आवश्यकता है। पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए किस प्रकार खनन किया जायें, यह हमारे लिये चुनौती है। खान विभाग का सालाना राजस्व 6 हजार करोड़ रूपयें हो गया है जिसका वर्ष 2022-23 के लिये लक्ष्य 8 हजार करोड़ रूपयंे रखा गया है। इस प्रकार के नियमों बदलाव किया गया है जो खानें वर्ष 2025 में बंद हो रही थी वे अब 2040 में बंद होगी।
पूर्व विधायक प्रदीप कुमार ने कहा कि राजस्थान खनिजों का प्रदेश है और यहां पर और अधिक खनन की संभावनायें है। भारत सरकार के सेवानिवृत्त श्रम आयुक्त एस.सी.जोशी  ने कहा कि यदि किसी भी देश में उद्योगों को बढ़़ावा नहीं मिलेगा तो उस देश की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं होगा। तकनीक के साथ मेनपावर बहुत आवश्यक है औश्र मेनपावर स्कील डवलपमेन्ट से बढ़ेगा। स्कील डवलपमेन्ट के लिये सरकार भी प्रयासरत है। हमारें यह तकनीक का उपयोग कम हो रहा है। औद्योगिक विकास के लिये सरकार ने नियमों में काफी बदलाव किये है। केन्द्र सरकार इस ओर प्रयासरत है कि भारत सरकार द्वारा बनाये गये श्रम कानून का सभी राज्य अपने यंहा लागू करें ताकि पूरे देश में एक ही प्रकार के श्रम कानून चलें। देश में 28 करोड़ लोग संगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे है।

 

सरकार को भेजी जायेगी अनुश्ंासायें- एमईएआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूण कोठारी ने कहा कि एमईएआई की कमेटी ने समिनार के अंतिम दिन सरकार को भेजी जाने वाली अनुश्ंासायें तैयार की है ताकि सरकार उनको लागू कर खनन क्षेत्र का विकास करें और खान नीति में बदलाव करंे।
कोठारी ने बताया कि देश में राजस्थान ही एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहंा पोटाश उपलब्घ है लेकिन इसका उत्पादन यहंा शून्य है। हमें पोटाश आयात करना पड़ रहा है। डीप डिपोजिट में एक्सप्लोरेशन की नीति के तहत बदलाव आवश्यक। एक्प्लोसिव के नियमों में काफी खामियंा है। जिनमें बदलाव किया जाना चाहिये। लेण्ड रेवेन्यू रिकॉर्ड में इस प्रकार कर एन्ट्री हो कि मिनरल बियरिंग वाली लेण्ड का सर्वे करा सरकार की अनापत्ति प्रमाण पत्र लें ताकि उस लेण्ड का उपयोग सिर्फ खनन में हो न कि अन्य कार्यो में। स्कील सेक्टर में राजस्थान सरकार एमईएआई को सहयोग करें ताकि यह संस्था स्कील क्षेत्र में बहुत बड़े कार्य कर सकें। समापन समारोह को एमईएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष के.मधुसूदन राव ने भी संबोधित किया।
प्रारम्भ में आयोजन सचिव प्रवीण शर्मा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस सेमिनार विषय विशेषज्ञों द्वारा 40 पत्रों का वाचन किया गया।देश में 95 प्रकार के मिनरल का उत्पादन होता है और ये सभी मिनरल राजस्थान में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एमईएआई द्वारा तैयार किये गये सुझावों को सरकार के पास भेजा जायेंगा।

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