हिंदी दिवस पर विविध कार्यक्रम


हिंदी दिवस पर विविध कार्यक्रम 

शहर की विभिन्न संस्थाओ ने विविध कार्यक्रम आयोजित किये
 
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उदयपुर14 सितंबर 2022 । आज जिले मे बुधवार को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कहीं पर निबंध प्रतियोगिता तो कहीं पर वाद- विवाद प्रतियोगिता और परिचर्चा का आयोजन किया गया। शहर की विभिन्न संस्थाओ ने विविध कार्यक्रम आयोजित किये। 

सीडलिंग में हिंदी दिवस पर वाद - विवाद प्रतियोगिता का आयोजन

14 सितंबर हिंदी दिवस के दिन कक्षा नौवीं के छात्रों हेतु सदनानुसार वाद- विवाद प्रतियोगिता  का आयोजन किया गया। जिसमें विशिष्ट अतिथि डॉ. कुंजन आचार्य  (विभागाध्यक्ष तथा असिस्टेंट प्रोफेसर ,मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग) और  प्रोफेसर पी.के जैन(निदेशक, गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) थे।जिसमें प्रथम स्थान पर सूर्या सदन से रित्विक शर्मा, द्वितीय स्थान पर इंदिरा सदन से मुग्धा शर्मा एवं तृतीय स्थान सोमा सदन से आंचल बेदी तथा वरुणा सदन से सीरत कौर खनूजा  रहें।

सभी प्रतिभागियों का हिंदी के प्रति उत्साह काबिले तारीफ था। विद्यालय निदेशक हरदीप बक्षी में सभी विजेता प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए शुद्ध हिंदी भाषी होने पर बल दिया। प्राचार्या कीर्ति माकन  ने सभी विशिष्ट अतिथियों को उनके अमूल्य समय देने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

मात्स्यकी महाविद्यालय मे मनाया हिन्दी दिवस

महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यकी महाविद्यालय, उदयपुर मे बुधवार को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ सुबोध शर्मा, पूर्व अधिष्ठाता ने कहा कि हिन्दी समृद्ध भाषा हमारे देश मे भारतीय संस्कृति को एक सूत्र मे समेटे  है। हमे हिंदी बोलने मे गर्व का अनुभव होना चाहिये। 

हिन्दी दिवस के इतिहास और महत्व पर प्रकाश ड़ालते हुऐ महाविद्यालय के अधिष्ठाता ड़ॉ. बी.के. शर्मा ने बताया कि हिन्दी जन -जन की भाषा है, देश की राजभाषा और हमारी मातृ भाषा भी। उन्होंने बताया कि 67 प्रतिशत लोग हिन्दी भाषा का प्रयोग करते हैं और 77 प्रतिशत हिन्दी समझ सकते हैं l डॉ शर्मा ने अंग्रेजी की गुलामी से आजाद हो कर हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग की सलाह दी l

कार्यक्रम मे विद्यार्थियों का मनोबल बढाते हुए डॉ. एम. एल ओझा, प्रभारी मत्स्य संसाधन विभाग ने भी सारगर्भित सम्बोधन मे दैनिक जीवन मे हिंदी को अपनी मात्र भाषा के अनुरूप आदर व सम्मान देने और दृढ़ संकल्प के साथ हिन्दी भाषा को अपनाने की सलाह दी। डॉ. शाहिदा ने हिंदी की समृद्धता को रेखांकित किया। 

इस अवसर पर नन्हे बालक अशर हुसैन और महाविद्यालय के विद्यार्थियों - नरपत, जयराम, मोनिका, अनिल, लक्ष्य, मुस्कान, इत्यादि ने स्वरचित हिंदी कविताऐं पढ़ी और हिंदी के महत्व पर अपने विचार प्रकट किऐ। इस अवसर पर पुस्तकालय प्रभारी श्रीमती आरती वर्मा, कार्यालय सहायक सुनील, श्रीमती संगीता, अमर सिंह, प्रभु लाल, प्रकाश, थाना राम, छगन, ईश्वर, दुर्गेश इत्यादि भी उपस्थित रहे l

आरएमवी में बालिकाओं को मातृभाषा के प्रति निष्ठा रखनें की प्रेरणा दी

राजस्थान महिला विद्यालय में आज हिन्दी दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया।विद्यालय के प्राचार्य विकास सिंघवी ने हिन्दी भाषा की महत्ता बताते हुए छात्राओं को मातृभाषा के प्रति निष्ठा की प्रेरणा दी। संगीत विभागाध्यक्ष श्रीमती रीना पालीवाल के निर्देशन में कक्षा 12 की छात्राओं ने समुह गीत की प्रस्तुति दी। सुश्री कुसुम राव कक्षा 12 ने हिन्दी दिवस का इतिहास बताया। सुश्री साक्षी वर्मा ने हिन्दी पर स्लोगन प्रस्तुत किये। सुश्री चेष्टा शर्मा , समन शेख , ख्याति गुर्जर ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती हेमलता सोनी ने एवं धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती रचना व्यास ने किया।

विश्व संवाद केन्द्र उदयपुर में हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन 

विश्व संवाद केन्द्र उदयपुर में हिन्दी दिवस समारोह मनाया गया। इस अवसर पर एक परिचर्चा का आयोजन विश्व संवाद केन्द्र समिति के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला की अध्यक्षता में किया गया। परिचर्चा में शिक्षाविद एवं समाजसेवी रमेश चन्द्र शुक्ल ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी भाषा देश की एकता को बढ़ाने वाली भाषा है। हिन्दी भाषा के उत्तरोत्तर विकास क्रम में इस भाषा ने सभी भाषाओं का समावेश करते हुए देश की एकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मगन जोशी ने कहा कि हमारी संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान कर सर्व स्वीकार्य भाषा बनाया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला ने कहा कि हिन्दी का शब्दकोश में सभी भाषाओं के शब्द स्वीकार्य होने जा रहे हैं जो समय की माँग है। भारत की सभी भाषाओं का सम्मान करते हुए हिन्दी को सर्व स्वीकार्य संवाद भाषा बनाने की आवश्यकता है। अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।परिचर्चा का संचालन विश्व संवाद केंद्र के सचिव प्रवीण कोटिया ने किया।

बी. एन. स्कूल में हिन्दी दिवस धूमधाम पूर्वक मनाया गया।

भूपाल नोबल्स उच्च माध्यमिक विद्यालय में भूपाल नोबल्स संस्थान के ‘‘शताब्दी महोत्सव‘‘ की श्रृंखला के तहत ‘‘हिन्दी दिवस‘‘ धूमधाम एवं हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आगाज माँ सरस्वती की पूजा अर्चना और दीप प्रज्जवलन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य वीरेन्द्र सिंह चुण्डावत ने की। हिन्दी दिवस के तहत प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, हिन्दी निबन्ध लेखन, भाषण एवं कविता प्रतियोगिता के आयोजन हुए। विद्यार्थियों ने मातृ भाषा दिवस के कार्यक्रमों में उत्साह एवं उल्लास से भाग लिया। 
    
अपने उद्बोधन में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि हमारी मातृ भाषा हिन्दी एक समृद्व भाषा है। मातृ भाषा की उन्नति एवं प्रकृति से ही समाज व राष्ट्र की उन्नति व प्रकृति निरन्तर संभव होती है। हमें हमारी मातृ भूमि और मातृ भाषा पर गर्व होना चाहिए। विद्यार्थियों ने हिन्दी कवियों, कवयित्री एवं कहानीकार रामधारी सिंह दिनकर, सुभद्रा कुमारी चौहान, महादेवी वर्मा, हरिवंशराय बच्चन, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद आदि की रचनाओं को सुन्दर रूप से प्रस्तुत किया।  

हिन्दी भाषण प्रतियोगिता में प्रथम मंयक मण्डावत द्वितीय विकास सिंह गहलोत एवं तृतीय सुश्री दीपीका शर्मा रहें। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम सुश्री रिद्वि गोस्वामी द्वितीय सुश्री दिग्गेश्वरी चुण्डावत  एवं तृतीय सुश्री मनीषा कितावत रहें। कार्यक्रम का निर्देशन डॉ. पुष्पा राठौड़़ एवं श्रीमती संगीता चुण्डावत ने किया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री दीपीका झाला एवं सुश्री लक्षिता सुथार ने किया। 
 

भूपाल नोबल स्नातकोत्तर महाविद्यालय मे हिंदी दिवस पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन 

भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय की संघटक इकाई भूपाल नोबल स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शताब्दी वर्ष की श्रृंखला में हिंदी दिवस पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ चंद्रेखा शर्मा ने बताया कि सभी संकाय के विद्यार्थियों ने अधिक संख्या में पूर्ण उत्साह से भाग लेकर अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान प्रकट किया। 

इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. रेणु राठौड़ ने अपने संबोधन में हिंदी के उद्भव से लेकर वर्तमान परिप्रेक्ष्य तक लगातार अपने अस्तित्व के संघर्ष को बताते हुए युवाओं से हिंदी दिवस को मात्र एक दिवस का न मानकर सदैव के लिए हिंदी को प्रतिष्ठित स्थान प्रदान कराने के लिए तथा उसकी चहुँमुखी प्रगति के लिए आह्वान किया ।कार्यक्रम में सहअधिष्ठाता डॉ.रितु तोमर, डॉ संगीता राठौर एवं  डॉ.मनीषा शेखावत  ने भी दिवस की महत्ता बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए।

विद्या भवन भाषा मंच हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी

हिंदी कैरियर की भाषा नही एक लोक भाषा है। यह और मानवीय मूल्यों और चरित्र  निर्माण  की भाषा है। समता, समानता,  संवेदना सद्भाव व समन्वय  जैसे मानवीय मूल्यों से मिलकर हिंदी बनी है। यह विचार राजस्थान साहित्य अकादमी संविधान सभा के सदस्य प्रसिद्ध साहित्यकार किशन दाधीच ने विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर व्यक्त किये।

विद्या भवन भाषा मंच की ओर से पॉलिटेक्निक सभा कक्ष मे आयोजित " भाषाई विविधता एवं हिंदी " विषयक संगोष्ठी  मे  दाधीच ने कहा कि विविधता इसकी आत्मा है। आंचलिक भाषाएँ व बोलियाँ इसके प्राण है। यदि आंचलिक भाषाएँ  नही बची तो हिंदी भी नहीं बचेगी। हिंदी की सफलता का स्रोत ही इसमें अन्य भाषाओं के शब्दों का आसानी से घुलना हैं।  हिंदी प्रेम और सच्चाई की भाषा है। यह मनुष्यता की परिभाषा हैं, चेतनाओं की जननी हैं। यदि विश्व मे मनुष्यता को बचाना है तो हमें हिंदी को भी बचाना होगा। उन्होंने कहा कि भाषाओं की परस्पर प्रतियोगिता हो ही नही सकती। अत: यह भाषा की लड़ाई  का कोई अर्थ नही।

इस अवसर पर राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद माथुर ने कहा कि हिंदी ने देश की विविधताओं को बचाये रखने मे महत्ती भूमिका निभाई है। सुखाडिया विश्वविद्यालय  पत्रकारिता विभाग  के विभागाध्यक्ष डॉ कुंजन आचार्य ने हिंदी भाषा एक अभियांत्रिकी भी हैं। यह समाज को जोड़ती है। 

विद्या भवन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग प्रियदर्शी ने  कहा कि लगभग पांच हजार भाषाएँ लुप्त हो गई। एक भाषा का लुप्त होना सदियों की संस्कृति, लोक व्यहवार व परंपराओं को समाप्त हो जाना है। विद्याभवन पोलोटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने स्वागत करते हुए देश की भाषाई विविधता के बीच हिंदी के समकालीन स्वरूप पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर विजय मारू के संयोजकत्व मे आयोजित काव्य प्रस्तुति  में डॉ ज्योतिपुंज, आशा पांडे ओझा, डॉ मंजू चतुर्वेदी, अशोक जैन मंथन, तरुण दाधीच, डॉ रेणु सिरोया, डॉ उपवन पंड्या, आईना उदयपुरी, सोम शेखर व्यास, स्वाति शकुन्त, इंद्र प्रकाश श्रीमाली, रागिनी शर्मा, अंजना राव, डॉ   निर्मला शर्मा, शैलेन्द्र दद्दा ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की ।

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