मुंशी प्रेमचंद जयंती पर नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने श्रद्धांजलि


मुंशी प्रेमचंद जयंती पर नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने श्रद्धांजलि

नाट्यांश नाटकीय एवं प्रदर्शनीय कला संस्थान की ओर से साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 139 वीं जयंती के उपलक्ष्य में संस्था के कलाकारों द्वारा महाराष्ट्र समाज भवन में मुंशी जी के द्वारा लिखी गई विभिन्न साहित्यिक रचनाओं को कहानी एवं नाटक के रूप में प्रभावी अभिनय के द्वारा प्रस्तुत किया गया और कहानियों के प्रदर्शन के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती मनाई गई।

 

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने श्रद्धांजलि

नाट्यांश नाटकीय एवं प्रदर्शनीय कला संस्थान की ओर से साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 139 वीं जयंती के उपलक्ष्य में संस्था के कलाकारों द्वारा महाराष्ट्र समाज भवन में मुंशी जी के द्वारा लिखी गई विभिन्न साहित्यिक रचनाओं को कहानी एवं नाटक के रूप में प्रभावी अभिनय के द्वारा प्रस्तुत किया गया और कहानियों के प्रदर्शन के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती मनाई गई।

आज की परिपाटी में जहाँ नयी पीढ़ी का रुझान किताबों से ज्यादा डिजिटल मीडिया पर है, वही संस्था के युवा कलाकारों ने मुंशी जी की कहनियों को आज की नयी पीढ़ी के लिए तैयार किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मुंशी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही मुंशी जी की कहानियों में मौजूद भावों, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक शिक्षाओं को दर्शकों तक पहुँचाना है, संस्था के सचिव अमित श्रीमाली ने बताया की इसी तरह कहानियों का मंचन निकट भविष्य में पुनः होगा और ये क्रम यूंही चलता रहेगा।

कार्यक्रम सयोजक मोहम्मद रिज़वान मंसूरी ने बताया की प्रथम प्रस्तुति कहानी “जुलूस” का नाट्य मंचन किया गया। यह कहानी स्वतंत्रता से पूर्व की घटनाओं को प्रस्तुत करती हैं, जहां लोग अलग-अलग तरीके से ब्रिटिश सरकार का विरोध कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन के लिए एक जुलूस निकलते हैं। लेकिन एक भारतीय दरोगा बीरबल सिंह उनको रास्ते को रास्ते में ही रोक कर लाठीचार्ज शुरू करवा देता है। इस लाठी चार्ज में अधिकांश लोग बुरी तरह से घायल होते है तथा जुलूस के नेता इब्राहीम अली की मृत्यु हो जाती हैं। इब्राहीम अली की मृत्यु की खबर पा कर बीरबल को अहसास होता है की उसने अक्षम्य अपराध किया है। स्वराज के लिये जिन देशवासियों का साथ देना चाहिये उन्हीं पर लाठीचार्ज करवा दिया। इस घटना से उसे पछतावा होता है और अपनी नौकरी से इस्तीफा दे, स्वराजियों का साथ देने लगता है। इस नाट्य मंचन में कलाकारों के रूप में राघव गुर्जरगौड़, अगस्त्य हार्दिक नागदा, चक्षु सिंह रुपावत, ईशा जैन, पियूष गुरुनानी, हर्षुल पंड्या, अंशुल, सलोनी पटेल, रेखा सिसोदिया, महेश जोशी, निति शर्मा एवं मोहम्मद रिज़वान ने अभिनय किया। नाटक का निर्देशन रेखा सिसोदिया ने किया एवं संगीत राहुल सोलंकी एवं प्रकाश अमित श्रीमाली ने किया।

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एकल कथापाठ में राघव गुर्जरगौड़ द्वारा ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन किया गया। बड़े भाई साहब कहानी उन दो भाइयों की की कहानी है जिसमें से छोटा भाई अपनी पढाई लिखाई की जिम्मेदारियों से भागता है और तरह तरह की खेल कुद में समय को व्यतीत करता है वहीं दूसरी ओर बड़ा भाई अपनी और छोटे भाई की जिम्मेदारियों को संभालता है। छोटा भाई अपने बचपन की कहानियां दर्शकों के सम्मुख प्रस्तुत करता है जिसमें वह अपने बड़े भाई के बारे में बचपन में हुए घटनाक्रम को चित्रित करता है जिसमें साफ़ झलकता है कि किस तरह बड़े भाई के प्रेम और रोष से मिले हुए शब्दों के सत्कार ने उसका जीवन बदल दिया।

एकल कथापाठ में अगली प्रस्तुति रेखा सिसोदिया द्वारा अभिनीत कहानी ‘एक्ट्रेस’ की थी। यह कहानी एक मध्य आयु वर्ग की सफल रंगमंच की अदाकारा तारा देवी के जीवन का वर्णन करती है। तारा देवी को अपने एक प्रशंसक कुंवर निर्मलकांत चोधरी से प्यार हो जाता है, जो की शहर के सबसे बड़े रईस और बहुत बड़े विद्वान है। कुंवर साहब तारा देवी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखते है जिसे वो स्वीकार कर लेती है। परन्तु उसकी छद्म आवरण में ढकी जीवन शैली उसे इस बात को अहसास करती है की वो केवल रंग रोगन करी हुई गुडिया है जो सिर्फ मनोरंजन का साधन मात्र है। उसे लगता है कि वह अब एक नवयौवना नहीं रही है इसलिए वह कुंवर को खुश रखने में सक्षम नहीं होगी। विवाह की एक रात पहले वह कुंवर साहब के लिए एक पत्र और उनसे मिले उपहार छोड़कर चली जाती है और सांसारिक मोह-माया को त्यागकर एक नए सादे जीवन की शुरुआत करती है।

कार्यक्रम के समापन पर संस्था के सचिव अमित श्रीमाली ने बताया कि प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में हुए कहानी एवं नाटक की प्रस्तुतीकरण में पार्श्व मंच में योगिता सिसोदिया, आफताब हुसैन, अशफ़ाक नूर खान ने भी सहयोग किया है। साथ ही इस तरह की कहानियों का मंचन निकट भविष्य में होता रहेगा और एकल कहानी प्रस्तुतिकरण के लिये ओर भी कलाकारों को प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

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