रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है आयुर्वेद

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है आयुर्वेद

दैनिक जीवन शैली में आयुर्वेद को अपनाना जरूरी
 
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है आयुर्वेद
आहार संतुलित व सुपाच्य हो

उदयपुर, 11 अप्रेल 2020। किसी भी गंभीर बीमारी से लड़ने एवं उससे बचने के लिए हर व्यक्ति को सबसे पहले अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना होगा और इसके लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपनी दैनिक जीवन शैली में आयुर्वेद को अपनाएं।

आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. शोभालाल औदिच्य ने बताया कि आयुर्वेद के तीन सिद्धान्त है आहर, निद्रा एवं ब्रह्मचर्य। इसका संयमित पालन व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ ही उसे हर प्रकार बीमारी से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। अतः प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर शौचादि से निवृत होकर आधे से एक घंटे की अवधि में योग व प्राणायाम करें। 

लॉकडाउन की इस अवधि में सभी लोग घर में रहते हुए परिवारों के सभी सदस्यों में मध्य निर्धारित दूरी रखते हुए नियमित अनुलोम-विलोम, भस्तरिका, उद्गित, प्रणव एवं सूक्ष्म व्यायाम के साथ आसानी से लगने वाले आसनों का प्रयोग कर सकते हैं।

आहार संतुलित व सुपाच्य हो:

डॉ. औदिच्य ने बताया कि व्यक्ति का आहार संतुलित व सुपाच्य होना चाहिए। इसके लिए प्रातः तुलसी पत्र, अदरक, काली मिर्च और हल्दी, नीम गिलोय युक्त चाय का उपयोग करने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है तथा अल्पाहार में अंकुरित मूंग को छोंककर या मूंग की दाल का सूप बनाकर, सूजी का उपमा आदि गरम वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। दोपहर के भोजन में दाल व हरी सब्जी के साथ चपाती का प्रयोग करें। शाम को हल्के भोजन में खिचड़ी, हरी सब्जियां आदि का प्रयोग कर सकते है एवं रात को सोते समय दूध के साथ हल्दी का प्रयोग करना चाहिए।

इनसे करें परहेज:

डॉ. औदिच्य ने बताया कि बदलते मौसम के दौरान दही, ठण्डा पानी, फ्रिज की वस्तुएं, बासी भोजन, ज्यादा गरिष्ठ भोजन आदि से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि दिन में सोना व रात्रि में देर तक जागना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

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