राहत शिविरों में घर जैसी सुविधाओं से अभिभूत शिविरार्थी


राहत शिविरों में घर जैसी सुविधाओं से अभिभूत शिविरार्थी

उदयपुर में महामारी के बीच बेहतर सुविधाएं देने को प्रतिबद्ध प्रशासन
 
 
राहत शिविरों में घर जैसी सुविधाओं से अभिभूत शिविरार्थी
 राहत शिविर में क्वारेंटाइन रखे गये लोगों को घर जैसी सुविधाएं मिलने से राहत मिल रही है।

उदयपुर, 20 अप्रेल 2020। कोरोना महामारी की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से आयोजित राहत शिविर में क्वारेंटाइन रखे गये लोगों को घर जैसी सुविधाएं मिलने से राहत मिल रही है। शहर से 30 किमी दूर चितौड़गढ़-उदयपुर नेशनल हाइवे स्थित पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय में चल रहे राहत शिविर में संस्थागत रखे गये लोगों को घर जैसा माहौल मिल रहा है व वे परिजनों से दूर होने के दर्द को भूल रहे हैं।  

शिविर स्थल पर युवाओं को अपनी रूचि के अनुसार कार्य सौंपे है जिनमें वे पूरी ऊर्जा के साथ जुटे हुए हैं। कुछ युवा क्रिकेट खेलने में मशगूल दिखाई दे रहे हैं तो युवाओं का एक समूह एक अन्य ईमारत में सिलाई मशीनों पर मास्क बनाने में जुटा हुआ है। दूसरी ओर एक तंबू में रसोइया और कुछ मददगार खाने की तैयारी में लगे दिखाई दे रहे हैं। शिविर में रखे गये लोगों को आलू-टमाटर की सब्जी, उड़द की दाल, चावल और रोटी आदि पौष्टिक भोजन मिल रहा है। जिला कलक्टर श्रीमती आनंदी के निर्देशानुसार वल्लभनगर एसडीएम शैलेश सुराणा यहां शिविरार्थियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए डटे हुए हैं। वे स्वयं मौके पर रहकर संस्थागत रखे गये लोगों को सहयोग कर रहे हैं।

800 लोगों के लिए सभी सुविधाएं

कुल 800 लोगों को संस्थागत क्वारेंटाईन के रूप में लोगों को यहां रखना और उनकी व्यवस्थाएं करना दुष्कर है परंतु प्रशासन इन्हें यह सुविधाएं पूरी शिद्दत से उपलब्ध करा रहा है। ये लोग उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी श्रमिक हैं, जो अहमदाबाद और गुजरात के अन्य शहरों से यहां तक पहुंचे हैं। इन लोगों के सुस्वास्थ्य के लिए यहां चिकित्सा की भी माकूल सुविधा की गई है। यहां सुबह और दोपहर में ओपीडी के रोगियों की स्वास्थ्य जांच की जाती है एवं ऐलोपेथिक व आयुर्वेदिक दोनों उपचार किए जा रहे हैं।

प्रशासन ने प्रत्येक व्यक्ति को टूथब्रश-पेस्ट, साबुन, कपड़े धोने का साबुन, तौलिया इत्यादि के किट वितरित किए है। प्रत्येक कमरे में बिस्तर और स्वच्छ और सुरक्षित कॉमन टॉयलेट हैं। लोगों को नाश्ता, दो टाइम चाय, दोपहर का भोजन और रात के खाने के लिए परोसा जाता है और कई बार इन्हें लिए हलवा और पूड़ी का विशेष भोजन भी उपलब्ध कराया है।

इनके लिए दैनिक योग सत्र की व्यवस्था की गई है जिसमें तीन विशेषज्ञ सुबह 7 बजे कक्षाएं आयोजित करते हैं। दो महिला परामर्शदाता भी रोजाना शाम को महिलाओं के लिए भिन्न-भिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं। यहां पर राजस्व निरीक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह की सेवाएं भी सराहनीय है।

खेल और मनोरंजन की माकूल व्यवस्था

शिविर स्थल में शिक्षा विभाग के कर्मचारी, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पटवारी और पुलिसकर्मी ड्यूटी है। शिविर स्थल पर लोगों के  मनोरंजन के लिए भी एक कमरा और समय निर्धारित है जहां रोजाना रामायण, महाभारत और विक्रम-बेताल जैसे धारावाहिक देखने के लिए इकट्ठा होते हैं। बच्चों को खिलौने दिए गए हैं और उन्हें मैदान में खेलने की अनुमति भी दी गई है। बच्चों को दिन में दो बार दूध एवं फल व बिस्कुट दिए जाते है। वहां सेवा दे रहे तहसीलदार ने बताया कि जल्द ही इन्हें बटर मिल्क भी दिया जाएगा। प्रशासन इनकी सुरक्षा के लिए सतत प्रयासरत है।

गर्भवती महिलाओं को उचित देखभाल

इस राहत शिविर 8 गर्भवती महिलाओं की उचित देखभाल की जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं को विशेष आहार और फल वितरित किए जा रहे है। यहां रह रही शारदा ने बताया कि किसी भी क्षण बच्चा होने की उम्मीद है, लेकिन मैं चाहती हूं कि हम जल्द से जल्द घर लौट जाए। उदयपुर कलक्टर आनंदी ने शहर के एक 5 सितारा होटल में पूरे महीने गर्भवती महिलाओं के ठहरने की व्यवस्था की है और इस आधार पर शारदा को भी दो दिन पहले ही होटल में स्थानांतरित किया गया था। लेकिन वह अगले दिन वापस लौट आईं। शारदा ने बताया कि इतनी शानदार जगह मैंने अपने जीवन में कभी देखी। था लेकिन मैं अपने पति और दोस्तों के साथ यहाँ रहना चाहती थी इसलिए वो वापस आ गई। राहत शिविर में आवासरत सीमा भी यहां की व्यवस्थाओं से खुश है। यहां पर महिलाओं के लिए साडि़यों तथा छोटे बच्चों वाले परिवारों को डायपर की व्यवस्था की गई है। संस्थागत लोगों का कहना है कि हमें वह सब कुछ मिल रहा है जो घर में भी नहीं मिलता है।

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