पूर्णिमा महोत्सव एवं विदेशी मेहमान द्वारा सत्संग


पूर्णिमा महोत्सव एवं विदेशी मेहमान द्वारा सत्संग

कला आश्रम फाउण्डेशन के अन्तर्गत संचालित कला आश्रम काॅलेज आॅफ परफोर्मिंग आर्टस् द्वारा आज दिनांक 28 जून को कला आश्रम प्रांगण में पूर्णिमा महोत्सव एवं सत्संग का आयोजन किया गया। महोत्सव का शुभारंभ फाउण्डेशन के मुख्य प्रबन्धक न्यासी डाॅ. दिनेश खत्री एवं संरक्षक न्यासी डाॅ. सरोज शर्मा द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया। महोत्सव के मुख्य अतिथि कनाडा के सुजोग थैरेपी विशेषज्ञ एवं योगा विशेषज्ञ डाॅ. कुलदीप झुन थे। अतिथियों द्वारा माँ शारदे को नमन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। मुख्य अतिथि द्वारा कला आश्रम काॅलेज आॅफ परफोर्मिंग आर्ट्स के ब्रोशर का विमोचन किया गया।

 
पूर्णिमा महोत्सव एवं विदेशी मेहमान द्वारा सत्संग

कला आश्रम फाउण्डेशन के अन्तर्गत संचालित कला आश्रम काॅलेज आॅफ परफोर्मिंग आर्टस् द्वारा आज दिनांक 28 जून को कला आश्रम प्रांगण में पूर्णिमा महोत्सव एवं सत्संग का आयोजन किया गया। महोत्सव का शुभारंभ फाउण्डेशन के मुख्य प्रबन्धक न्यासी डाॅ. दिनेश खत्री एवं संरक्षक न्यासी डाॅ. सरोज शर्मा द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया। महोत्सव के मुख्य अतिथि कनाडा के सुजोग थैरेपी विशेषज्ञ एवं योगा विशेषज्ञ डाॅ. कुलदीप झुन थे। अतिथियों द्वारा माँ शारदे को नमन कर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। मुख्य अतिथि द्वारा कला आश्रम काॅलेज आॅफ परफोर्मिंग आर्ट्स के ब्रोशर का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में परफोर्मिंग आर्ट्स की छात्राओं ने पूर्णिमा महोत्सव पर शास्त्रीय कत्थक नृत्य के माध्यम से अपनी प्रस्तुतियां दी। भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से प्रभावित होकर विदेशों से काफी संख्या में विदेशी मेहमान कला आश्रम काॅलेज आॅफ परफोर्मिंग आर्ट्स उदयपुर में भारतीय परम्परा पर आधारित भारतीय संस्कृति, कला, योग एवं नृत्य सीखने व प्रशिक्षण प्राप्त करने आते है। कला आश्रम से प्रशिक्षित रोमानिया के श्री स्टोइस आॅनट एन्द्रे द्वारा आज कला आश्रम प्रांगण में भारतीय परम्परा पर आधारित सत्संग की प्रस्तुति दी। भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। श्री स्टोइस आॅनट एन्द्रे ने भारतीय परम्परा पर आधारित योग एवं आध्यात्मिकता के विषय में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की। नृत्य का योग के साथ एक अहम् सम्बन्ध बताया है। डाॅ. सरोज शर्मा ने नृत्य के साथ योग के अद्भुत संगम के साथ महोत्सव में समां बांधा।

कला आश्रम की छात्राओं ने कत्थक नृत्य की शैली में ठुमरी, तराना आदि की प्रस्तुतियाँ दी। कला आश्रम काॅलेज आॅफ परफोर्मिंग आर्ट्स के संकाय सदस्यों श्रीमती इन्द्रा कुंवर, श्रीमती कमलेश एवं श्री सूरज गन्धर्व की भी पूर्ण सहभागिता रही।

डाॅ. दिनेश खत्री ने बताया कि नृत्य-योग पुरातन काल से ही चली आ रही वह विधा है जो मानव शरीर में चेतना भर देती है। आज नृत्य-योग शैक्षणिक व व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल है किन्तु इसकी उपयोगिता को अमेरिका व यूरोप जैसे विकासशील देशों ने समझा और अपनाया है। इस अभिव्यक्ति को सभ्य समाज में उच्च स्थान मिला है और शारीरिक व आध्यात्मिक विकास का महत्त्वपूर्ण आधार ही शास्त्रीय नृत्यों में प्रयोग होने वाले कारणों की प्रस्तुति के लिए नर्तक में नियमितता, एकाग्रता, शान्तमन, दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। इसे नृत्य-योग के अभ्यास से सरलतम किया जा सकता है। नृत्य-योग वे क्रियाए है जिसके सहारे हम शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक व आध्यात्मिक विकास कर स्वस्थ शरीर व स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।

कला आश्रम फाउण्डेशन शीघ्र ही कला आश्रम आयुर्वेद काॅलेज परिसर गोगुन्दा के समीप कला आश्रम नृत्य एवं योग ग्राम का शुभारम्भ करने जा रहा है जहाँ गुरू शिष्य परंपरा पर आधारित शास्त्रीय एवं पारम्परिक नृत्य की शिक्षा देश-विदेश के विद्यार्थियों को प्रदान की जायेगी।

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