गांधीवाद या गाँधी जी के विचार की आज सबसे ज्यादा प्रासंगिकता
वर्तमान समय में जहाँ हमे हिंसा, आतंकवाद एवं आपसी झगड़ो की घटनाए रोज सुनने को मिल रही है। नन्हे बच्चो के साथ दुष्कर्म, संकीर्ण मानसिकता एवं राष्ट्रीयता की भावना का कम होना यह सब इस ओर इशारा कर रहे है की हमे आमजन मानस की विचारधारा, उनकी सोच

वर्तमान समय में जहाँ हमे हिंसा, आतंकवाद एवं आपसी झगड़ो की घटनाए रोज सुनने को मिल रही है। नन्हे बच्चो के साथ दुष्कर्म, संकीर्ण मानसिकता एवं राष्ट्रीयता की भावना का कम होना यह सब इस ओर इशारा कर रहे है की हमे आमजन मानस की विचारधारा, उनकी सोच पर कार्य करने की आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चो को यदि अभी से गांधीवाद या गाँधी जी के विचार से अवगत करवाया जाए उनके पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में जोड़ा जाए तो निश्चित ही हम बेहतर भारत का निर्माण कर सकते है।
वर्तमान समय में गांधीवाद सब समस्याओ का हल है उक्त विचार गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर के निदेशक एवं बाल अधिकार विषेशज्ञ डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने आई.आई.एफ.एल. फाउंडेशन एवं गायत्री सेवा संस्थान के सयुक्त तत्वाधान में उदयपुर के रेती स्टैंड स्थित किसान भवन में गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक डॉ. महावीर जैन ने महात्मा गाँधी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गाँधी ने किस प्रकार सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को स्वतंत्रता दिलवाई। गायत्री सेवा संस्थान भी जनजातीय क्षेत्र में इसी विचारधारा पर कार्य कर रही है। कार्यक्रम में आई.आई.एफ.एल. फाउंडेशन, मुंबई के परियोजना अधिकारी राजीव शिन्दे ने सम्भाग से आए सभी युवाओ को अपने-अपने क्षेत्र में शिक्षा से वंचित बालिकाओ को शिक्षा से जोड़ने का आव्हान करते हुए पूर्ण साक्षर गाव बनाने का सभी युवाओ से संकल्प करवाया।
संगोष्ठी में गायत्री सेवा संस्थान के प्रतापगढ़ एवं उदयपुर जिले के बालिका शिक्षा कार्यक्रम के युवाओ सहित समाज कार्य से जुड़े कार्यकर्ताओ ने हिस्सा लेकर गाँधी जी के बारे में अपने विचार प्रकट किये। कार्यक्रम के प्रारम्भ में सभी ने महात्मा गाँधी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रदांजलि दी। कार्यक्रम में आई.आई.एफ.एल. फाउंडेशन के प्रतिनिधि प्रवीण कुमार पानेरी, परियोजना समन्वयक मनीष शर्मा, जिग्नेश द्वे, ब्लॉक समन्वयक भेरूलाल भाट ने भी विचार प्रकट किये।
