GMCH: बचायी रोगी की तिल्ली (स्प्लीन)

गीतांजली हॉस्पिटल में दूरबीन द्वारा दुर्लभ पायी जाने वाले पैन्क्रियाज़ (अग्नाशय) की गाँठ का सफल इलाज
 
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गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल उदयपुर में कोरोना महामारी के समय में सभी आवश्यक नियमों का पालन करते हुए निरंतर जटिल ऑपरेशन व आवश्यक इलाज किये जा रहे हैं। गीतांजली हॉस्पिटल के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग से सर्जन डॉ. कमल किशोर बिश्नोई, गैस्ट्रोलोजिस्ट डॉ. पंकज गुप्ता, व डॉ. धवल व्यास, एनेस्थेसिस्ट डॉ. करुणा शर्मा, आई.सी.यू इंचार्ज डॉ. संजय पालीवाल व ओ.टी. इंचार्ज हेमंत गर्ग के अथक प्रयासों से बाड़मेर निवासी 22 वर्षीय रोगी को बहुत ही दुर्लभ पाए जाने वाले पैन्क्रियाटिक (अग्नाशय) ट्यूमर SPEN (Solid pseudo papillary epithelial neoplasm) से मुक्ति प्रदान कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया। 

क्या था मसला:

22 वर्षीय बाड़मेर निवासी रूपा (परिवर्तित नाम) ने बताया कि चार माह से उसके पेट में दर्द, पेट फूलना, कब्ज़ी की शिकायत, पाचन संबंधी समस्या, भूख न लगना, जैसी समस्याएं बढ़ने लगी थीं। ऐसे में रोगी को बाड़मेर के स्थानीय अस्पताल में दिखाया गया और सी.टी. स्कैन में पैन्क्रियाज़ में ट्यूमर का पता चला। बाड़मेर के स्थानीय डॉक्टर द्वारा रोगी को सभी सुविधाओं से लेस गीतांजली हॉस्पिटल जाने की सलाह दी। 

गीतांजली हॉस्पिटल आने के बाद रोगी का जी.आई. सर्जन कमल किशोर बिश्नोई व गैस्ट्रोलोजिस्ट द्वारा सम्पूर्ण परीक्षण किया गया। रोगी का हाई क्वालिटी सी.टी स्कैन किया गया जिसमें रोगी के 10 सेंटीमीटर बड़ी अग्नाशय की गांठ ,जो कि तिल्ली के पास थी का पता चला। 

डॉ. कमल ने बताया की रोगी की लगभग 5 घंटे तक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी चली। जिसमे कि ट्यूमर पैन्क्रियाज़ की टेल पर होने की वजह से तिल्ली को बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी| तिल्ली का महत्वपूर्ण कार्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखने का होता है, जो कि कोरोना माहामारी के समय में और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। रोगी अब पूर्णतया स्वस्थ है, मात्र 3 दिनों में रोगी को हॉस्पिटल द्वारा छुट्टी दे दी गयी। 

 डॉ.कमल ने यह भी बताया कि पैन्क्रियाज़ का ये ट्यूमर SPEN (Solid pseudo papillary epithelial neoplasm) बहुत ही दुर्लभ (2%) पाया जाने वाला ट्यूमर है, जो कि अधिकतर युवा महिलाओं में पाया जाता है। भारत के बहुत ही कम उच्चतम सुविधाओं से लेस हॉस्पिटल में इसके इलाज की सुविधा है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गीतांजली मेडिसिटी पिछले 13 वर्षों से सतत् रूप से मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में परिपक्व होकर चतुर्मुखी चिकित्सा सेंटर बन चुका है। यहाँ एक ही छत के नीचे जटिल से जटिल ऑपरेशन एवं प्रक्रियाएं निरंतर रूप से कुशल डॉक्टर्स द्वारा की जा रही हैं। गीतांजली हॉस्पिटल के गैस्ट्रो विभाग द्वारा सफलतापूर्वक जटिल सर्जरी करके स्प्लीन को बचा लेना उत्कृष्टा का परिचायक है जो कि दक्षिण राजस्थान के लिए गर्व की बात है। 

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