स्मार्ट पुलिसिंग पर ज्ञान ज्योति की कार्यशाला
अगर देश की पुलिस को 'स्मार्ट' बनाना है तो हमें अपराधशास्त्र व पुलिस विज्ञान जैसे विषयों को बढ़ावा देना होगा। इन विषयों के अध्ययन से ऐसा पुलिस बल देखने को मिलेगा जोकि आधुनिक और तत्परता के साथ-साथ चौकस व भरोसेमंद भी होगा। आज के दौर में जिस तेज़ी से अपराध बढ़ रहा है, और जनता को हानि पहुंचा रहा है, हमारी पुलिस अपराध के कारण जाने बिना, उसे रोकने में असफल रहेगी।

उदयपुर, अगर देश की पुलिस को ‘स्मार्ट’ बनाना है तो हमें अपराधशास्त्र व पुलिस विज्ञान जैसे विषयों को बढ़ावा देना होगा। इन विषयों के अध्ययन से ऐसा पुलिस बल देखने को मिलेगा जोकि आधुनिक और तत्परता के साथ-साथ चौकस व भरोसेमंद भी होगा। आज के दौर में जिस तेज़ी से अपराध बढ़ रहा है, और जनता को हानि पहुंचा रहा है, हमारी पुलिस अपराध के कारण जाने बिना, उसे रोकने में असफल रहेगी। इसीलिए हमें ऐसे पुलिस अफसरों की ज़रूरत है जिनके पास अपराध, अपराधी और अपराधिक स्वाभाव का सम्पूर्ण ज्ञान हो। इसके लिए हमे कॉलेज व महाविद्यालयों में इन विषयों को पढ़ाने के साथ-साथ उसका वैज्ञानिक अध्यन करना होगा।
यह विचार राज्य के क्राइम ब्रांच कंसलटेंट और सेण्टर फॉर क्रिमिनोलॉजी एंड पब्लिक पॉलिसी के मुख्य अपराधशास्त्री, आर. रोचिन चंद्रा ने गुरूवार को उदयपुर में स्थित ज्ञान ज्योति सेवा संसथान के तत्वाधान में ‘स्मार्ट पोलिसिंग’ विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में व्यक्त किये। उन्होंने बताया की जिन प्रत्याक्षियों के पास अपराधशास्त्र और पुलिस विज्ञान की उपाधि है, और जो अपना भविष्य पुलिस सेवा में बना चाहते है, उन्हें सरकार ‘स्पेशल प्रीफरेंस’ देती है। इसलिए उन्होंने जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ के साथ मिलके अपराधशास्त्र और पुलिस विज्ञान जैसे कोर्स लागू करवाए है, जिसका आने वाले सितम्बर माह में आगाज़ होगा।
ज्ञान ज्योति सेवा संसथान में पढ़ रहे हज़ारों पुलिस उम्मीदवारों को सम्बोधित करते हुए, अपराधशास्त्री रोचिन ने बताया की “काफी पुलिस उम्मीदवार लिखित परीक्षा एवं फिजिकल टेस्ट में पास होने के बावजूत इंटरव्यू क्रैक नहीं कर पाते। इसका कारण ये है की सिलेक्शन पैनल हमेशा सब्जेक्ट मेटर स्पेशलिस्ट्स को पहला प्रीफरेंस देता है। जिस तरह डॉक्टर बनने के लिए मेडिसिन की उपाधि होना ज़रूरी है, उसी तरह पुलिस भर्ती के लिए अपराधशास्त्र की उपाधि होना पुलिस उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद है। ऐसा इसलिए क्यूंकि पुलिस की मुख्य भूमिका है, जनता को अपराध से सुरक्षित रखना। लेकिन अगर आपके पास अपराध व आपराधिक स्वभाव का ज्ञान ही नहीं है, तो आप कैसे आप पुलिस का कार्य कुशलता से निभा पाएंगे?”
कार्यशाला के संयोजक एवं ज्ञान ज्योति सेवा संसथान के निदेशक राहुल मेघवाल ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र की गतिविधियों से अवगत कराया। गौरतलब है की ज्ञान ज्योति सेवा संसथान उदयपुर की इकलौती ऐसी संस्था है जो हज़ारो पुलिस उम्मीदवारों को निशुल्क ट्रेनिंग देती है।
