हानिरहित बायो डिग्री डेबल प्लास्टिक

हानिरहित बायो डिग्री डेबल प्लास्टिक

सामान्य प्लास्टिक जन सामान्य के जन जीवन पर ही नहीं पशु, खेती के लिये भी अत्यधिक हानिकारक है। पेट्रो प्रोडक्ट से निर्मित होने वाला सामान्य प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक तत्व हर उस वस्तु में समाहित हो जाते है जिनका हम दैनदिनी में काम में लेते है और वह तत्व आगे जा कर बहुत बड़ी […]

 

हानिरहित बायो डिग्री डेबल प्लास्टिक

सामान्य प्लास्टिक जन सामान्य के जन जीवन पर ही नहीं पशु, खेती के लिये भी अत्यधिक हानिकारक है। पेट्रो प्रोडक्ट से निर्मित होने वाला सामान्य प्लास्टिक से निकलने वाले हानिकारक तत्व हर उस वस्तु में समाहित हो जाते है जिनका हम दैनदिनी में काम में लेते है और वह तत्व आगे जा कर बहुत बड़ी बीमारी में परिवर्तित हो जाता है।

उदयपुर जैसे देश के अनेक शहरों में प्रतिदिन 50-100 टन प्लास्टिक कचरा जरनेट होता है और वह अगले 300 साल तक भी किसी भी रूप में कम्पोस्ड नहीं होता है। देश में प्लास्टिक बैन होने के बावजूद गत 8 वर्षो से अधिक समय से धडड्ले से बाजार में बिक रहा है। इससे सरकार को राजस्व तो नहीं मिल रहा लेकिन प्लास्टिक खुले आम बिक कर सभी को मुहं चिढा रहा है।

यह चुनौती आमजन के साथ-साथ सरकार के लिये भी बन हुई है। इसे निपटने के लिये केन्द्र सरकार के केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण मण्डल ने देश में बायो डिग्री डेबल प्रोडक्ट को प्रोत्साहन देने के लिये लाईसैंस जारी किये है। हाल ही में केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण मण्डल ने देश में 13 लोगों को लाईसेंस दिये है जिसमें से एक राजस्थान के और वह भी उदयपुर के उद्योपगति को दिया है। इन 13 में 3 सेलर व 10 उत्पादक है।

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उदयपुर की कम्पनी इज़ी फ्लेक्स पाॅलीमर्स प्रा.लि.को मिलने वाला राजस्थान का प्रथम लाईसैंस है जिसके प्रबन्ध निदेशक आदित्य बोहरा ने बताया कि मकई के स्टार्च से बनने वाला यह प्लास्टिक 100 प्रतिशत हानिरहित तो है ही साथ ही इससे बनने वाला प्रोडक्ट अधिकतम 6 माह में स्वतः खाद में परिवर्तित हो जाता है जिससे कचरा बनने की समस्या समाप्त हो जाती है।

आदित्य ने बताया कि इस स्टार्च से बनने वाले प्रोडक्ट आमजन के साथ-साथ खेती व पेड़-पौधों के लिये के लिये भी काफी लाभदायक होते है। इस प्रोडक्ट सामान्य प्लास्टिक का एक मात्र उपाय है जो सभी के लिये लाभदायक है। इससे कम्पोस्टेबल प्लास्टिक सामान्य प्लास्टिक बनाने वाली मशीनों से ही बनाया जा सकता है। यह सामान्य प्लास्टिक से मामूली महंगा हो सकता है लेकिन जीवन की कीमत से अधिक नहीं। यह जूट बैग से काफी सस्ता होगा। मजबूती के मामलें में यह प्लास्टिक सामान्य प्लास्टिक से अधिक मजबूत है। इसका लाईसैंस लेने की प्रक्रिया काफी जटिल है।

स्टार्च से बनेंगे अनेक प्रोडक्ट- उन्होेंने बताया कि मकई के स्टार्च से पत्तल, दोने, डिस्पोजेबल गिलास, चम्मच, कप, प्लेट सहित अनेक प्रोडक्ट बनाये जा सकते है। बोहरा ने बताया कि शीघ्र ही लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये रोजगार के लिये युवाओं को प्रमोट किया जायेगा। लाइसेंस की पालना हेतु सभी बैग पर कम्पनी का नाम, सर्टिफिकेट नं. व कम्पोस्टेबल हिन्दी, अंग्रेजी में लिखना अनिवार्य होगा।

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