प्राचीन धरोहरों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा इंटेक


प्राचीन धरोहरों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा इंटेक

विश्व विरासत सप्ताह
 
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इस दौरान मेवाड़ के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों यथा चावंड, नठार की पाल, ईसवाल, आहाड़ संस्कृति के स्थलों आहाड़, गिलूण्ड, बालाथल, पछमता, छतरीखेड़ा के उत्खनन से प्राप्त पुरावशेषों की भी जानकारी दी जाएगी।

उदयपुर। इंटेक उदयपुर स्कंध (चैप्टर) विश्व विरासत सप्ताह पर विरासत का परिचय नई पीढ़ी तक करवाने के लिए विभिन्न आयोजन कर रहा है। इनमें महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा हैरिटेज वॉक, 24 नवम्बर को हड़प्पा संस्कृति की खोज के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक प्रदर्शनी, सेंट एंथनी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रदर्शनी, विरासत के अन्य पक्षों पर प्रतियोगिता, विद्यार्थियों द्वारा हड़प्पा संस्कृति के विभिन्न पक्षों पर मॉडल निर्माण आदि प्रयास शामिल हैं।

इंटेक उदयपुर चैप्टर के कन्वीनर वरिष्ठ पुराविद डॉ. ललित पाण्डेय ने बताया कि इस दौरान मेवाड़ के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों यथा चावंड, नठार की पाल, ईसवाल, आहाड़ संस्कृति के स्थलों आहाड़, गिलूण्ड, बालाथल, पछमता, छतरीखेड़ा के उत्खनन से प्राप्त पुरावशेषों की भी जानकारी दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि विरासत के प्रति जागरुकता के प्रसार और चेतना विकसित करने के उद्देश्य से 1972 में यूनेस्को ने एक प्रस्ताव पारित किया था, उसके पश्चात् से भारत में प्रतिवर्ष 19 से 25 नवम्बर के मध्य विरासत सप्ताह का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा आयोजित किया जाता रहा है। भारत में यह 1988 से निरंतर आयोजित किया जा रहा है।

सर्वेक्षण विभाग के अतिरिक्त विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के अलावा अनेक संगठन सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न आयोजन करते हैं। जैसा कि सर्वविदित तथ्य है कि भारत और राजस्थान के इतिहास में मेवाड़ - उदयपुर का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेवाड़ पाषाणकाल से ही मानव के आकर्षण का केंद्र रहा है जिसका कारण यहां की मानव अधिवासन के अनुकूल प्रकृति है।

उदयपुर एक ओर तो अपनी ताम्रपाषाण और लौहकालीन विरासत के लिए प्रसिद्ध है तो मेवाड़ मध्य काल में अपनी वीरता और स्वातंत्र्य प्रेम के लिए विख्यात है। आधुनिक काल में भी मेवाड़ ने स्वतंत्रता आंदोलन में महती भूमिका का निर्वहन किया है तो 1947 में भारत की स्वतंत्रता के पश्चात देशी राज्यों के भारतीय गण में सम्मिलित होने में भी मेवाड़ का महनीय योगदान रहा है।

मेवाड़ अपनी इस महान परम्परा के कारण आज देशी और विदेशी पर्यटकों का एक प्रिय स्थल है जो यहां इसकी रमणीय प्रकृति और विरासत के वशीभूत होकर आते हैं।

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