गिट्स में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन


गिट्स में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
 

गीतांजली इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्निकल स्टडीज डबोक उदयपुर में कम्प्यूटर साईंस इन्जिनियरिंग एवं एम.सी.ए. के विभाग के संयुक्त तत्वाधान में ‘‘बायो एण्ड साइकोलाॅजी इन्सपायर्ड टेक्निक्स टू मेक आई ओ टी डिवाइस सिक्योर’’ पर एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
 
गिट्स में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन
संस्थान के निदेशक डाॅ. विकास मिश्र ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि लोग दैनिक जीवन में तकनीकी पर निर्भर होते जा रहे हैं तकनीकी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। यदि तकनीक सेफ एण्ड सिक्योर नहीं होगी तो लोगों का जीवन संकट में डाल देंगे। इन्हीं तकनीकी खामियों को दूर करने एवं तकनीकी के माध्यम से जीवन शैली को उच्च बनाने के संदर्भ में इस अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। 

गीतांजली इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्निकल स्टडीज डबोक उदयपुर में कम्प्यूटर साईंस इन्जिनियरिंग एवं एम.सी.ए. के विभाग के संयुक्त तत्वाधान में ‘‘बायो एण्ड साइकोलाॅजी इन्सपायर्ड टेक्निक्स टू मेक आई ओ टी डिवाइस सिक्योर’’ पर एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ शुरू हुई।

संस्थान के निदेशक डाॅ. विकास मिश्र ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि लोग दैनिक जीवन में तकनीकी पर निर्भर होते जा रहे हैं तकनीकी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। यदि तकनीक सेफ एण्ड सिक्योर नहीं होगी तो लोगों का जीवन संकट में डाल देंगे। इन्हीं तकनीकी खामियों को दूर करने एवं तकनीकी के माध्यम से जीवन शैली को उच्च बनाने के संदर्भ में इस अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। 

इस अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर एण्ड टेक्नोलाॅजी के कुलपति डाॅ. एन एस राठौड़ ने कहा कि आज के इन्जिनियरिंग के विद्यार्थियों को अपनी पढाई के साथ-साथ स्क्लि डवलपमेंट पर ध्यान देना होगा। इसी स्किल कमी के चलते विद्यार्थी अपने आप को इण्डस्ट्री के समक्ष सही ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। जिससे प्लेसमेंट का ग्राफ दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा हैं। 

विषय विशेषज्ञ डाॅ. हिना राठौड (विजिटिंग प्रोफेसर, टेक्सोस ए एण्ड एम युनिवर्सिटी यु.एस.ए.) ने कहा कि आई.ओ.टी. तकनीक इन्टरनेट आधारित तकनीक हैं। यदि इन्टरनेट हैक हो सकता हैं तो आई.ओ.टी. भी हो सकता हैं। साथ ही आई.ओ.टी. का मुख्य पार्ट सेंसर होता हैं। यदि सेंसर सेंस करना बंद कर दे तो गलत डाटा यूजर्स को प्रेषित करेगा। इसी सुरक्षा खतरे को दूर करने के लिए बायो आधारित सुझाव मुख्य अतिथि द्वारा बताये गये।
 
कम्प्यूटर र्साइंस विभागाध्यक्ष डाॅ. मयंक पटेल के अनुसार ‘‘इन्टरनेट ऑफ़ थींग्स’’ चाहे इण्डस्ट्री हो या ऑफिस हर जगह अपना स्थान बनाता जा रहा हैं। लोग बडें पैमाने पर आई.ओ.टी. का प्रयोग कर रहे हैं।  यदि सुरक्षा खतरे को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को आगे आना होगा। 

धन्यवाद ज्ञापन डीन स्टुडेंट अफेयर्स डाॅ. राजीव माथुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर अंजली धाबाई द्वारा किया गया।

इस अवसर पर संस्थान के वित्त नियंत्रक बी.एल. जांगिड एवं एम.सी.ए. विभागाध्यक्ष प्रो. हेमन्त साहू सहित सभी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पूरा गीतांजली परिवार उपस्थित था।
 

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