रिडिस्वरिंग गवरी-2018 के आयोजन को लेकर बैठक आयोजित
जिला प्रशासन के निर्देशन में इस वर्ष गवरी 2018 का आयोजन विभिन्न नवाचारों के साथ किया जायेगा। मेवाड़ के लोकनृत्य गवरी को राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से विगत दो वर्षो से हो रहे गवरी के सफल आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए इस वर्ष भी गवरी के आयोजन की रुपरेखा एवं व्यवस्था को लेकर बैठक बुधवार को टीआरआई निदेशक के कार्यालय में आयोजित हुई।

जिला प्रशासन के निर्देशन में इस वर्ष गवरी 2018 का आयोजन विभिन्न नवाचारों के साथ किया जायेगा। मेवाड़ के लोकनृत्य गवरी को राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से विगत दो वर्षो से हो रहे गवरी के सफल आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए इस वर्ष भी गवरी के आयोजन की रुपरेखा एवं व्यवस्था को लेकर बैठक बुधवार को टीआरआई निदेशक के कार्यालय में आयोजित हुई।
बैठक में प्रादेशिक परिवहन अधिकारी डाॅ. मन्नालाल रावत, पीओटी निदेशक के.पी.सिंह, टीआरआई निदेशक दिनेश जैन, निदेशक (सांख्यिकी) बाबूलाल खराड़ी, पर्यटन उप निदेशक सुमिता सरोच, टीआरआई से दिनेश पालीवाल तथा रिडिस्वरिंग गवरी प्रोजेक्ट के हरिश आज्ञेय, डब्ल्यु.डेविड क्युबिएक तथा लोकेश पालीवाल मौजूद थे।
बैठक में जनजातीय कला एवं संस्कृति को डोक्यूमेन्टेशन व डिजिटाइजेशन के माध्यम से संरक्षित करने तथा गवरी के माध्यम से कला व सामाजिक सौहार्द के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विविध टाॅक शो एवं पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने के बिन्दुओं पर चर्चा हुई। बैठक में गवरी के व्यापक प्रचार प्रसार के साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों पर इसके आयोजन की बात कही गयी जिससे देशी-विदेशी पर्यटक मेवाड़ की कला व संस्कृति से रुबरु हो सके एवं यहां की संस्कृति को अपने देश-प्रदेश तक ले जायें। इससे इस लोक नृत्य को विशिष्ट पहचान मिलेगी।
रिडिस्वरिंग गवरी को न केवल जोर-शोर से मनाने बल्कि इसे एक वार्षिक उत्सव के रुप में स्थापित करने एवं विशेष कर रुरल ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने को लेकर भी चर्चा हुई। आरटीओ श्री रावत ने इस आयोजन में जिला शिक्षा अधिकारी, एसआईईआरटी, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के साथ आमजन को इस आयोजन में सहयोग देने एवं सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
पीओटी निदेशक श्री सिंह ने गवरी के कलाकारों को पहचान दिलाने के लिए इनकी अलग से डेटाबेस तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही गवरी को ओर अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए वेबसाईड एवं सोशल मीडिया के जरिये इसका व्यापक प्रचार प्रसार करने को कहा गया।
