टी पी व्यवस्था पर भूविज्ञान विभाग के निदेशक को सौपा ज्ञापन


टी पी व्यवस्था पर भूविज्ञान विभाग के निदेशक को सौपा ज्ञापन

मिनरल पाउडर उद्योग पर 3 साल से लागू टी पी व्यवस्था निहायत ही असंगत और अव्यवहारिक सिद्ध हुई है-फोर्टी 
 
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कोविड और आर्थिक मंदी की मार झेल रहे इस उद्योग पर इस नियम का अत्यंत ही नकारात्मक असर हुआ है

मिनरल पावडर उद्योग पर 3 साल से लागु टी पी व्यवस्था को लेकर ऑल उदयपुर मिनरल प्रोसेसर्स के प्रतिनिधि मंडल द्वारा आज खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक को टी पी के विरोध में प्रतिवेदन दिया गया।

फोर्टी ब्रांचेज को-चैयरमेन प्रवीण सुथार ने बताया कि मिनरल पाउडर उद्योग पिछले कई वर्षों से इस समस्या से जूझ रहा है इससे व्यापार संचालन व तैयार माल के परिवहन में कई व्यवहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए उद्यमी लगातार विभागों के चक्कर लगा रहा है। इसी सिलसिले में ऑल उदयपुर मिनरल प्रोसेसर्स के प्रतिनिधि मंडल द्वारा आज खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक को टी पी के विरोध में प्रतिवेदन दिया गया। 

मिनरल पावडर  उद्योग पर 3 साल से लागु टी पी व्यवस्था निहायत ही असंगत और अव्यवहारिक सिद्ध हुई है। कोविड और आर्थिक मंदी की मार झेल रहे इस MSME उद्योग पर इस नियम का अत्यंत ही नकारात्मक असर हुआ है। इसलिए मिनरल पाउडर उद्योग इसे हटाने की मांग कर रहा है। 3 जनवरी 2022  को जारी गजट नोटिफिकेशन जिसके अंतर्गत मिनरल पाउडर व्यवसाई को सालाना 25000/- रूपये खान विभाग को जमा कराने हैं। इसके खिलाफ भी मिनरल पाउडर उद्यमियों ने अपना विरोध जताते हुए खान विभाग द्वारा इसे वापस ले लेने पर जोर दिया। 

मिनरल पाउडर व्यवसाईयों के प्रतिनिधि गोपाल अग्रवाल ने मांग की कि टी पी व्यवस्था केवल क्रूड पर ही लागू रहनी चाहिए, मिनरल पाउडर के ऊपर से इसे हटाने का कष्ट किया जाए। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक होने के कारण उद्योगपतियों की इस अपील को समझ कर सरकार को टी पी वापस लेनी चाहिए वर्ना मिनरल पावडर उद्योग बंद होने की कगार पर आ जायेगा।  

ऑल उदयपुर मिनरल प्रोसेसर्स के प्रतिनिधि गिरीश भगत, राजेंद्र पुरोहित, संजय खेतान, सुरेश जैन, अशोक ओझा, ओ.पी. नागदा उपस्थित थे एवं टी पी के लिए अपना विरोध जताया। अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने कहा की टी पी व्यवस्था में जब मिनरल पावडर उद्यमी जुड़े थे तब यह भरोसा दिलाया गया था की किसी तरह का कोई आर्थिक भार मिनरल व्यवसाई पर नही डाला जाएगा पर समय के साथ खान विभाग अपने आश्वासन से मुकर गया है और यह 25000 का नया वार्षिक शुल्क लागु करने को तैयार है। 

उन्होंने अवैध खनन रोकने के सुझाव भी खान विभाग को दिए। जिस जिस माइनिंग क्षेत्र में अवैध खनन की आशंका हो वहा पर माइनिंग चोकी एवं विजिलेन्स वाहनों की संख्या बढाई जाए। अगर कोई अवैध खनन करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर कड़ी पेनल्टी एवं कारावास की सजा का प्रावधान हो तो डर पैदा होगा एवं अवैध खनन पर अंकुश लग सकेगा। 

गोपाल अग्रवाल के अनुसार यह व्यवस्था अवैध खनन रोकने के लिए की गई थी पर मिनरल पाउडर उद्योग का अवैध खनन से क्या वास्ता। मिनरल पाउडर उद्योग की मोडस अलग है जहां GST पेड बिल जिसके साथ संलग्न ई-वे बिल होता है, रॉयल्टी पेड मिनरल ग्राइंड होता है तो अवैध माल होने की कहाँ गुंजाईश रहती है। इसके अलावा मुख्य मंत्री द्वारा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए RIBS जैसी कई योजनाएं इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित किये जा रहे हैं जिससे राजस्थान के उद्योगपति में उत्साह का माहौल है पर टी पी जैसे कदम से मिनरल पाउडर उद्यमी काफी हतोत्साहित हुए हैं।   

इस सन्दर्भ में गोपाल अग्रवाल ने कहा की राजगढ़, ब्यावर, गंगापुर आदि के मिनरल संगठनों एवं राजस्थान माइनर मिनरल उद्योग संघ, मिनरल ग्राइंडिंग प्लांट एसोसिएशन आदि के टी पी के खिलाफ ज्ञापन भी निदेशक को सौंपे गए। 

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