जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट का सेमिनार


जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट का सेमिनार

खान एवं भू-विज्ञान विभाग के निदेशक जितेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि राज्य में जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट के तहत 12 हजार कार्यो की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। इस फाउण्डेशन के तहत होने वाले कार्यो की समीक्षा एवं उचित क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत,समिति एवं जिला परिषद के लोगों को उचित प्रशिक्षण की जरूरत है ताकि इस फण्ड से खनन एवं प्रभावित लोगों को उचित राहत प्रदान की जा सकें।

 
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जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट का सेमिनार

खान एवं भू-विज्ञान विभाग के निदेशक जितेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि राज्य में जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट के तहत 12 हजार कार्यो की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। इस फाउण्डेशन के तहत होने वाले कार्यो की समीक्षा एवं उचित क्रियान्वयन हेतु ग्राम पंचायत,समिति एवं जिला परिषद के लोगों को उचित प्रशिक्षण की जरूरत है ताकि इस फण्ड से खनन एवं प्रभावित लोगों को उचित राहत प्रदान की जा सकें।

वे आज फाउण्डेशन द्वारा होटल आमंत्रा में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में बाले रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर खनन अभियन्ताओं एवं भू-वैज्ञानिकों एवं छात्र अभियन्ताओं का आव्हान किया कि वे नये-नये खनिजों की खोज एवं अन्वेषण में मदद करें ताकि राजस्थान एवं देश के विकास हेतु अधिकाधिक राजस्व प्राप्त हो सकें।

उन्होंने कहा कि खान मालिक नियमित रूप से सामाजिक सरोकार के तहत व्यय के अलावा राॅयल्टी, सेस, डीएमएफ, एमएनईटी और स्वच्छ उर्जा के रूप में सरकार को विभिन्न उपकरों का भुगतान कर रहे है। मिनरलों से प्राप्त राॅयल्टी की एक निश्चित राशि जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट में जमा होती है।

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कार्यक्रम की मुख्य वक्ता विज्ञान एवं प्रशिक्षण केन्द्र नई दिल्ली की पर्यावरण शासन इकाई की कार्यक्रम प्रबन्धक श्रेष्ठा बेनर्जी ने पावर पाॅइन्ट प्रजेन्टेशन के माध्यम से जिला खनिज फाउण्डेशन ट्रस्ट के आगाज़ से लगाकर आज तक की स्थिति पर विवेचना की। उन्होेंने बताया कि वर्ष 2006 में वोडा कमेटी की सिफारिशों के तहत ही जिला मिनरल फाउण्डेशन का आगाज़ हो चुका था लेकिन वर्ष 2015 में यह मूर्त रूप में सामनें आयी। यह बिना लाभ कमानें वाली संस्था है और यह एक पब्लिक न्यास के तौर पर कार्य करती है। उन्होेंने बताया कि जिला मिनरल फाउण्डेशन का 72 प्रतिशत धन उड़ीसा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखण्ड राज्य की खदानों से मिलता है और वर्तमान में इस फाउण्डेशन में 21 हजार करोड़ रूपयें एकत्रित है। जिसमें से अभी तक मात्र 4 हजार करोड़ रूपयें ही विकास कार्यो में उपयोग में लाये जा सके है। जो उपलब्ध राशि का 20 प्रतिशत है।

अन्य मुख्य वक्ता खनन अभियन्ता आकिस अंसारी ने बताया कि राजस्थान में इस ट्रस्ट में 2 हजार करोड़ रूपयें का धन एकत्रित किया हुआ है और उसका उपयोग विकास कार्यो में किया जा रहा है। प्रतिवर्ष राज्य से इस ट्रस्ट में एक हजार करोड़ रूपयें जमा हो रहे है। विशिष्ठ अतिथि एमपीयूटी के कुलपति प्रो.उमाशकंर शर्मा ने कहा कि क्षेत्रीय प्राथमिकता को देखते हुए खनन क्षेत्रों की आवश्यकताओं एवं लोगों की चाहत को ध्यान में रखते हुए इस फण्ड का सदुपयोग करना चाहिये।

एमईएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरूण कोठारी ने बताया कि भविष्य में इस फाउण्डेशन ट्रस्ट में जमा पूंजी का और अधिक उपयोग हो पायेगा। प्रारम्भ में चेप्टर अध्यक्ष डाॅ. एस.एस.राठौड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन टेक्निकल एवं सेमिनार कमेटी के चेयरमेन आर.सी.कुमावत ने किया। धन्यवाद खान एवं भू विज्ञान विभाग के अतिरिक्त निदेशक मधुसूदन पालीवाल ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर एन. के. कोठारी, डी. एस. मारू, पी.के.जैन, हिजिंलि के सुनील वशिष्ठ, नईदिल्ली के चिन्मय शल्य, राजेश सामर, महेन्द्र बोकड़िया, आर.पी.गुप्ता सहित 150 से अधिक खनिज अभियन्ताओं ने भाग लिया।

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