छोटे तालाब पुरखो व प्रकृति की विरासत

उच्च न्यायालय व राज्य सरकार के जलाशय संरक्षण निर्देशों की पालना जरूरी

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पिछोला झील के बारीघाट पर श्रमदान कर झील मित्रो ने झील क्षेत्र से पॉलीथिन, घरेलू सामग्री, फूल मालाये व शराब पानी की बोतलें निकाली गई। 

उदयपुर के छोटे तालाबों की उदयपुर के जल स्थायित्व में बड़ी भूमिका है। इन्हें पुरखों व प्रकृति की विरासत इन विरासतों को बचा कर रखना पूरे शहर की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह विचार रविवार को आयोजित झील संवाद में व्यक्त किये गए।

झील विशेषज्ञ डॉ अनिल मेहता ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने छोटे तालाबो के संरक्षण के लिए आदेश पारित कर रखा है। यह आदेश वर्ष 2007 में डॉ तेज राज़दान व अन्य बनाम राज्य सरकार याचिका के तहत दिए गए थे। अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार सहित अन्य कई याचिकाओं के तहत उच्च न्यायालय ने जलाशयों व उनके जलग्रहण क्षेत्रों को अतिक्रमण व अवरोधों से मुक्त रखने के निर्देश दिए हुए है। 

इसी क्रम में शासन सचिव राजस्व (ग्रुप सात) ने समस्त जिला कलेक्टर को पत्र क्रमांक प 3(146) राज -7/2011 दिनांक 11 मई 2018 जारी कर जलस्रोतों के संरक्षण के लिए निर्देश दिए हुए है। ऐसे में तालाबो को पुनः उनके मूल स्वरूप में लौटाना विधिक व पर्यावरणीय सिद्धान्तो के तहत अत्यंत जरूरी है व हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है।

झील विकास प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन जिला कलेक्टर आनंदी द्वारा छोटे तालाबो की स्थिति का आंकलन करने के लिए तहसीलदार गिर्वा के संयोजकत्व में एक कमिटी बनाई गई थी। इस कमिटी ने दौरा कर तथ्य व वस्तुस्थिति जुटाये थे। जिला कलेक्टर को इस रिपोर्ट को तलब कर आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।

गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि छोटे तालाब उदयपुर के भूजल स्तर को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। वहीँ यह बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को रोक कर जानमाल की रक्षा करते है। इनका नष्ट होना या उदयपुर में भूमिगत जल की कमी व बाढ़, दोनों के खतरे को बढ़ाएगा।

संवाद के पूर्व पिछोला झील के बारीघाट पर श्रमदान कर झील मित्रो ने झील क्षेत्र से पॉलीथिन, घरेलू सामग्री, फूल मालाये व शराब पानी की बोतलें निकाली गई। 

श्रमदान में जलयोद्धा देवराज सिंह, झील सुरक्षा व विकास समिति के सदस्य तेज शंकर पालीवाल, द्रुपद सिंह चौहान, राम लाल गहलोत, अभिनव विद्यालय के कुशल रावल, कृष्णा कोष्ठी, गोपाल कुमावत एवं गांधी मानव सोसायटी के निदेशक नन्द किशोर शर्मा सहित स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
 

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