सकारात्मक सोच के साथ करें नये वित्तिय वर्ष की शुरुआत

सकारात्मक सोच के साथ करें नये वित्तिय वर्ष की शुरुआत  
 

 
सकारात्मक सोच के साथ करें नये वित्तिय वर्ष की शुरुआत
मनोवैज्ञानिक डाॅ.स्नेहदीप भाणावत ने कहा कि हमें कोरोना से जंग लड़ते खुले मन से मंदी को स्वीकार करते हुए आर्थिक स्थिति सुदृढ़़ करने वाले अवसरों की तलाश में जुट जाना चाहिये।

उदयपुर। मनोवैज्ञानिक डाॅ.स्नेहदीप भाणावत ने कहा कि हमें कोरोना से जंग लड़ते खुले मन से मंदी को स्वीकार करते हुए आर्थिक स्थिति सुदृढ़़ करने वाले अवसरों की तलाश में जुट जाना चाहिये।

मंदी को स्वीकार करें एवं इसको अपॉर्चुनिटी में कैसे बदलें-उन्होंने कहा कि हम सभी मंदी के दौर से गुजर रहे है लेकिन इसे एक समस्या के रूप में नहीं अपितु इसे एक अपॉर्चुनिटी के रूप में देखना है। इस परिस्थिति में हमारे लिए एक सकारात्मक पहलु यह है कि भारत में युवा आबादी का प्रतिशत अधिक है और यहीं हमारी शक्ति है। इस शक्ति का उपयोग हमें देश की उत्पादकता बढ़ाने में लगाएं। 

चीन से विश्व के अधिकतर देशों का विश्वास कम हो गया है। इसका लाभ उठाते हुए भारत को प्रोडक्शन हब बनाने में युवा शक्ति पूरी ऊर्जा के साथ लगे, उद्योगपति, व्यापारी, कर्मचारी, सरकार एवम आम जन एक साथ मिलकर पूरी शक्ति से काम करें तो मंदी से उभरने से कोई नहीं रोक सकता। 

सरकार व रिजर्व बैंक का योगदान (रोल )-सरकार को सभी प्रकार के टेक्स में कटौती कर अपने पूर्व निर्धारित विकास बजट को जनकल्याण योजना में खर्च करना चाहिये, जिससे आम जन का जीवन आसान हो जाए। रिजर्व बैंक ब्याज दर में कटौती करेगा, जिससे बाजार में क्रेडिट बढ़ेगी मुद्रा का मुद्रण करेगी, जिससे बाजार में तरलता बढ़ेगी इससे मांग एवं आपूर्ति में सकारात्मक वृद्धि होगी और नए नए रोजगार का सृजन होगा। 

अर्थ व्यवस्था की मुख्य ऊर्जा 

अर्थ व्यवस्था की मुख्य ऊर्जा उत्पादकता है और वर्तमान में बाजार में ऋण की उपलब्धता नहीं के बराबर है। हमें अपनी आय बढ़ानी है, तो इसका एक मात्र समाधान उत्पादकता बढ़ाना है। इससे धन व मानव संसाधन का उत्पादकता में योगदान नहीं के बराबर रहता है, अधिक लोग इस तरीके पर जाने लग जाते है तो वह बाजार को मंदी की तरफ धकेलते है इस सोच को बदलते हुए धन व युवा शक्ति को उत्पादकता में लगाना है, जिससे अर्थ व्यवस्था में नयी ऊर्जा का संचार होगा।

2020-21 नया करने के लिए सही समय क्यों और कैसे है-इस समय बाजार में काम करने के लिए प्रतिस्पर्धा कम होगी, इस समय बहुत सारी नयी समस्याएं पैदा होगी। इन समस्याओ के समाधान की दिशा में सोचकर समाधान निकालकर इसको सुअवसर में परिवर्तित कर सकते है। वर्तमान समय में अच्छा टेलेंट बहुत आसानी से उपलब्ध होगा, कार्य में उपयोग आने वाली वस्तुएं एवं मानव संसाधन उचित दर पर व आसानी से उपलब्ध होगा, जिससे आप अपना कार्य समय या समय से पूर्व पूर्ण कर सकते हों। 

निष्कर्ष- इस दौर में हमें तीन बिंदुओं का विशेष ध्यान रखना है जिसमें ऋण की गति को आय की गति से अधिक नही होने देना, आय की गति उत्पादकता की गति से अधिक नहीं होनी चाहिये,आखिर में अधिक से अधिक उत्पादकता बढ़ाना ही इसका मुख्य सार है।

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