भारत में इसी वर्ष आई नवीनतम तकनीक द्वारा गीतांजली हॉस्पिटल में हुआ सफल ऑपरेशन

भारत में इसी वर्ष आई नवीनतम तकनीक द्वारा गीतांजली हॉस्पिटल में हुआ सफल ऑपरेशन

शॉकवेव कोरोनरी लिथोट्रिप्सी तकनीक

 
भारत में इसी वर्ष आई नवीनतम तकनीक द्वारा गीतांजली हॉस्पिटल में हुआ सफल ऑपरेशन

71 वर्षीय रोगी के केल्शिफाइड ब्लॉकेज के गंभीर केस में गीतांजली ह्रदय रोग विभाग को मिली बड़ी कामयाबी

हमारे देश में आमतौर पर हार्ट डिजिजेज की एडवांस स्टेज को बेहद खतरनाक माना जाता है लेकिन आधुनिक चिकित्सकीय तकनीकों और चिकित्सकों के कौशल से गंभीर मरीजों को भी ठीक किया जा सकता है इसका सटिक उदारहण गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहां 71 वर्षीय हार्ट पेशेंट को स्टेंट लगाकर अत्याधुनिक आई.वी.एल (इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिप्सी) तकनीक से ठीक किया गया जबकि पेशेंट के केस में अन्य निजी अस्पताल के डॉक्टर्स ने ओपन हार्ट सर्जरी का सुझाव दिया था लेकिन उम्र अधिक होने के कारण यह जोखिम भरा था।  

रोगी को जीवनदान देने वाले इस जटिल लेकिन सफल इलाज करने वाली इंटरवेंशनल कार्डियोलोजिस्ट की टीम में डॉ. रमेश पटेल, डॉ. कपिल भार्गव, डॉ. डैनी मंगलानी, डॉ.शलभ अग्रवाल, डॉ. संदीप. डॉ. शुभम तथा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अनिल पालीवाल का योगदान रहा। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर में कोरोना से सम्बंधित सभी नियमों का गंभीरता से पालन करते हुए निरंतर जटिल से जटिल ऑपरेशन व इलाज किये जा रहे हैं। 

क्या है मामला

मध्य प्रदेश निवासी 71 वर्षीय रोगी पिछले 10 वर्षों से दिल की नसों में ब्लॉकेज की समस्या से जूझ रहे थे। गीतांजली हॉस्पिटल में हार्ट फेल होने की स्थिति में हृदय रोग विभाग में भर्ती किया गया। रोगी ने बताया कि उन्हें पिछले 5 सालों से लगातार खांसी, पेशाब निकल जाना, सांस चलना, ज्यादा पसीना होना, बैचेनी एवं लेट नहीं पाना जैसी शिकायतें रहती थीं, जिसके लिए वह दवाईयों पर निर्भर थे।

क्या होती है शॉकवेव कोरोनरी लिथोट्रिप्सी तकनीक?

शॉकवेव कोरोनरी लिथोट्रिप्सी एक अनोखी प्रक्रिया है, जिसकी मदद से कोरोनरी आर्टरी डिजीज के एडवांस चरण वाले मरीज जिनकी धमनी में कैल्शियम इकठ्ठा होने के कारण हार्ड ब्लॉकेज हो जाता है उनका इलाज करना भी संभव है । एडवांस शॉकवेव कोरोनरी लीथोट्रिप्सी में एक खास गुब्बारे को दिल की नसों द्वारा ले जाया जाता है, जिससे कि जमा हुआ कैल्शियम टूट जाता है और सामान्य एंजियोप्लास्टी की जा सकती है।

सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रमेश पटेल ने बताया कि हृदय की धमनियों में कैल्शियम का जमा होना और केल्शिफाइड ब्लॉकेज होना हमेशा से ही हृदय रोग चिकित्सकों के लिए चिंता का विषय रहा है इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिये ओपन हार्ट सर्जरी का विकल्प ही सुझाया जाता है। उक्त रोगी की अधिक उम्र व नाजुक स्थिति को देखते हुए एक्सपर्ट कार्डियोलॉजिस्ट टीम द्वारा शॉकवेव लिथोट्रिप्सी तकनीक से इलाज करने की योजना बनायी गयी।

डॉ. रमेश ने बताया कि रोगी पिछले 10 वर्षों से ब्लॉकेज की समस्या थी और बहुत ही गंभीर अवस्था में गीतांजली हॉस्पिटल लाया गया, यहाँ रोगी की एंजियोप्लास्टी की गयी जिसमें उनके हृ्रदय की नसों में पूरी तरह से कैल्शियम था और दिल की नाजुक स्थिति में मेजर सर्जरी में बहुत रिस्क हो सकता था, ऐसे में नवीनतम तकनीक शॉकवेव लिथोट्रिप्सी द्वारा बहुत ही कम समय में रोगी की अत्यधिक कैल्शियम वाली धमनी को स्टेंटटिंग कर ठीक किया गया, अब रोगी स्वस्थ है एवं हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गयी है। “अभी तक शॉकवेव लिथोट्रिप्सी तकनीक सिर्फ भारत के महानगरों में ही उपलब्ध थीं, गीतांजली हॉस्पिटल में इस तकनीक द्वारा उपचार होना दक्षिण राजस्थान की बहुत बड़ी उपलब्धि है”

जी.एम.सी.एच सी.ई.ओ प्रतीम तम्बोली ने बताया कि कोरोना गाइडलाईन्स का गंभीरता से पालन करते हुए गीतांजली में निरंतर जटिल से जटिल ऑपरेशन व इलाज सफलतापूर्वक किये जा रहे हैं।  आई.वी.एल (इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिपसी) तकनीक इसी वर्ष भारत में आयी है और गीतांजली हॉस्पिटल में इस तकनीक द्वारा सफल इलाज सम्पूर्ण दक्षिण राजस्थान के लिए गर्व की बात है। गीतांजली हॉस्पिटल का उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकों द्वारा दूर- दूर से आने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लाभान्वित करना है ।

गीतांजली मेडिसिटी पिछले 13 वर्षों से निरन्तर मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में सेवाएं देकर विश्वसनीय चिकित्सा सेंटर बन चुका है, यहाँ एक ही छत के नीचे जटिल से जटिल ऑपरेशन एवं प्रक्रियाएं कुशल डॉक्टर्स द्वारा की जा रही हैं। गीतांजली हृदय रोग विभाग की अनुभवी टीम द्वारा मरीज की समस्या के अनुरूप उपचार प्रक्रिया का निर्णय कर सर्वोत्तम इलाज मुहैया करवाना उत्कृष्टता का परिचायक है।
 

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