कश्मीर की वादियों के गीत अरावली में गूंजे


कश्मीर की वादियों के गीत अरावली में गूंजे

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ में मुक्ताकशी रंगमंच ‘‘कलांगन’’ पर मंगलवार शाम लोक कलाओं और हास्य का अनूठा मिश्रण देखने को मिला। एक ओर जहां केसर की वादियों के गीत अरावली की उपत्यकाओं में गूजा वहीं हास्य कलाकारों ने दर्शक दीर्घा में हंसी के फव्वारे छुड़वा दिये।

 
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कश्मीर की वादियों के गीत अरावली में गूंजे

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय ‘‘शिल्पग्राम उत्सव’’ में मुक्ताकशी रंगमंच ‘‘कलांगन’’ पर मंगलवार शाम लोक कलाओं और हास्य का अनूठा मिश्रण देखने को मिला। एक ओर जहां केसर की वादियों के गीत अरावली की उपत्यकाओं में गूजा वहीं हास्य कलाकारों ने दर्शक दीर्घा में हंसी के फव्वारे छुड़वा दिये।

उत्सव की पांचवी सांझ की शुरूआत लंगा कलाकारों के गायन से हुई इसके बाद बेड़ा रास कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। नटुवा और गोटीपुवा की जोश व करिश्मों से भरपूर प्रस्तुतियों ने दर्शकों में रोमांच सा भर दिया वहीं कश्मीर की वादियों से आये ‘‘रौफ’’ नृत्य में ‘‘भुम्बरो भुम्बरों गीत’’ की मधुर सवर लहरियों पर कश्मीरी बालाओं ने अपने राज्य में मनाये जाने वाले उत्सवों में खुशी मनाते हुए किया जाता है।

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कार्यक्रम में ओडिशा के संबलपुर से आये कलाकारों ने संबलपुरी नृत्य में वहां मनाये जाने वाले त्यौहारों को सतरंगा स्वरूप दर्शाया। उत्सव के पांचवे दिन के कार्यक्रम में हास्य कलाकारों के कार्यक्रम दर्शकों को खूब रास आये। जयपुर के कलाकार सौरभ भट्ट व उनके साथियों ने नाटिका ‘‘भोपाल की ट्रेन’’ में दर्शकों को भरपूर हंसाया। वहीं अहमदाबाद के मिमिक्री कलाकार हेमंत खरसाणी उर्फ चीका भाई ने अपनी मिमिक्री में श्वानों की मीटिंग को अनूठे अंदाज में प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

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कार्यक्रम में महाराष्ट्र का रोप मल्लखम्भ दर्शकों के लिये रोमांचकारी प्रस्तुति रही जिसमें काष्ठ स्तम्भ पर कलाकारों ने विभिन्न प्रकार के योग प्रदर्शन के साथ-साथ दैहिक भंगिमाओं का प्रदर्शन श्रेष्ठ ढंग से किया। गोवा के कलाकारों ने देखणी नृत्य में अपनी अनूठी परंपरा को दर्शाया जिसमें महिलाएं नाविक से नदी पार करवाने का अनुनय करती है और इसके लिये वे उसे कई प्रकार के प्रलोभन व इनाम देने का वादा करती है। ‘‘हंव साहेबा फळतड़ी वेईता…’’ गीत की धुन ने बाॅबी फिल्म की लोकप्रिय धुन की याद दिला दी।

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कार्यक्रम में इसके अलावा झारखण्ड का पाईका नृत्य, छत्तीसगढ़ का गौंड मारिया, राजस्थान का सहरिया स्वांग, मध्यप्रदेश का बधाई नृत्य व गुजरात का राठवा नृत्य उल्लेखनीय प्रस्तुतियाँ रही।

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इससे पूर्व मंगलवार को दोपहर से ही बड़ी संख्या में लोग शिल्पग्राम पहुंचे तथा हाट बाजार में कलात्मक वस्तुओं लैदर बैग्स, वूलन शाॅल्स, राजपूती परिधान, कशीदाकारी युक्त परिधान व डेकोरेटिव्स, धातु की बने कलात्मक फ्लाॅवर पाॅट, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, नारियल के छिलकों से बनी कलात्मक वस्तुएँ, जूट के बैग्स, पंजाबी जुत्तियां, मोजड़ियाँ, गर्म जैकेट, स्वेटर आदि की खरीददारी की। शाम को शिल्पग्राम के हाट बाजार में लोगों की खासी रौनक हो गई तथा लोगों ने कलाकारों के साथ सेल्फी खिंचवाने के साथ शिल्पग्राम परिसर मेें यत्र तत्र लगाये गये स्कल्पचर्स के साथ फोटुएं खिचवाने का आनन्द उठाया। शाम को खान-पान के स्टाॅल्स पर भी लोगों की खासी भीड़ रही। पिकनिक या सैर सपाटे के लिये निकले लोग देर शाम तक व्यंजनों के स्टाॅल्स पर विभिन्न खाद्य वस्तुओं का रसास्वादन करते नजर आये।

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पार्किंग शुल्क

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान ने मेले में आगंतुकों को असुविधा से बचने के लिये वाहन शेयर करके आने अथवा सार्वजनिक यातायात व्यवस्था का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि केन्द्र के परिसर में वाहनों की पार्किंग हेतु दरों में चार पहिया वाहन की दर रूपये 20/- तथा दुपहिया वाहन की दर रूपये 10/- प्रति वाहन निर्धारित कर रखी है। उन्होंने आगंतुकों से अपील की है कि यदि पार्किंग का कोई ज्यादा शुल्क वसूल करें तो शिल्पग्राम के कंट्रोल रूम में इसकी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

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