साकरोदा की महिलाओं ने ई-आॅटों संचालन को बनाया रोजगार का जरिया

साकरोदा की महिलाओं ने ई-आॅटों संचालन को बनाया रोजगार का जरिया

देश महिला स्वावलम्बन की और लगातार आगे बढ रहा है। महिलाएं अब पुरुषो से किसी भी मामले मे कम नही है और यह साबित किया है साकरोदा गांव की पर्यावरण सखियो ने। विश्व पर्यावरण दिवस के दिन से ई-आॅटो चलाना सीख रही महिलाएं अब स्वयं ई- आॅटो की मालकिन बन गई है और अपने गांव मे पर्यावरण को संरक्षित रखने के साथ ही ई- आॅटो चलाकर रोजगार से भी जुड चुकी है। इन महिलाओ मे आत्मविश्वास की एक अलख जगी है और इन्होने ई-आॅटों संचालन को रोजगार का जरिया बनाया है।

 
साकरोदा की महिलाओं ने ई-आॅटों संचालन को बनाया रोजगार का जरिया

देश महिला स्वावलम्बन की और लगातार आगे बढ रहा है। महिलाएं अब पुरुषो से किसी भी मामले मे कम नही है और यह साबित किया है साकरोदा गांव की पर्यावरण सखियो ने। विश्व पर्यावरण दिवस के दिन से ई-आॅटो चलाना सीख रही महिलाएं अब स्वयं ई- आॅटो की मालकिन बन गई है और अपने गांव मे पर्यावरण को संरक्षित रखने के साथ ही ई- आॅटो चलाकर रोजगार से भी जुड चुकी है। इन महिलाओ मे आत्मविश्वास की एक अलख जगी है और इन्होने ई-आॅटों संचालन को रोजगार का जरिया बनाया है।

साकरोदा गांव के हनुमान वन विकास समिति से जुडी इन पर्यावरण सखियों को किसान एंड सोलर संस्था द्वारा 10 दिन का प्रशिक्षण दिया गया। जिसके बाद 6 महिलाओं को गुरूवार को साकरोदा मे आयोजित ई- आॅटो लाॅचिंग कार्यक्रम के दौरान राजस्थान मरूधरा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन एस. पी. श्रीमाली, एमपीयूटी के कुलपति प्रो. उमा शंकर शर्मा , महाप्रबंधक अशोक पारिक, क्षैत्रीय प्रबंधक कमल सक्सेना, वरिष्ठ प्रबंधक चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, शाखा प्रबंधक पारसमल लोढा, जैविक कृषि वैज्ञानिक डाॅ. लतीका व्यास, हनुमान वन विकास समिति के संस्थापक राजकिरण यादव, किसान एंड सोलर के सुनीता शर्मा, श्रवण कुमार व कोमल मेहता द्वारा चाबी सौंप कर रोजगार से जोडा गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मरूधरा बैंक के चेयरमैन एस.पी. श्रीमाली ने महिलाओं के जन समूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि महिलाएं अब चूल्हे-चौके, खेती, रसोई के कामो से बाहर आये और समूह के रूप मे काम करते हुए देश मे एक उदाहरण प्रस्तुत करे। श्रीमाली ने कहा कि कृषि मे भी कई नवीन तकनीके उपलब्ध है जिनकी भी जानकारी ले और समझे की जो टमाटर 10 रूपये किलो बिकते है, उन्ही को सुखाकर बनाया गया पाउडर 200 रूपये किलो और टमाटो केचअप भी करीब 200 रूपये लीटर बिकता है इस दिशा मे सोचते हुए व्यवसाय करे।

साकरोदा की महिलाओं ने ई-आॅटों संचालन को बनाया रोजगार का जरिया

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमपीयूटी के कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने कहा कि विश्विद्यालय के प्रसार निदेशालय मे महिलाओं के लिए सिलाई, कढ़ाई, कई तरह के उत्पाद बनाना, मछली पालन, दूध से जुडे उत्पादो का निर्माण, जैविक खेती, मक्की से पास्ता व अन्य खाद्य उत्पाद, अचार मुरब्बे बनाना, फल संरक्षण, सीताफल के पल्प से अनेक खाद्य पदार्थो को तैयार करना आदि सिखाया जाता है। ऐसे मे महिलाओं को इन सभी प्रशिक्षण का लाभ लेना चाहिये जिनसे उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर मे बदलाव आये।

कार्यक्रम मे हनुमान विकास समिति के विभिन्न स्व्यं सहायता समूह की अध्यक्ष, महामंत्री और कोषाध्यक्ष सहित सैंकड़ो की तादात मे महिलाएं उपस्थित रही। इस दौरान महिलाओं ने अपने ग्रामीण संस्कृति को प्रस्तुत करते हुए लोक गीत भी गाये और पर्यावरण सखियों ने गणेश वंदना भी प्रस्तुत की।

11 समूहो को 26 लाख का ऋण

पर्यावरण सखियो को ई- आॅटो देने के कार्यक्रम से पूर्व सभी अतिथियों द्वारा मरूधरा ग्रामीण बैंक की साकरोदा शाखा के नवीन परिसर का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही बैंक के चेयरमैन ने एस.पी. श्रीमाली द्वारा हनुमान वन विकास समिति के 11 स्वयं सहायता समूह को 26 लाख रूपये का ऋण वितरिण किया।

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