तीन रंगारंग नाट्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ नाट्य कार्यशाला – तराश 2018 का समापन


तीन रंगारंग नाट्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ नाट्य कार्यशाला – तराश 2018 का समापन

नाट्यांश सोसायटी आॅफ ड्रामेटिक एण्ड परर्फोमिंग आर्ट्स पिछले पाँच सालों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इन पाँच सालों में संस्थान ने जन जागरूकता के लिये कई सामाजिक मुद्दों पर शहर में और शहर के आसपास नुक्कड नाटकों और पुर्णांकि नाटको का मंचन किया है। संस्थान अपने स्थापना वर्ष से ही नारित्व को सर्मपित राजस्थान का पहला और एकमात्र नाट्य महोत्सव अल्फ़ाज़ का आयोजन करता आ रहा है। साथ ही संस्थान रंगमंच और कला क्षेत्र से आम जन और आने वाली पिढ़ी को जोडने के लिये प्रतिवर्ष कई कार्यशालाओं का आयोजन भी करती है।

 
तीन रंगारंग नाट्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ नाट्य कार्यशाला – तराश 2018 का समापन

नाट्यांश सोसायटी आॅफ ड्रामेटिक एण्ड परर्फोमिंग आर्ट्स पिछले पाँच सालों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इन पाँच सालों में संस्थान ने जन जागरूकता के लिये कई सामाजिक मुद्दों पर शहर में और शहर के आसपास नुक्कड नाटकों और पुर्णांकि नाटको का मंचन किया है। संस्थान अपने स्थापना वर्ष से ही नारित्व को सर्मपित राजस्थान का पहला और एकमात्र नाट्य महोत्सव अल्फ़ाज़ का आयोजन करता आ रहा है। साथ ही संस्थान रंगमंच और कला क्षेत्र से आम जन और आने वाली पिढ़ी को जोडने के लिये प्रतिवर्ष कई कार्यशालाओं का आयोजन भी करती है।

इस तरह की सभी कार्यशाओं में कला को लोगो तक पहुचाने के साथ ही साथ व्यक्तित्व विकास और जीवन को जीने के कौशल पर भी काम किया जाता है। सभी लोग चाहते है इस प्रकार की कार्यशाला में भाग लेना परन्तु अत्यधिक शुल्क होने के कारण से भाग नही ले पाते है। इस बात को ध्यान में रखते हुये इस वर्ष की कार्यशाला का आयोजन निःशुल्क रखा गया।

कार्यशाला में बच्चों के साथ उनके शब्द उच्चारण, शारिरिक अभिनय, संवाद अदायगी, भावनात्मक, संज्ञानात्मक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि कौशल और कल्पनाओं के विकास पर कार्य किया गया। शहर के तीन अलग-अलग स्थानो पर चल रही इस कार्यशाला में दो लघु नाटक और एक पुर्णांकि नाटक तैयार किया गया।

 

इस प्रस्तुति में लगभग सभी प्रतिभागी पहली बार मंच पर आये थे। साथ ही कई प्रतिभागी एसे बच्चें भी थे जो नियमित रूप से स्कुल भी नही जा पाते है। इस कोशिश में राॅबिनहुड आर्मी ने भी सहयोग किया जो कि इन बच्चों को बंजारा बस्ती में जा कर पढ़ाती है और जतन संस्थान जिनका एक केन्द्र देवाली के बच्चों को शिक्षित करने में अग्रसर है।

तीन रंगारंग नाट्य प्रस्तुतियों के साथ हुआ नाट्य कार्यशाला – तराश 2018 का समापन

कार्यक्रम की शुरूआत में छोटे प्रतिभागीयों के दोनो लघु नाटकों क्रमशः ‘अपराध’ और ‘कुरितीयों की क्लास’ का मंचन किया गया। जिसको सभी की तरफ से काफी सराहना मिली। तदपश्चात बडे प्रतिभागीयों का पुर्णांकि नाटक ‘किस्सा मौजपुर का’ का मंचन किया गया। मंचन के दौरान किसी तकनिकी खराबी के चलते पुरे इलाके की बिजली चली गयी। जिससे मंच पर अन्धेरा होने से नाटक रूक सा गया। परन्तु इस पर भी कलाकारों ने अपना मनोबल नही खोया और कुछ समय इन्तजार करने पर भी जब बिजली नही आई तो सह कलाकारों ने अपने मोबाईल की लाईटो से मंच को रोशन किया और नाटक पुनः पुर्वतया मंचित होने लगा। तकरिबन 20-25 मिनिट के पश्चात बिजली व्यवस्था पुनः सुचारू रूप से चल सकी। कलाकारो के ‘‘शो मस्ट गो आॅन’’ के इस प्रयास का दर्शको ने करतल ध्वनी से प्रोत्साहित किया।

नाटको की प्रस्तुतियाँ निम्न प्रकार रही –

प्रथम प्रस्तुति मनवाखेडा, बंजारा बस्ती के प्रतिभगीयों ने दी। नाटक ‘‘अपराध’’ मे बच्चों ने दिखाया कि कैसे डिजिटल इंडिया के युग में भी हमारा देश कई कुरीतियों से जकड़ा हुआ है। कहने को तो हम उन्नति की ओर अग्रसर है लेकिन आज भी अवाम का बहुत बड़ा हिस्सा शिक्षा और प्रगति से वंचित है। उन्हीं कुरीतियों में से एक है ‘‘बाल विवाह’’ यानि कम उम्र में शादी करवाना। नाटक अपराध बाल विवाह पर आधारित है जिसमें किस तरह से बच्चों की पढ़ाई छुड़वाकर, उन्हें शिक्षा से दूर रखकर उनकी शादी का फैसला लिया जाता है। नाटक बाल विवाह पर कटाक्ष के साथ साथ, दहेज प्रथा, पढ़ाई का अधिकार और शराब पीकर गाडी न चलने के बारे में भी जागरूक करता है। इस नाटक का लेखन और निर्देशन मोहम्मद रिजवान मंसूरी ने किया। कलाकारों में तारा बंजारा, प्रेम बंजारा, अनिता बंजारा, काजल बंजारा, कमलेश बंजारा, विक्रम बंजारा, माया बंजारा, काजल बंजारा, कंकु बंजारा, सपना बंजारा, कालू बंजारा, महेंद्र बंजारा, राहुल बंजारा, सीमा बंजारा, राहुल बंजारा और काजल बंजारा ने अभिनय किया।

द्वितीय प्रस्तुति में नाटक ‘‘कुरीतियों की क्लास’’ की रही। यह नाटक निमचखेडा के बच्चो द्वारा तैयार किया गया। नाटक में दिखाया कि हमारा देश विकासशील देश है और कई मामलों में दूसरे देशों से आगे निकल गया है। परंतु बड़ी-बड़ी उपलब्धियों में हम छोटी-छोटी बातें नजरअंदाज कर देते है। ऐसे बातों में है हमारे समाज की वो कुरीतियां जिसे हम देखकर भी अनदेखा कर देते है। नाटक में कुछ ऐसी ही कुरीतियों के बारे में बताया गया है जिसके चलते हम बच्चों को शिक्षा से दूर कर देते है। लड़के और लड़की के बीच भेदभाव को बढ़ावा देते है। सरकार ने नियम तो बनाये है मगर इनकी धज्जियां उड़ानें में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है। नाटक कुरीतियों की क्लास में इन्ही कुरीतियों पर जमकर कटाक्ष करते हुए इनकी क्लास लगायी है। नाटक का लेखन मोहम्मद रिजवान मंसूरी ने किया और निर्देशन हार्दिक नागदा का रहा। कलाकारों में शुभम राजपूत, कृतिका कुमावत, जयंत पालीवाल, दीपक गमेती, कृतिका कुमावत, खुशी गमेती, जसोदा मीणा, कुसुम गमेती, महिमा कुमावत, कल्पना चारण, निशा गमेती, निधि कुमावत, तनीषा कुवर, हेमलता गमेती, रेशमा गमेती, हर्षवर्धन गमेती, गजेंद्र गमेती, नवीन भोई, जया कुवर राजपूत, चेतन साल्वी और जय मीणा ने अभिनय कर सब का मन मोह लिया।

शाम की तीसरी और आखिरी प्रस्तुति में कलाकारों ने पुर्णांकि नाटक ‘‘किस्सा मौजपुर का’’ का मंचन किया। यह नाटक बताता है कि किस प्रकार से मानव द्वारा मानव के लिए बनाये गए आविष्कारों का इस्तेमाल हम लोग मानव और मानवता के नाश के लिए कर रहे है। हमारे समाज में व्याप्त कन्या भ्रुण हत्या और लड़का-लड़की में भेदभाव को किस तरह विज्ञान के अविष्कार बढ़ावा देते है। पहले जन्म के बाद अलग अलग तरीको से कन्या शिशु को समाप्त किया जाता था और अब विज्ञान के विभीन्न तकनीको के प्रयोग से कन्या को पैदा ही नहीं होने दिया जा रहा है। चूँकि लोग समाज में व्याप्त कन्या के साथ जन्म से लेकर उसकी शादी और मृत्यु तक के भेदभाव से परिचित है जो कि हमारे समाज की ही देन है तो इससे बचने के लिए लोग कन्या को पैदा ही नहीं होने देना चाहते। नाटक के लेखक सुप्रसिद्ध लेखक और रंग निर्देशक जयवर्धन ने किया और निर्देशन अब्दुल मुबीन खान पठान का रहा।

कलाकारों में अभिमन्यु सिंह, अनिता अग्रवाल, भावेश जोशी, भव्या राठौड़, भुवि माहेश्वरी, दीपक जोशी, देव्यानी करवा, दिव्या राठौड़, हरीश चंद्र मालवी, हिमाक्षी छतलानी, हितेश कुमार, जीत नेभननी, कृतार्थ अग्रवाल, मीनाक्षी जोशी, नविका तलरेजा, राघव गुर्जरगौड़, रायना तलरेजा, सत्यजीत सिंह करवर, शंकर गायरी, शिवानी जोशी, श्रीमयी एम निर्मल, मोहम्मद तन्जिम, वैभव सिंह, वल्लभ शर्मा अर्जुन सभरवाल, दर्शिल, संदीप कुमावत, अगस्त्य हार्दिक नागदा, मोहन शिवतारे, रक्षित आनंद और अमित श्रीमाली ने अपने अभिनय कौशल से दर्शको का मनोरंजन किया।

तीनों नाटको के मंचन के लिये अखिल नायर, आमिर अली, अजय शर्मा, अमित श्रीमाली, अशफाक नुर खान, चक्षु सिंह, हेमंत आमेटा, अगस्त्य हार्दिक नागदा, जतिन भारवानी, कुलश्रेष्ठ सिसोदिया, महेश जोशी, मोहन शिवतारे, मिलिंद पुरोहित, ऋषभ यादव, रक्षित आनंद, राघव गुर्जरगौड़, वेदांग साईखेड़कर, अकांक्षा द्विवेदी, डिंपल खत्री, गीत गोदवत, खुशबू खत्री, कुमुद द्विवेदी, मनीषा शर्मा, नाइल शेख़, नेहा पुरोहित, पूजा शर्मा, पलक कायथ, रेखा सिसोदिया, योगिता सिसोदिया और युसरा फातिमा का भी सहयोग प्राप्त हुआ।

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कार्यक्रम के अन्त में कैलाश बृजवासी, जतन संस्थान, अनिल जी जोगलेकर, महाराष्ट्र समाज और अशफाक नुर खान, नाट्यांश संस्थान ने सभी प्रतिभागीयो, कलाकारों और सह-कलाकारों को प्रशस्ति प्रत्र प्रदान किये गये। कार्यशाला के संयोजक और नाटक के निर्देशक अब्दुल मुबीन खान ने कार्यक्रम के अंत में महाराष्ट्र समाज भवन, जतन संस्थान उदयपुर और राॅबिनहुड आर्मी उदयपुर का आभार व्यक्त किया जिन्होने कार्यशाला को आयोजित करने के लिये स्थान उपलब्ध करवाया।

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