शालादर्पण पर ऑनलाइन उपस्थिति आदेश का होगा राज्यव्यापी विरोध


शालादर्पण पर ऑनलाइन उपस्थिति आदेश का होगा राज्यव्यापी विरोध 

राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत करेगा राज्यव्यापी विरोध
 
शालादर्पण पर ऑनलाइन उपस्थिति आदेश का होगा राज्यव्यापी विरोध
राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा हाल ही में लिए गए निर्णय के अनुसार माध्यमिक शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता ने एक आदेश जारी कर समस्त राजस्थान के विद्यालयों में शिक्षकों के लिए शाला दर्पण पर ऑनलाइन उपस्थिति का निर्णय पारित किया है। 
 

उदयपुर 22 जनवरी 2020 । राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा हाल ही में लिए गए निर्णय के अनुसार माध्यमिक शिक्षा निदेशक हिमांशु गुप्ता ने एक आदेश जारी कर समस्त राजस्थान के विद्यालयों में शिक्षकों के लिए शाला दर्पण पर ऑनलाइन उपस्थिति का निर्णय पारित किया है। 

इस संबंध में राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गिरिराज शर्मा एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी राव गोपाल सिंह आसोलिया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से मांग की है कि पहले विद्यालयों में पूर्ण संसाधन उपलब्ध करवाए फिर इस प्रकार की व्यवस्था को लागू किया जाए।

उन्होंने बताया कि कही कंप्यूटर शिक्षक के अभाव में विद्यालय के कंप्यूटर धूल चाट रहे हैं। शाला दर्पण की साइट हमेशा ओवरलोड रहती है जिस पर परीक्षा परिणाम, छात्रवृत्ति एवं अन्य ऑनलाइन कार्य किए जा रहे है। इससे पोर्टल की गति पहले की अपेक्षा और भी धीमी हो गई है। इसके अतिरिक्त अधिकांश विद्यालय आदिवासी अंचल में स्थित है, जहां पर्याप्त विद्युत की आपूर्ति भी नहीं होती वहां इंटरनेट की व्यवस्था हथेली पर सरसों उगाने की तरह है।

इन अव्यवस्थाओ और असुविधाओं के चलते प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जिलों से यह समस्या सामने आ रही है कि नेटवर्क तलाशने के लिए अध्यापकों को विद्यालयों को क्षतिग्रस्त छतों, समीप के पेड़ों और पहाड़ियों पर चढ़ना पड रहा है। ऐसे में काई अप्रिय घटना घटित होती है तो इसकी समस्त जिम्मेदारी प्रदेश की सरकार व शिक्षा मंत्री की होगी। 

वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश शिक्षक पंचायतीराज चुनाव में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं वहीं दूसरी और उनके लिए यह एक नई चिंता का विषय खड़ा कर दिया गया है। इससे शाला दर्पण की साइट पूरी तरह से ब्लॉक हो जाएगी। राजस्थान के समस्त संस्था प्रधानों पर अविश्वास जताते हुए संस्था प्रधान के लिए एक और अतिरिक्त दायित्व बढ़ा दिया गया है। 

जहां एक और विद्यालय में पहुंचने के लिए पर्याप्त आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं है, सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, सरकार महंगाई भत्ते की किस्त चुकाने में नाकामयाब है। वही विद्यालयों में जर्जर स्कूल भवन में पढ़ने के लिए छात्र मजबूर हैं लेकिन शिक्षा मंत्री की हठधर्मिता के कारण यह एक और अनावश्यक जिम्मेदारी शिक्षकों को आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। अतः संगठन की मांग है कि इस व्यवस्था को स्थगित रखा जाए तथा भविष्य के लिए पूरी तरह से निरस्त किया जाए अन्यथा संगठन राज्यव्यापी विरोध करेगा।

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