गुलाब बाग में ट्री थैरेपी का शुभारम्भ
जिला कलक्टर बिष्णु चरण मल्लिक द्वारा शहर के मध्य स्थित आॅक्सीजन बैंक के रूप में स्थित गुलाब बाग में गांधी जयंती की 150 वीं वर्षगांठ पर ‘‘ट्री थैरेपी (वृक्षों से चिकित्साद्ध) पद्धति को जीवनशैली में सम्मिलित करने की पहल का शुभारम्भ किया जाएगा। इस संबंध में आम नागरिकों को इसकी जानकारी दी जा रही है जैसा कि अभी

जिला कलक्टर बिष्णु चरण मल्लिक द्वारा शहर के मध्य स्थित आॅक्सीजन बैंक के रूप में स्थित गुलाब बाग में गांधी जयंती की 150 वीं वर्षगांठ पर ‘‘ट्री थैरेपी (वृक्षों से चिकित्साद्ध) पद्धति को जीवनशैली में सम्मिलित करने की पहल का शुभारम्भ किया जाएगा। इस संबंध में आम नागरिकों को इसकी जानकारी दी जा रही है जैसा कि अभी तक वृक्षों से मिलने वाले परिचित लाभों के अतिरिक्त यह वृक्षों के लाभ का एक नया आयाम है जो कि आने वाले समय में मानव व वनस्पति जगत परस्पर सहयोग को परिभाषित करेगा।
उप वन संरक्षक ओ.पी.शर्मा ने बताया कि ‘‘फोरेस्ट थैरेपी’’ पद्धति जापान जैसे देश में सन् 1980 से एक जाना पहचाना नाम है तथा वहाँ पर 62 इस प्रकार की साइट्स चिन्ह्ति कर वहाँ का आम नागरिक इस पद्वति से शारीरिक एवं मानसिक लाभ ले रहा है। इस पद्धति के अन्तर्गत शांत जंगल में नंगे पैर पैदल चलना, जंगल की आवाज को सुनना, वहाँ की प्राकृतिक गंध को महसूस करना तथा पेडों को अपनी बाहों में लेकर उसके कम्पन्न महसूस करना आदि क्रियाए सम्मिलित है।
इस पद्धति से शरीर में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रिया होती है जिससे तनाव कम होना, रक्तचाप कम होना, एक गहरी शांति और खुशी प्राप्त होती हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा अवसाद कम होता है। इस प्रक्रिया को जापान में ‘‘शिनरिन-योकु’’ या ‘‘फोरेस्ट बाथिंग’’ नाम से जाना जाता हैं।
कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि इन प्रक्रियाओं का प्रभाव वृक्षों से निकलने वाले फोटोनसाईट्स अणुओं के कारण होता है जिसे त्वचा एंव श्वसन तंत्र द्वारा शरीर ग्रहण करता है। मौस एवं लाईकिन आदि से होने वाले नुकसान से बचने के लिए ये वृक्ष कुछ विशेष प्रकार के तेल/रेजिएन इत्यादि निकालते है जिनके प्रभाव से मानव शरीर को उपरोक्त लाभ मिलते है।
यह कार्यक्रम गुलाब बाग में गांधी जी के सर्वधर्म प्रार्थना कार्यक्रम के पश्चात् किया जायेगा जिसमें शहर के जनप्रतिनिधिगण, प्रातः भ्रमण पर आने वाले, प्रशासनिक अधिकारी, वन अधिकारी, नगर निगम अधिकारी, विद्यार्थी इत्यादि भाग लेंगे। वर्तमान में पिृत पक्ष चल रहा है। अतः पिृतों के स्मृति में गुलाब बाग में नगर निगम के सौजन्य से ‘‘पिृत वन’’ के रूप में पौधारोपण का कार्यक्रम भी रखा गया है।
