दो दिवसीय जिला उद्यम समागम कार्यक्रम प्रारम्भ

दो दिवसीय जिला उद्यम समागम कार्यक्रम प्रारम्भ
 

छोटे एवं परम्परागत उद्योगों को बढ़ावा देना होगाःगिरिजा व्यास
 
 
दो दिवसीय जिला उद्यम समागम कार्यक्रम प्रारम्भ

उदयपुर 3 मार्च 2020। जिला प्रशासन, जिला उद्योग केन्द्र एवं एम.एस.एम.ई. विभाग भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में आज से दो दिवसीय जिला उद्यम समागम कार्यक्रम रेती स्टेण्ड स्थित ग्रामीण हाट में प्रारम्भ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व केन्द्रीय उप मंत्री डाॅ. गिरिजा व्यास ने किया।

इस अवसर पर डाॅ. व्यास ने कहा कि ग्रामीण हाट को बढ़़ावा देते हुए हमें छोटे,मझले एवं परम्परागत उद्योग को बढ़ावा देना होगा,केवल सरकार को दोष नहीं दिया जाना चाहिये। हमें स्वावलम्बन की ओर कदम बढ़ाना होगा। उदयपुर क्षेत्र में आर्थिक दृष्टि से कमजोर छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये हमें सामूहिक प्रयास करना होगा। 

इस अवसर पर बुनकर संघ के प्रबन्ध निदेशक आर.के. आमेरिया ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये सिंगल विन्डो प्रारम्भ किया है। इस विन्डो से उद्योग लगानें की अनुमति शीघ्र मिल जायेगी और तीन साल तक कोेई अधिकारी आपके उद्येाग में नहीं आयेगा लेकिन तीन वर्ष बाद आपको उद्योग लगानें की सभी औपचारिकता पूर्ण करनी होगी। उन्होंने कहा कि गत 1 वर्ष के दौरान एमएसएमई के तहत उद्योग लगाने के लिये पूर्णतया अनुकूल माहौल तैयार हुआ है और इसके तहत उद्योग लगाने के लिये 10 करोड़़ तक का ऋण मिल सकता है। उदयपुर में खनिज,पर्यटन एवं हस्तशिल्प पर कार्य किया जायेगा। 

समारोह को संबोधित करते हुए यूसीसीआई अध्यक्ष रमेश सिंघवी ने कहा कि सरकार की सभी योजनाओ को संबधित उद्यमियेां तक पंहुचानें में चेम्बर सहयोग करता है। उद्योग लगानें के ईच्छुक अभ्यर्थियों को हर संभव चेम्बर की ओर से सहायता उपलब्ध करायी जाती है। चेम्बर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने के लिये सदैव करता रहा है।

इस अवसर पर पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया ने कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये चलायें जा रहे कार्यक्रमों का सकारात्मक असर आगामी 5 वर्षो के दौरान देखनें को मिलेगा। 

ऋण वितरीत किये -  समारोह में अतिथियो ने जिला उद्योग केन्द्र की ओर से आवेदनकर्ता मीना देवी मीणा को 3 लाख और भारत भूषण श्रीमाली को 1 लाख का ऋण वितरीत किया।

एमएसएमई अवज्ञार्ड दिये गये - समारेाह में अतिथियों ने किशोर मीणा, परशुराम मीणा, दीया माहेश्वरी, भावेश चित्तौड़ा, खानम सायमा, उम्मे सलमा बोहरा, स्नेहा भाणावत को एमएसएमई अवार्ड से सम्मानित किया।

प्रारम्भ में जिला उद्येाग केन्द्र की महाप्रबन्धक अरूणा शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया एवं जिला उद्योग केन्द्र की ओर से उपल्बध करायी जा रही योजनाओं की जानकारियां दी। मंगलवार से प्रारम्भ हुए जिला उद्यम समागम 2020 में पहले ही दिन कई नवाचार देखने को मिले। यहां पर लगी प्रदर्शनी में कई वस्तुएं ऐसी भी बिकने  आई है जो उदयपुर में पहले कभी नहीं आई। यह घरेलु वस्तुएं या आईटम उदयपुर शहर के लोगों के लिए एक अजूबा ही है।

राजसमन्द से आये मेटल पर मीनाकारी करने के महारथी किशन लौहार ने बताया कि उनके पास कई ऐसे आयटम हैं जिन्हें उदयपुरवासी पहली बार यहां पर देखेंगे। उनका दावा है कि वह केवल देखेंगे ही नहीं उन्हें खरीदे बिना नहीं रहेंगे। उनके पास लालन (कृष्ण का बाल रूप) के ढेर सारे खिलौने, ठाकुरजी को सजाने - संवारने से लेकर उनकी आरती करने और उनके मन्दिर के अन्दर- बाहर लगाने के कई तरह के आयटम, ऊंट, हाथी, घोड़े, मोर के साथ ही कॉपर पर मेटल कर खूबसूरत वर्क किये हुए घड़े, ग्लास के साथ कई तरह के बर्तन उपलब्ध हैं। मेटल पर मीनाकारी का यह आकर्षक वर्क सारा हाथ से ही होता है। मशीन का इसमें कोई काम नहीं है।

सेक्टर- 14 उदयपुर से आईं एडीटेडी कम्पनी चलाने वाली भारती सिसोदिया भी ढेर सारे टॉयस खिलौने लेकर प्रदर्शनी में आई हैं। उनका दावा है कि उनके पास उनके खुद के बने हुए जो भी टॉयज हैं वह केवल और केवल उदयपुर में ही मिलते हैं हिन्दुस्तान में और कहीं पर भी नहीं मिलेंगे क्योंकि यह शुद्ध रूप से उनका ही प्रोडक्ट है। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली से कपड़े का थान लाते हैं जिसे कपड़ा कहते हैं। यहां लाकर उसकी अपने हिसाब से कटिंग कर उसे शेप देते हैं। उनकी कटाई से लेकर सिलाई तक सब हाथों से ही होती है। मशीन का कोई काम नहीं होता है। उनके हाथ से बनाये गये खिलौनों में हाथी, घोड़े, ऊंट, कुत्ते के बच्चे, बिल्ली, बन्दर, भालू आदि ऐसे कई आयटम हैं जिनसे बच्चों का मनोरंजन होता है। उनकी कम्पनी में कई जरूरतमन्द महिलाओं को रोजगार मिला हुआ है। एक महिला 9 हजार रूपए तक उनके यहां से कमा लेती है अगर वह पूरा समय काम करती है। जो अपनी सुविधानुसार समय देकर काम करती है वह भी 200 से 300 रूपए तक उनके यहां से कमा लेती है। उनके पास 100 रूपए से लेकर 1000 रू. तक के आयटम हैं।

इसी तरह कर्नाटक से पहली बार उदयपुर ग्रामीण हाट में आये योगेया ने बताया कि उनके पास ऐसी खुशबूदार अगर बत्तियां हैं जो उदयपुर में कहीं पर भी नहीं मिलती है। हालांकि यह चन्दन की नहीं है यह सामरानी पेड़ की लकड़ी की अगरबत्तियां है। इनकी खुशबू इतनी कमाल की है कि जब यह जलती है तो कभी दूर तक इनकी खुशबू फैलती है और खुशबू इतनी प्यारी होती है कि हर कोई इनकी और खींचा चला आता है। इनके अलावा उनके पास बॉडी पाउडर, 
विभिन्न प्रकार के साबुन भी हैं जो कि बिना केमिकल के एकदम शुद्धता से बनाए हुए हैं। यह भी खुशबूदार हैं और इनसे किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है।

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