उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट ST आरक्षित सीट पर पांच बार भाजपा, चार बार कांग्रेस का कब्ज़ा


उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट ST आरक्षित सीट पर पांच बार भाजपा, चार बार कांग्रेस का कब्ज़ा

उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर हमेशा से दोनों दलों के बीच ही मुकाबला होता आया है। 1977 में पहली बार इस सीट पर चुनाव हुए थे। जिसमे जनता पार्टी (जेपी) के टिकट पर नन्द लाल मीणा ने कांग्रेस के जयनारायण को हराया था। सन 1977 से पहले यह विधानसभा क्षेत्र विभिन्न क्षेत्रो में बंटा हुआ था। 1977 में इस क्षेत्र को विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया। तब से लेकर (1977) से 2013 तक इस सीट से 9 बार चुनाव हुए है जिसमे भाजपा (एक बार जनता पार्टी जेपी के बैनर पर) ने पांच बार जबकि कांग्रेस ने चार बार प्रतिनिधित्व किया है। कांग्रेस की ओर से कटारा परिवार ने तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

 

उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट ST आरक्षित सीट पर पांच बार भाजपा, चार बार कांग्रेस का कब्ज़ा

उदयपुर ग्रामीण विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर हमेशा से दोनों दलों के बीच ही मुकाबला होता आया है। 1977 में पहली बार इस सीट पर चुनाव हुए थे। जिसमे जनता पार्टी (जेपी) के टिकट पर नन्द लाल मीणा ने कांग्रेस के जयनारायण को हराया था। सन 1977 से पहले यह विधानसभा क्षेत्र विभिन्न क्षेत्रो में बंटा हुआ था। 1977 में इस क्षेत्र को विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया। तब से लेकर (1977) से 2013 तक इस सीट से 9 बार चुनाव हुए है जिसमे भाजपा (एक बार जनता पार्टी जेपी के बैनर पर) ने पांच बार जबकि कांग्रेस ने चार बार प्रतिनिधित्व किया है। कांग्रेस की ओर से कटारा परिवार ने तीन बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में इस बार भी कांग्रेस ने कटारा परिवार पर भरोसा जताते हुए युवा चेहरे विवेक कटारा पर दांव लगाया है जबकि भारतीय जनता पार्टी ने निवर्तमान विधायक फूलसिह मीणा पर ही दांव खेला है। मुख्य मुकाबला इन दोनों उम्मीद्वारो के बीच ही तय माना जा रहा है। हालाँकि इन दोनों के अलावा क्षेत्र से कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया के घनश्याम सिंह तावड़, बहुजन समाज पार्टी के लक्ष्मण, बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रभुलाल मीणा, पहली बार चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी से भरत मीणा और जनता सेना राजस्थान से सोमेश्वर मीणा भी अपना भाग्य आजमा रहे है। अब जनता जनार्दन किसके सर ताज रखती है वह तो नतीजे आने पर ही पता लग पायेगा।

आइए नज़र डालते है इस सीट के पिछले चुनावी परिणामो पर

पहली बार इस सीट पर हुए चुनाव ने जनता लहर के चलते इस सीट से जनता पार्टी (जेपी) के टिकट पर नन्द लाल मीणा ने कांग्रेस के जय नारायण को 10385 वोटो से हराया था। उसके बाद संघ परिवार में बिखराव के कारण 1980 में राजस्थान में हुए मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के भेरूलाल मीणा ने भाजपा के केसूलाल को 5193 मतों से मात दी। 1985 में पुनः इस सीट से कांग्रेस के खेमराज कटारा ने बीजेपी के केसुलाल को 19245 वोटो से शिकस्त दी। जबकि 1990 में भाजपा के चुन्नीलाल गरासिया ने कांग्रेस के नन्द लाल को 12549 मतों से परास्त किया। 1993 में भी चुन्नीलाल गरासिया ने अपना जलवा बरकरार रखते हुए कांग्रेस के हरी प्रसाद परमार को 13106 मतों से हराया।

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वर्ष 1998 के चुनाव में कांग्रेस के खेमराज कटारा ने चुन्नीलाल गरासिया को 20331 वोटो से शिकस्त दी। 2003 में भाजपा की वंदना मीणा ने कांग्रेस के खेमराज कटारा को 2551 के मामूली अंतर से हराया। साल 2008 के खेमराज कटारा के निधन के बाद उनकी पत्नी सज्जन कटारा को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया। सज्जन कटारा ने भाजपा की वंदना मीणा को 10696 मतों से परास्त किया। 2013 में मोदी लहर के चलते भाजपा के फूल सिंह मीणा ने कांग्रेस की सज्जन कटारा को 13764 के अंतर से हराया था।

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