भूमि विकास बैंक की शाखाओं स्थानान्तरित न करने का आग्रह
उदयपुर, 8 नवंबर 2019। राज्य सरकार केे निर्देशानुसार आर्थिक सक्षमता के आधार पर भूमि विकास बैंक की शाखाओं को अस्थाई रूप से मुख्यालय स्तर पर स्थानान्तरित किये जाने के आदेश प्राप्त हुए है।
भूमि विकास बैंक, उदयपुर के संचालक सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष बैंक मथुरेश नागदा ने बताया कि इस सम्बन्ध में बैंक की संचालक मण्डल की बैठक 2 नवंबर को राज्य सरकार के निर्णय की अनुपालना के तहत् बैंक की शाखाओं को मुख्यालय स्तर पर स्थानान्तरित किये जाने सम्बन्धित कार्यवाही पूर्ण की जा रही है। लेकिन बोर्ड इस पर पूर्ण रूप से सहमत नही है।
उन्होंने बताया की यह व्यवहारिक दृष्टि से उचित नही है। उदयपुर जिला जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। जिले का भौगोलिक क्षेत्र काफी विस्तृृत है। बैंक द्वारा दूरदराज क्षेत्र में ऋण वितरण किया गया है। जिस हेतु बैंक सुपरवाईजर को वसूली हेतु फिल्ड में जाना पडता है। बैंक की शाखाओ को मुख्यालय पर स्थानान्तरित किये जाने के बाद ऋणी कृषक द्वारा वसूली की किश्त जमा कराने हेतु मुख्यालय उदयपुर आना पडेगा। जो जनजाति क्षेत्र के ऋणी कृषको हेतु काफी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
नागदा ने बताया कि जहाॅ तक आर्थिक स्थिति को आधार मानते हुए शाखाओं को मुख्यालय पर स्थानान्तरित किया जाता है तो इसके पश्चात् बैंक को हाल ही में राज्य भूमि विकास बैंक द्वारा ऋण वितरण के लक्ष्य प्राप्त हुए है। इस बैंक की शाखा गोगुन्दा में कोटडा पं.स जनजाति आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। इसी तरह शाखा सलुम्बर में भी लसाडिया पं.स जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। अतः शाखाओं के अभाव में कोटडा, लसाडिया क्षेत्र के जनजाति -ादिवासी क्षेत्र के काश्तकारों को यदि ऋण आवेदन करना है तो उदयपुर मुख्यालय पर आना पडेगा एवं करीब 500 रूपये का किराया भुगतान करना पडेगा।
लक्ष्यों की पूर्ति एवं वसूली हेतु शाखाओं के अभाव में कठिनाई का सामना करना पडेगा एवं बैंक पर व्यय भार भी अधिक पडे़गा। वैसे भी वर्तमान में शाखा पर एक ही कर्मचारी कार्यरत है एवं शाखा भवन किराया एवं विद्युत खर्च के मासिक बिल के अलावा कोई व्यय भार नही है।
इस बैंक की दोनों शाखाओं सलुम्बर एवं गोगुन्दा जो ट्राईबल बेल्ट में गत 40-42 वर्षो से कार्यरत है यदि इन दोंनो शाखाओ को मुख्यालय स्तर पर स्थानान्तरित किया जाता है तो बैंक की वसूली एवं ऋण वितरण पर विपरित प्रभाव पडेगा एवं क्षेत्र के कृषक वर्ग को काफी परेशानी होगी एवं कठिनाई का सामना करना पडेगा।
नागदा द्वारा इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिले के किसानों के जनहित में मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार एवं सहकारिता मंत्री, राजस्थान सरकार को इस निर्णय पर पुर्नविचार हेतु पत्र प्रेषित किया है।
