उदयपुर नगरीय सीमा के गांवों को गंदगी विसर्जन स्थल बनने से रोकना होगा

उदयपुर नगरीय सीमा के गांवों को गंदगी विसर्जन स्थल बनने से रोकना होगा

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस
 
उदयपुर नगरीय सीमा के गांवों को गंदगी विसर्जन स्थल बनने से रोकना होगा
गंदे पानी से सिंचाई खतरनाक

उदयपुर, 7 जून 2020।  हर नागरिक को रसायनों व जीवाणुओ से मुक्त, शुद्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो, इसके लिये उत्पादन स्थल से लेकर घर की रसोई तक हर आयाम पर कार्य करना होगा। यह विचार खाद्य सुरक्षा दिवस पर रविवार को आयोजित संवाद में रखे गए। संवाद का आयोजन  इंडिया वाटर पार्टनरशिप के तत्वावधान में झील मित्र संस्थान, झील संरक्षण समिति एवं गांधी मानव कल्याण समिति के साझे में हुआ।

संवाद में डॉ अनिल मेहता ने कहा कि अन्न, फल, सब्जी उत्पादन में कीटनाशकों का बेतहाशा व अनियंत्रित उपयोग हो रहा है। यह कीटनाशक हमारे शरीर मे पंहुच रहे है व नुकसान पंहुचा रहे है। मेहता ने कहा कि उदयपुर सहित अनेक शहरों व कस्बो में सीवरेज व गंदे पानी से सिंचाई होती है। इससे किसान साथियों व उनके परिवारों के स्वास्थ्य को खतरा है। वंही, गंदे पानी के हानिकारक तत्व, हेवी मेटल व खतरनाक रसायन उगाई जा रही सब्जियों, फलों द्वारा अवशोषित हो कर हमारे पेट मे पंहुच रहे है। शहर की नगरीय सीमा के गांवों, पेरी अर्बन क्षेत्रो को गंदे पानी के विसर्जन के केंद्र बनने से रोकना होगा।

झील विकास प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि गेंहू,चावल, दाल सहित समस्त अन्न में पोषक तत्वों की मात्रा घट चुकी है। खेतों से लेकर बाजार व घर तक आने में कई बार अन्न दूषित होता है। ऐसा खाद्य सुरक्षित नही रह जाता है। पालीवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। 

गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि घर घर में उपयोग हो रहे सफाई साधनों से लेकर सौंदर्य प्रसाधनों व दवाइयों  में कई रसायन होते है। ये सभी बह कर नदी नालों में पंहुचते है। जिससे सतही व भूजल प्रदूषित होता है। इस प्रक्रिया को रोकने के लिए जीवन शैली की सरल व प्रकृति आधारित बनाना जरूरी है।

पर्यावरणविद दिगम्बर सिंह व शिक्षाविद कुशल रावल ने कहा कि नगरीय व उपनगरीय क्षेत्रो में लोग घर के आंगन, बालकनी, छत पर आसान तरीके से सब्जियां उगा सकते है। इस छोटे से प्रयास से वे अपने परिवार को रसायन व जीवाणु मुक्त सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते है।

संवाद से पूर्व अन्न बचाओ, जल बचाओ विषयक पत्रक को जारी किया गया। इस अवसर पर देवराज सिंह, क्रुणाल कोष्ठी, द्रुपद सिंह ने भी विचार रखे।
 

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