रॉकवुडस स्कूल में वार्षिक खेल दिवस आयोजित

रॉकवुडस स्कूल में वार्षिक खेल दिवस आयोजित

खेलों में बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए सरकारों के प्रोत्साहन की आवश्यकता - हरमिलन कौर

 
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उदयपुर 16 दिसंबर 2023 । रॉकवुडस स्कूल में आयोजित हो रहे वार्षिक खेल महोत्सव उड़ान के समापन पर शनिवार को भारतीय एथलीट और एशियन गेम्स में भारत को रजत पदक दिलाने वाली हरमिलन कौर बैंस ने शिरकत की इस अवसर पर बैंस ने बच्चों को खेल के प्रति आकर्षण को बढ़ावा देने और भिन्न भिन्न खेलों में रुचि रखने की बात कहीं कहां खेल से शरीर का तन और मन सभी स्वस्थ और युवा बने रहते है। 

इस अवसर पर संस्था सह निदेशक विक्रमजीत सिंह शेखावत ने बताया कि पहले दिन प्री-प्राईमरी, कक्षा एक व दो के लिए विभिन्न रेसों का आयोजन किया गया। वहीं दूसरे दिन कक्षा तीन से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग प्रकार की रेस आयोजित की गई। जिसमें रिंग रेस, फिश रेस, पिरामिड रेस, रिले रेस थी। बच्चों द्वारा कौशल प्रदर्शन किया गया जिसमें अभिभावको ने उनका उत्साह बढ़ाया। 

कार्यक्रम की शुरूआत मार्च पास्ट से की गई। बैण्ड की स्वर लहरियों से वातावरण गुजायामान था। कार्यक्रम में खेल जगत की हस्ती श्रीमती अंजली सुराणा, विशिष्ट अतिथि संस्था संरक्षिका अलका शर्मा,  निदेशक दीपक शर्मा, ए.डी.एम. सिटी राजीव द्विवेदी उपस्थित थे।

विजेता प्रतिभागियों को प्राचार्या अंजला शर्मा, प्राचार्या डॉ वसुधा नील मणि, उपप्राचार्य जय सिंह व उपप्राचार्या  रेणु राठौड़ ने पुरस्कार प्रदान किए।

राष्ट्रीय खेलों के खिलाड़ियों को अधिक प्रोत्साहन की आवश्यकता - हरमिलान

ट्रैक पर तूफ़ान की तरह दौड़ने वाली भारत की रनिंग क्वीन हरमिलन बैंस उदयपुर में रॉकवुड स्कूल पहुंची इस दौरान उन्होंने अपने जीवन के एक्सपीरियंस को शेयर किया। हरमिलन ने बताया कि उनके एथलीट बनने का करियर काफी ज्यादा मुश्किल भरा रहा था क्योंकि शुरू से ही उन्हें हर कार्य के लिए मना कर दिया जाता था, इस वजह से एथलीट बनना उनके लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज रहा।

3 साल की उम्र में ट्रैक पर ले जाकर कर दिया था खड़ा

देश में आज रनिंग क्वीन से अपनी पहचान बना चुकी हर मिलन बताती है कि वह जब 3 वर्ष की थी तभी से उन्हें ट्रैक पर ले जाकर खड़ा कर दिया गया था और उन्हें एथलीट बनाने के लिए कहा जा रहा था,लेकिन हेल्थ की वजह से वह इसमें आगे नही बढ़ रही थी। लेकिन उन्होंने चैलेंज लिए और आगे बढ़ती रही जिस वजह से एशियन गेम्स में भारत को मेडल दिलाया।

मां के गर्भ से शुरू हुआ एथलीट बनने का सफर 

हरमिलान ने बताया की उनका एथलीट बनने का सफर उनकी मां के गर्भ से शुरू हो गया था जब उनकी मां 3 माह की गर्भवती थी और उन्हें अपनी नौकरी बचाने के लिए रनिंग का टेस्ट दिया और अपनी नौकरी बचाई। हरमिलन का जब जन्म हुआ इसके बाद उन्होंने एथलीट बनाने की ट्रैनिंग शुरू हो गई।

हरमिलान ने साल 2015 में रांची में आयोजित अंडर- 18 नेशनल चैंपियनशिप के 800 मीटर और 1500 मीटर रेस में रजत पदक हासिल किया। इसके बाद उन्होंने साल 2016 में वियतनाम के हो ची-मिन्ह में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप की 1500 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पहला अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन ग्रां प्री में भी 800 मीटर स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया

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