बमबारी के बीच पाकिस्तान में चला दी थी भारतीय रेल


बमबारी के बीच पाकिस्तान में चला दी थी भारतीय रेल

सेवानिवृत्त सैनिकों ने 1971 के भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश निर्माण से जुड़ी यादें ताजा की

 
1971
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-1971 के भारत-पाक युद्ध के शूरवीरों और परिजनों का सम्मान समारोह
-कलक्टर और एसपी ने सैनिकों के साहस और जज्बे को किया सलाम

उदयपुर, 16 दिसंबर 2021। स्वर्णिम विजय दिवस के अवसर पर गुरुवार को उदयपुर जिला प्रशासन द्वारा 1971 के भारत-पाक युद्ध में हिस्सा लेने वाले शूरवीर, वीरांगनाओं, गैलंट्री अवॉर्ड धारकों व उनके परिजनों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त सैनिकों ने 1971 के भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश निर्माण से जुड़ी यादें ताजा की। कार्यक्रम के आखिर में सामूहिक राष्ट्रगान हुआ, तो पूरा सभागार देशभक्ति से सराबोर हो उठा।

1971 के युद्ध में पता चली नेवी की अहमियतः कर्नल श्रीकांत चेनजी

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और आईआईआरएफ के फाउंडर प्रेसिडेंट कर्नल (डॉ.) श्रीकांत चेनजी ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय सेनाओं की वीरता और पराक्रम से जुडे़ किस्से सुनाए। चेनजी ने पीपीटी के माध्यम से भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि, भारतीय सेनाओं के शौर्य के वृत्तांत साझा किए। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण पर आधारित एक शार्ट मूवी भी दिखाई। कर्नल चेनजी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान पहली बार पता चला कि नेवी की कितनी अहमियत है। भारतीय नेवी ने उस समय बंगाल की खाड़ी में अद्भुत पराक्रम का प्रदर्शन किया।

बमबारी के बीच पाकिस्तान में चला दी थी भारतीय रेल वीर चक्र विजेता हवलदार दुर्गाशंकर पालीवाल ने 

वीर चक्र विजेता हवलदार दुर्गाशंकर पालीवाल ने बताया कि कैसे उन्होंने 1971 के युद्ध में भारतीय सेना को सीमा के उस पार जाकर असलहा और गोला-बारूद पहुचाने का काम किया था। पालीवाल ने बताया कि उस समय भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा में करीब 30 किलोमीटर तक कब्ज़ा कर लिया था और जब सेना का असलहा ख़त्म होने को आया था तब और असलहा उपलब्ध कराने की जि़म्मेदारी दुर्गाशंकर पालीवाल को दी गई थी। दुर्गाशंकर ट्रेन लेकर बाड़मेर के पास मुनाबाव रेलवे स्टेशन और पाकिस्तान के खोखरापर से होते हुए 11 दिसम्बर 1971 को बारूद से भरी हुई ट्रेन लेकर पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए।

पाकिस्तानी विमानों को छकाया, रेजीमेंट और गोला-बारूद बचाया

पाकिस्तानी सीमा में खोखरापर से कुछ ही दूरी पर छह पाकिस्तानी विमान बमबारी करने लगे. इन विमानों ने दुर्गाशंकर की ट्रेन को घेर लिया था लेकिन वे एक पल के लिए भी नहीं घबराए. उन्होंने अपनी ट्रेन की रफ़्तार बढ़ा दी और सिंध हैदराबाद की ओर जाने लगे. पाकिस्तानी विमानों ने कई बम गिराए लेकिन ट्रेन को नुक्सान नहीं पहुंचा पाए। जब विमानों में बम ख़त्म हो गए और रीलोड करने के लिए वे सिंध हैदराबाद की ओर उड़ान भरते हुए निकल गए। दुर्गाशंकर ने सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए वे रिवर्स में ट्रेन को 25 किलोमीटर तक खींच ले गए। उन्होंने पर्चे की बेरी पहुंचकर अपनी बटालियन को भी इस घटना की सूचना दे दी। वहां से लौटते हुए फिर से पाकिस्तानी विमानों ने ट्रेन का पीछा किया और खोखरापर से 5 किलोमीटर से पहले रेल लाइन पर एक हज़ार पौंड का बेम फेंका. बम से निकलती हुई चिंगारियों से दुर्गाशंकर का हाथ और मुंह झुलस गया, लेकिन उन्होंने अपनी कोहनियों से ट्रेन चलाना जारी रखा। बमबारी के कारण रेल ट्रैक टूट चुका था जिसके बाद दुर्गाशंकर हाथ में बन्दूक लेकर ट्रेन से निकल गए और करीब 2 किलोमीटर आगे उन्होंने भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर को इशारा कर उतरवाया और अधिकारी को सूचना दी।

जब कलेक्टर चेतन देवड़ा ने सेवानिवृत्त सूबेदार को पहनाई टाई:

जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा ने भारत-पाक युद्ध के वीर सैनिकों से एक-एक कर उनकी सीट पर जाकर मुलाकात की और उनकी कुशलक्षेम पूछी। इसी दौरान एक दिलचस्प वाकया भी हुआ। कलक्टर चेतन देवड़ा सेवानिवृत्त सूबेदार भीम सिंह के पास पहुंचे और उन्होंने सूबेदार भीम सिंह से 1971 के युद्ध के अनुभव जाने। बातचीत के दौरान जब कलक्टर चेतन देवड़ा की नजर सेवानिवृत्त सूबेदार भीम सिंह की टाई पर पड़ी तो उन्होंने खुद अपने हाथ से उनकी टाई बांधी और उन्हें स्वर्णिम विजय दिवस की शुभकामनाएं दी। 

सेवानिवृत्त सूबेदार भीम सिंह ने बताया कि उनकी रेजिमेंट रेजीमेंट ने हिंदुस्तान के हिली मालदा से 23 नवंबर 1971 को आक्रमण शुरू किया। खानपुर, सैदपुर जो कि पाकिस्तान के वेस्ट दिनारपुर का हिस्सा थे उनको कब्जे में किया। उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर 1971 को युद्ध का ऐलान हो गया। बोगरा रंगपुर का हाईवे जो ढाका को जाता है, उसको कट किया। वहां पर भीषण युद्ध हुआ और 12 और 13 दिसंबर को आमने-सामने की लड़ाई में पाकिस्तान का जनरल नियाजी अपनी सेना को छोड़कर भाग गया और 69 आर्म्ड रेजीमेंट ने बोगरा को फतह किया। सूबेदार भीम सिंह ने बताया कि इस उपलक्ष में  69 आर्म्ड रेजीमेंट हर साल बोगरा डे मनाती है। इसके साथ ही रेजिमेंट ने पाकिस्तान की 29 केवलरी और 7 बलोच रेजिमेंट को अरेस्ट किया।

1971 के युद्ध से दुनिया में बढ़ा भारत का कदः जिला कलक्टर देवड़ा

कलक्टर देवड़ा ने कहा कि 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद एशिया और दुनिया का नक्शा बदल गया। एक नए देश बांग्लादेश का उदय हुआ। यह हिंदुस्तान की राजनीतिक, कूटनीतिक और भारतीय सेनाओं की जीत थी। इस युद्ध ने पूरी दुनिया को बताया कि हिंदुस्तान का क्या कद है। पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने सरेंडर किया। ऐसा कहा जाता है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सरेंडर था। जिन वीर सैनिकों ने युद्ध में भाग लिया, अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया देश के लिए मैं उनको श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।

इस अवसर पर नगर निगम उदयपुर के सभागार में जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा, एसपी मनोज चौधरी, एडीएम प्रशासन ओपी बुनकर ने वीर चक्र से सम्मानित कमाण्डर केशर सिंह पंवार, हवलदार दुर्गाशंकर पालीवाल, शौर्य चक्र से सम्मानित कर्नल दुर्गाशंकर पालीवाल सहित 60 से अधिक सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल सिंह राठौड़, निगम आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ, यूआईटी सचिव अरूण कुमार हसीजा, जिला परिषद सीईओ गोविंद सिंह राणावत, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। 

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